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आतंकियों के खलल पहुंचाने के इनपुट पर बनती है विशेष रणनीति : आईजीपी
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श्रीनगर। जम्मू-कश्मीर पुलिस के कश्मीर रेंज के आईजीपी वीके विर्दी ने कहा कि आतंकियों के किसी भी प्रक्रिया में खलल पहुंचाने के इनपुट हमेशा सुरक्षा एजेंसियों को मिलते रहते हैं। उसे ध्यान में रखते हुए सभी सुरक्षा एजेंसियों की विशेष रणनीति तैयार रहती है। वहीं प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की 19 सितंबर को श्रीनगर यात्रा पर उन्होंने कहा कि उनके दौरे को लेकर बहुस्तरीय सुरक्षा व्यवस्था की जाएगी। श्रीनगर शहर में पहले से ही सतर्कता रखी गई है।
आईजीपी वीके विर्दी ने कहा, विधानसभा चुनाव में मतदान 18 सितंबर को है। इसके लिए पुख्ता और विस्तृत सुरक्षा प्रबंध किए गए हैं। इसमें सेंट्रल आर्म्ड पुलिस फोर्सेज (सीएपीएफ), जम्मू-कश्मीर आर्म्ड पुलिस (जेकेएपी) और जम्मू-कश्मीर पुलिस (जेकेपी) शामिल रहेगी। इसके अलावा पोलिंग स्टेशन और स्ट्रांग रूम्स के लिए मल्टी-टियर सुरक्षा व्यवस्था की गई है। साथ ही जो इंटर डिस्ट्रिक्ट नाकों पर पर एफएसटी (फ्लाइंग स्क्वाड टीम) और एसएसटी (स्टेटिक सर्विलांस टीम) और क्यूआरटी तैनात है। ताकि स्वतंत्र और निष्पक्ष तरीके के साथ साथ उचित सुरक्षित वातावरण के बीच चुनाव हो सकें।
चुनाव के पहले चरण के लिए संवेदनशील मतदान केंद्रों को लेकर पूछे सवाल पर आईजीपी ने कहा, आंकड़े साझा नहीं किए जा सकते। संवेदनशील मतदान केंद्रों को ध्यान में रखते हुए उचित और पर्याप्त सुरक्षा व्यवस्था की जाती है। ईसीआई के निर्देशों के अनुसार जो भी सुरक्षा व्यवस्था की जानी चाहिए उसके तहत सभी इंतजाम किये गए हैं।
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एलओसी के पार आतंकवादियों की मौजूदगी और उनकी ओर से चुनावों में खलल डालने की कोशिशों को लेकर आईजीपी ने कहा, ऐसे इनपुट हमेशा सुरक्षा एजेंसियों को मिलते रहते हैं। उसको ध्यान में रखते हुए जम्मू कश्मीर पुलिस, सेना और अन्य सुरक्षा एजेंसियों की एक विशेष रणनीति रहती है, ताकि विघ्न डालने वाले प्रयासों को नाकाम बनाया जा सके। उन्होंने कहा कि जिस भी प्रकार के इनपुट आते हैं चाहे वो चुनाव प्रचार या किसी और से संबंधित हों, उसके लिए हमने एक विस्तृत सुरक्षा प्लान तैयार किया है। हाल ही में एक इनपुट के आधार पर तुरंत कार्रवाई करते हुए बारामुला पुलिस और सेना ने तीन स्थानीय टीआरएफ के आतंकवादियों को मार गिराया था।
जम्मू-कश्मीर में दस साल बाद होने वाले चुनावों में सुरक्षा कर्मियों की तैनाती की संख्या को लेकर आईजीपी ने कहा कि महत्वपूर्ण और संवेदनशीलता का एक स्केल होता है। उसके तहत जितनी नफरी तैनात की जानी होती है, उसे तैनात किया गया है। करीब 300 से अधिक कंपनियां चुनावों के दौरान तैनात की गई हैं।
