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सरकार को हर धर्म की रक्षा करनी चाहिए : डॉ. फारूक
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श्रीनगर। नेशनल कॉन्फ्रेंस (नेकां) के अध्यक्ष डॉ. फारूक अब्दुल्ला ने कहा कि भारत विविधता में एकता के लिए जाना जाता है। सरकार को हर धर्म की रक्षा करनी चाहिए। उन्होंने यह बयान असम विधानसभा द्वारा मुस्लिम विधायकों को नमाज़ की सुविधा प्रदान करने के लिए शुक्रवार को दिए जाने वाले दो घंटे के अवकाश को बंद करने के एक दिन बाद दिया।
अब्दुल्ला ने कहा कि कुछ भी स्थायी नहीं है और समय आने पर चीजें बदल जाएंगी। उन्होंने कहा, जब समय आएगा, यह बदल जाएगा। अच्छी चीजें फिर से प्रबल होंगी। हम उनसे कहेंगे कि हमारी सरकार आने दो, ऐसी हरकतें मत करो।
डॉ. फारूक ने कहा, यह देश विविधता में एकता के लिए जाना जाता है। हमारे पास हर धर्म है, हर भाषा है -चाहे वह तमिलनाडु हो, कश्मीर हो, बंगाल हो, महाराष्ट्र हो या कोई भी राज्य हो। हर राज्य की संस्कृति अलग है और यही कारण है कि भारत एक फेडरल ढांचा है और हमें हर धर्म की रक्षा करनी है।
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नेकां अध्यक्ष ने कहा कि जम्मू-कश्मीर के लोगों को भी हर धर्म के लोगों का सम्मान करना चाहिए और उनकी रक्षा करनी चाहिए। उन्होंने कहा, जब उनके प्रति हमारा दृष्टिकोण अच्छा होगा, तो यह पूरे देश में अच्छा होगा। पीडीपी अध्यक्ष महबूबा मुफ्ती की टिप्पणी के बारे में एक सवाल पर कि नेकां उपाध्यक्ष उमर अब्दुल्ला का दावा है कि जमात-ए-इस्लामी एक समय चुनावों को हराम मानता था, लेकिन अब हलाल मानता है, खेदजनक था। नेकां अध्यक्ष ने कहा, एक-दूसरे पर उंगली उठाने से कुछ नहीं होगा। मैं उनके बारे में कुछ नहीं कहूंगा। अल्लाह उन्हें आशीर्वाद दें, वह अपने रास्ते पर चलें, लेकिन देश की रक्षा के बारे में सोचें उन्हें इस तरह से दूर रहना चाहिए। डॉ. फारूक अब्दुल्ला ने विधानसभा चुनाव लड़ने के लिए प्रतिबंधित जमात-ए-इस्लामी (जेईआई) के पूर्व सदस्यों को भी बधाई दी। अब्दुल्ला ने शेख हमजा मखदूमी के प्रतिष्ठित सूफी ज़ियारत का दौरा किया और नतमस्तक हुए।
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अब्दुल्ला ने कहा कि कुछ भी स्थायी नहीं है और समय आने पर चीजें बदल जाएंगी। उन्होंने कहा, जब समय आएगा, यह बदल जाएगा। अच्छी चीजें फिर से प्रबल होंगी। हम उनसे कहेंगे कि हमारी सरकार आने दो, ऐसी हरकतें मत करो।
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डॉ. फारूक ने कहा, यह देश विविधता में एकता के लिए जाना जाता है। हमारे पास हर धर्म है, हर भाषा है -चाहे वह तमिलनाडु हो, कश्मीर हो, बंगाल हो, महाराष्ट्र हो या कोई भी राज्य हो। हर राज्य की संस्कृति अलग है और यही कारण है कि भारत एक फेडरल ढांचा है और हमें हर धर्म की रक्षा करनी है।
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नेकां अध्यक्ष ने कहा कि जम्मू-कश्मीर के लोगों को भी हर धर्म के लोगों का सम्मान करना चाहिए और उनकी रक्षा करनी चाहिए। उन्होंने कहा, जब उनके प्रति हमारा दृष्टिकोण अच्छा होगा, तो यह पूरे देश में अच्छा होगा। पीडीपी अध्यक्ष महबूबा मुफ्ती की टिप्पणी के बारे में एक सवाल पर कि नेकां उपाध्यक्ष उमर अब्दुल्ला का दावा है कि जमात-ए-इस्लामी एक समय चुनावों को हराम मानता था, लेकिन अब हलाल मानता है, खेदजनक था। नेकां अध्यक्ष ने कहा, एक-दूसरे पर उंगली उठाने से कुछ नहीं होगा। मैं उनके बारे में कुछ नहीं कहूंगा। अल्लाह उन्हें आशीर्वाद दें, वह अपने रास्ते पर चलें, लेकिन देश की रक्षा के बारे में सोचें उन्हें इस तरह से दूर रहना चाहिए। डॉ. फारूक अब्दुल्ला ने विधानसभा चुनाव लड़ने के लिए प्रतिबंधित जमात-ए-इस्लामी (जेईआई) के पूर्व सदस्यों को भी बधाई दी। अब्दुल्ला ने शेख हमजा मखदूमी के प्रतिष्ठित सूफी ज़ियारत का दौरा किया और नतमस्तक हुए।