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जो भाजपा चाहती थी वैसा मैं नहीं कर सकता: अब्दुल रहीम राथर
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श्रीनगर। विधानसभा के स्पीकर अब्दुल रहीम राथर ने सोमवार को कहा कि जो भाजपा चाहती थी वैसा वह नहीं कर सकते।
उन्होंने कहा कि सदन में जब प्रस्ताव पेश किया गया उसे वहां भेज दिया गया जहां भेजना चाहिए था। राथर ने कहा कि सदन में केवल 28 सदस्य ही इस प्रस्ताव के हक में नहीं थे। उन्होंने कहा कि यह राजनीतिक दलों से पूछो, मैं एक गैर राजनीतिक शख्स हूं और मेरा किसी भी दल से कोई संबंध नहीं है। जिस समय सदन में प्रस्ताव पेश हुआ उसी समय हमने वो कार्रवाई की जो हमें करनी चाहिए थी।
उन्होंने कहा कि जहां तक हालातों का सवाल है कानून व्यवस्था स्टेट सब्जेक्ट नहीं है। कानून व्यवस्था और पुलिस केंद्र के पास है। हमारे मुख्यमंत्री ने संबंधित से कहा है कि कानून व्यवस्था को सतर्क कर ऐसी घटनाओं को
रोकना चाहिए। राथर ने एक अन्य सवाल के जवाब में कहा, स्पीकर पक्षपाती नहीं है, स्पीकर का कार्य महदूद होता है। उसे सदन की कार्यवाही संचालित करनी होती है, जब वोटिंग का समय आता है उसे गिनती करनी होती है - हक में कितने हैं और खिलाफ कितने हैं। 61 हक में थे बाकी 28 इसके खिलाफ थे। भाजपा का यह ख्याल था कि मैं 28 को 61 कर दूं, वो मुझसे नहीं हो सकता। मैंने हकीकत सामने रखी।
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उन्होंने कहा कि सदन में जब प्रस्ताव पेश किया गया उसे वहां भेज दिया गया जहां भेजना चाहिए था। राथर ने कहा कि सदन में केवल 28 सदस्य ही इस प्रस्ताव के हक में नहीं थे। उन्होंने कहा कि यह राजनीतिक दलों से पूछो, मैं एक गैर राजनीतिक शख्स हूं और मेरा किसी भी दल से कोई संबंध नहीं है। जिस समय सदन में प्रस्ताव पेश हुआ उसी समय हमने वो कार्रवाई की जो हमें करनी चाहिए थी।
उन्होंने कहा कि जहां तक हालातों का सवाल है कानून व्यवस्था स्टेट सब्जेक्ट नहीं है। कानून व्यवस्था और पुलिस केंद्र के पास है। हमारे मुख्यमंत्री ने संबंधित से कहा है कि कानून व्यवस्था को सतर्क कर ऐसी घटनाओं को
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रोकना चाहिए। राथर ने एक अन्य सवाल के जवाब में कहा, स्पीकर पक्षपाती नहीं है, स्पीकर का कार्य महदूद होता है। उसे सदन की कार्यवाही संचालित करनी होती है, जब वोटिंग का समय आता है उसे गिनती करनी होती है - हक में कितने हैं और खिलाफ कितने हैं। 61 हक में थे बाकी 28 इसके खिलाफ थे। भाजपा का यह ख्याल था कि मैं 28 को 61 कर दूं, वो मुझसे नहीं हो सकता। मैंने हकीकत सामने रखी।
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