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Jammu News: इंजी. रशीद के भाई की स्वैच्छिक सेवानिवृत्ति का आवेदन मंजूर, एआईपी में हुए शामिल
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श्रीनगर। बारामुला से सांसद और अवामी इत्तेहाद पार्टी (एआईपी) के प्रमुख इंजीनियर अब्दुल रशीद के भाई खुर्शीद अहमद शेख ने अपने पद से इस्तीफा दे दिया है। उन्होंने स्वैच्छिक सेवानिवृत्ति (वीआरएस) का आवेदन दिया था, जिसे जम्मू-कश्मीर सरकार ने मंजूर कर लिया है। चर्चा है कि वह विधानसभा चुनाव लड़ सकते हैं। शेख 2003 से शिक्षक के पद पर तैनात थे। उनके उत्तरी कश्मीर में लंगेट सीट से चुनाव लड़ने की उम्मीद है। इस सीट पर उनके भाई इंजीनियर रशीद चुनाव लड़ते थे।
खुर्शीद अहमद शेख ने अमर उजाला के साथ फोन पर विशेष बातचीत में एआईपी में शामिल होने की पुष्टि की। उन्होंने कहा, वह एआईपी में एक कार्यकर्ता के तौर पर औपचारिक रूप से शामिल हो गए हैं। अभी पार्टी की पार्लियामेंट अफेयर्स कमेटी विचार विमर्श कर रही है। वह जो भी फैसला लेगी, उस सीट से वह चुनाव लड़ेंगे।
यह पूछे जाने पर कि 15 साल की नौकरी शेष होने पर राजनीति में शामिल होने का क्या कारण है। इस पर उन्होंने कहा, इसका कारण मौजूदा हालात हैं। इंजीनियर रशीद को भी उत्पीड़न का सामना करना पड़ा है। उनके खिलाफ सियासी साजिशें रची गईं। यहां के सियासी दलों ने इंजीनियर रशीद को जेल में बंद कराया और चाहते हैं कि वो जेल में ही बंद रहे। मैंने सोचा कि राजनीतिक जंग लड़ी जाए और पार्टी को मजबूत किया जाए। लोगों ने रशीद को वोट देकर सांसद बनाया, आज भी लोग घर आ रहे हैं पार्टी से जुड़ रहे हैं। उनकी (रशीद) गैरहाजिरी में एक सरकारी कर्मचारी होने के नाते मेरे ऊपर बंदिशें थीं। मैं न उनकी खिदमत कर सकता था और न ही उनके लिए बात कर सकता था। इसी कारण मैंने नौकरी छोड़ दी।
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अक्सर परिवारवाद की बात आने पर संबंधित एक सवाल के जवाब में शेख ने कहा, सियासी लोगों का काम ही है सवाल उठाना। ऐसा कुछ नहीं है कि इंजीनियर रशीद कोई सोने का तख्त छोड़कर मुझे उसे संभालने के लिए कह रहे हैं। हम खानदानी राज ही नहीं बल्कि राज के खिलाफ भी हैं। हम खिदमत और कुर्बानी पर यकीन रखते हैं। जब इंजीनियर रशीद भी सियासत में आए तब भी उनकी नौकरी 14-15 साल थी और मेरी भी करीब 15 साल नौकरी अभी थी। क्या मुझे कोई भरोसा है कि मैं नौकरी छोड़कर एमएलए बन जाऊंगा। हम लोगों में जाकर उनकी सेवा करने के लिए सियासत में आए हैं।
उन्होंने कहा, सौ प्रतिशत सही है कि लोकतांत्रिक तरीके से सब हल निकाले जा सकते हैं। अगर ऐसा नहीं होता तो जब 2019 में इंजीनियर रशीद को गिरफ्तार किया हम भी गैर लोकतांत्रिक तरीके से उनकी रिहाई की बात करते।
बता दें कि स्कूल शिक्षा विभाग के प्रमुख सचिव आलोक कुमार के आदेश में कहा गया है कि सरकार ने खुर्शीद अहमद शेख के स्वैच्छिक सेवानिवृत्ति के अनुरोध को स्वीकार कर लिया है। शेख की स्वैच्छिक सेवानिवृत्ति को एक सितंबर 2024 से मंजूरी दी जाती है। आदेश में कुछ शर्तें रखी गई हैं, जिसमें कहा गया है कि विजिलेंस से क्लीयरेंस जरूरी है।