चुनावों के दौरान जम्मू कश्मीर पुलिस के विशेष बम डिस्पोजल स्क्वाड (बीडीएस) को लेकर आईजीपी ने कहा कि इस तरह के इंतज़ाम पहले भी रहते थे, क्योंकि इस (चुनावों) दौरान काफी मूवमेंट रहती है और एरिया की सेनिटेशन और उसे सुरक्षित करने के लिए इस तरह के संसाधनों का इस्तेमाल किया जाता है, ताकि यह सारी प्रक्रिया के दौरान सहायक साबित हो सके।
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आईजीपी वीके विर्दी ने कहा, विधानसभा चुनाव में मतदान 18 सितंबर को है। इसके लिए पुख्ता और विस्तृत सुरक्षा प्रबंध किए गए हैं। इसमें सेंट्रल आर्म्ड पुलिस फोर्सेज (सीएपीएफ), जम्मू-कश्मीर आर्म्ड पुलिस (जेकेएपी) और जम्मू-कश्मीर पुलिस (जेकेपी) शामिल रहेगी। इसके अलावा पोलिंग स्टेशन और स्ट्रांग रूम्स के लिए मल्टी-टियर सुरक्षा व्यवस्था की गई है। साथ ही जो इंटर डिस्ट्रिक्ट नाकों पर पर एफएसटी (फ्लाइंग स्क्वाड टीम) और एसएसटी (स्टेटिक सर्विलांस टीम) और क्यूआरटी तैनात है। ताकि स्वतंत्र और निष्पक्ष तरीके के साथ साथ उचित सुरक्षित वातावरण के बीच चुनाव हो सकें।
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चुनाव के पहले चरण के लिए संवेदनशील मतदान केंद्रों को लेकर पूछे सवाल पर आईजीपी ने कहा, आंकड़े साझा नहीं किए जा सकते। संवेदनशील मतदान केंद्रों को ध्यान में रखते हुए उचित और पर्याप्त सुरक्षा व्यवस्था की जाती है। ईसीआई के निर्देशों के अनुसार जो भी सुरक्षा व्यवस्था की जानी चाहिए उसके तहत सभी इंतजाम किये गए हैं।
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एलओसी के पार आतंकवादियों की मौजूदगी और उनकी ओर से चुनावों में खलल डालने की कोशिशों को लेकर आईजीपी ने कहा, ऐसे इनपुट हमेशा सुरक्षा एजेंसियों को मिलते रहते हैं। उसको ध्यान में रखते हुए जम्मू कश्मीर पुलिस, सेना और अन्य सुरक्षा एजेंसियों की एक विशेष रणनीति रहती है, ताकि विघ्न डालने वाले प्रयासों को नाकाम बनाया जा सके। उन्होंने कहा कि जिस भी प्रकार के इनपुट आते हैं चाहे वो चुनाव प्रचार या किसी और से संबंधित हों, उसके लिए हमने एक विस्तृत सुरक्षा प्लान तैयार किया है। हाल ही में एक इनपुट के आधार पर तुरंत कार्रवाई करते हुए बारामुला पुलिस और सेना ने तीन स्थानीय टीआरएफ के आतंकवादियों को मार गिराया था।
जम्मू-कश्मीर में दस साल बाद होने वाले चुनावों में सुरक्षा कर्मियों की तैनाती की संख्या को लेकर आईजीपी ने कहा कि महत्वपूर्ण और संवेदनशीलता का एक स्केल होता है। उसके तहत जितनी नफरी तैनात की जानी होती है, उसे तैनात किया गया है। करीब 300 से अधिक कंपनियां चुनावों के दौरान तैनात की गई हैं।
चुनावों के दौरान जम्मू कश्मीर पुलिस के विशेष बम डिस्पोजल स्क्वाड (बीडीएस) को लेकर आईजीपी ने कहा कि इस तरह के इंतज़ाम पहले भी रहते थे, क्योंकि इस (चुनावों) दौरान काफी मूवमेंट रहती है और एरिया की सेनिटेशन और उसे सुरक्षित करने के लिए इस तरह के संसाधनों का इस्तेमाल किया जाता है, ताकि यह सारी प्रक्रिया के दौरान सहायक साबित हो सके।