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जम्मू-कश्मीर : महिलाओं की मजबूरी देख मीरचंद ने बना डाला शौचालय, जल संरक्षण के हैं संदेशवाहक

Mon, 08 Mar 2021 02:51 AM IST
दुष्यंत शर्मा पंकज मिश्रा , कठुआ
पंकज मिश्रा , कठुआ Published by: दुष्यंत शर्मा Updated Mon, 08 Mar 2021 02:51 AM IST
सार

  • हाईवे किनारे बग्याल गांव के पास बस स्टॉप पर बैठने के लिए यात्री शेड भी बनाया
  • चालीस हजार खर्च कर पीने के पानी की भी कर डाली व्यवस्था   

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Jammu kashmir News : Seeing the helplessness of women, Mirchand built a toilet
अपने प्रयासों के बारे में बताते मीर चंद... - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

महिला दिवस पर बड़ी-बड़ी बातें और घोषणाएं करने वालों को मीर चंद ने आईना दिखाया है। पेशे से प्लंबर मीर चंद ने गांव की बेटियों और महिलाओं की मजबूरी देखकर बस अड्डे के पास शौचालय तैयार करवा डाला। इसके इस्तेमाल के लिए वह किसी से कोई पैसा नहीं लेते। 

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मीर चंद लोगों के घरों तक पहुंचने के लिए जम्मू-पठानकोट नेशनल हाईवे किनारे बग्याल स्थित स्थानीय बस स्टॉप पर पहुंचते थे। वहां आने वाली गांव की महिलाओं को मजबूरी में खुले में शौच के लिए जाना पड़ता था। यह अव्यवस्था उन्हें कचोटती रही। कई बार सोचा कि शौचालय बनवाया जाए, लेकिन कम आमदनी आड़े आ जाती। 
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आखिरकार मीर चंद ने शौचालय बनाने की ठान ही ली और दिहाड़ी से कुछ पैसा शौचालय पर खर्च करना शुरू दिया। मीर चंद ने पहले टीन का शेड बनाकर शौचालय बनाया और उसके बाद हाईवे की दूसरी तरफ अस्थायी यात्री शेड बना दिया। 
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मीर चंद ने बताया कि तीन माह में उन्हें रोजाना जो भी कमाई होती, उसमें से कुछ पैसे का सामान खरीदते। ज्यादातर निर्माण उन्होंने खुद ही किया। पानी की सुविधा समेत कुल 40 हजार रुपये की लागत से सुविधाएं उपलब्ध करवा दीं जिससे मीर चंद बेहद सुकून महसूस करते हैं। संवाद 


पानी बचाने का भी दे रहे संदेश 
मीर चंद ने बस अड्डे के पास टिन शेड का निर्माण कर शौचालय तो बनावाया ही। इसके अलावा लोगों के लिए पीने के पानी की भी टंकी लगवाई। शेड के पास ही लोहे का बेंच लगाया है जिससे बुजुर्गों को भी सहारा मिल सके। मीरचंद के इस प्रयास को स्थानीय महिलाओं ने काफी सराहा है। वह घरों में काम करने के दौरान लोगों को पानी बचाने का भी संदेश दे रहे हैं।

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