लंगेट से पहले विधायक रहे और मौजूदा समय में बारामुला से सांसद इंजीनियर अब्दुल रशीद राज्य और केंद्र सरकार की नीतियों के मुखर आलोचक रहे हैं। वह कथित आतंकी फंडिंग मामले में फिलहाल तिहाड़ जेल में बंद हैं। हाल ही में हुए लोकसभा चुनावों में इंजीनियर रशीद ने नेशनल कॉन्फ्रेंस के उपाध्यक्ष और पूर्व मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला को दो लाख वोटों से हराकर बारामुला सीट पर कब्जा किया था।
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खुर्शीद अहमद शेख ने अमर उजाला के साथ फोन पर विशेष बातचीत में एआईपी में शामिल होने की पुष्टि की। उन्होंने कहा, वह एआईपी में एक कार्यकर्ता के तौर पर औपचारिक रूप से शामिल हो गए हैं। अभी पार्टी की पार्लियामेंट अफेयर्स कमेटी विचार विमर्श कर रही है। वह जो भी फैसला लेगी, उस सीट से वह चुनाव लड़ेंगे।
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यह पूछे जाने पर कि 15 साल की नौकरी शेष होने पर राजनीति में शामिल होने का क्या कारण है। इस पर उन्होंने कहा, इसका कारण मौजूदा हालात हैं। इंजीनियर रशीद को भी उत्पीड़न का सामना करना पड़ा है। उनके खिलाफ सियासी साजिशें रची गईं। यहां के सियासी दलों ने इंजीनियर रशीद को जेल में बंद कराया और चाहते हैं कि वो जेल में ही बंद रहे। मैंने सोचा कि राजनीतिक जंग लड़ी जाए और पार्टी को मजबूत किया जाए। लोगों ने रशीद को वोट देकर सांसद बनाया, आज भी लोग घर आ रहे हैं पार्टी से जुड़ रहे हैं। उनकी (रशीद) गैरहाजिरी में एक सरकारी कर्मचारी होने के नाते मेरे ऊपर बंदिशें थीं। मैं न उनकी खिदमत कर सकता था और न ही उनके लिए बात कर सकता था। इसी कारण मैंने नौकरी छोड़ दी।
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अक्सर परिवारवाद की बात आने पर संबंधित एक सवाल के जवाब में शेख ने कहा, सियासी लोगों का काम ही है सवाल उठाना। ऐसा कुछ नहीं है कि इंजीनियर रशीद कोई सोने का तख्त छोड़कर मुझे उसे संभालने के लिए कह रहे हैं। हम खानदानी राज ही नहीं बल्कि राज के खिलाफ भी हैं। हम खिदमत और कुर्बानी पर यकीन रखते हैं। जब इंजीनियर रशीद भी सियासत में आए तब भी उनकी नौकरी 14-15 साल थी और मेरी भी करीब 15 साल नौकरी अभी थी। क्या मुझे कोई भरोसा है कि मैं नौकरी छोड़कर एमएलए बन जाऊंगा। हम लोगों में जाकर उनकी सेवा करने के लिए सियासत में आए हैं।
उन्होंने कहा, सौ प्रतिशत सही है कि लोकतांत्रिक तरीके से सब हल निकाले जा सकते हैं। अगर ऐसा नहीं होता तो जब 2019 में इंजीनियर रशीद को गिरफ्तार किया हम भी गैर लोकतांत्रिक तरीके से उनकी रिहाई की बात करते।
बता दें कि स्कूल शिक्षा विभाग के प्रमुख सचिव आलोक कुमार के आदेश में कहा गया है कि सरकार ने खुर्शीद अहमद शेख के स्वैच्छिक सेवानिवृत्ति के अनुरोध को स्वीकार कर लिया है। शेख की स्वैच्छिक सेवानिवृत्ति को एक सितंबर 2024 से मंजूरी दी जाती है। आदेश में कुछ शर्तें रखी गई हैं, जिसमें कहा गया है कि विजिलेंस से क्लीयरेंस जरूरी है।
लंगेट से पहले विधायक रहे और मौजूदा समय में बारामुला से सांसद इंजीनियर अब्दुल रशीद राज्य और केंद्र सरकार की नीतियों के मुखर आलोचक रहे हैं। वह कथित आतंकी फंडिंग मामले में फिलहाल तिहाड़ जेल में बंद हैं। हाल ही में हुए लोकसभा चुनावों में इंजीनियर रशीद ने नेशनल कॉन्फ्रेंस के उपाध्यक्ष और पूर्व मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला को दो लाख वोटों से हराकर बारामुला सीट पर कब्जा किया था।