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Jammu News: हेरोइन बरामदगी मामले में आरोपी को जमानत, 50 हजार के निजी मुचलके पर रिहाई
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संवाद न्यूज एजेंसी
सांबा। अतिरिक्त सत्र न्यायाधीश सांबा ने एनडीपीएस एक्ट के तहत दर्ज हेरोइन बरामदगी के मामले में आरोपी अजय कुमार को जमानत दे दी है। उसके खिलाफ सांबा थाने में एफआईआर दर्ज की गई थी। पुलिस के अनुसार, 31 मई को गुप्त सूचना के आधार पर नाकेबंदी के दौरान कार को रोका गया। तलाशी के दौरान आरोपी के कब्जे से 3.68 ग्राम संदिग्ध हेरोइन और 8,810 रुपये नकद बरामद किए गए। इसके बाद उसे गिरफ्तार कर न्यायिक हिरासत में भेज दिया गया।
जमानत याचिका पर सुनवाई के दौरान बचाव पक्ष ने दलील दी कि मामले में एफएसएल रिपोर्ट अभी लंबित है और बरामद मादक पदार्थ की मात्रा व्यावसायिक श्रेणी से काफी कम है। वहीं, सरकारी पक्ष ने जमानत का विरोध करते हुए कहा कि रिपोर्ट आने तक आरोपी को रिहा नहीं किया जाना चाहिए। दोनों पक्षों की दलीलें सुनने के बाद अदालत ने माना कि बरामद मात्रा व्यावसायिक मात्रा से काफी कम है। इसलिए एनडीपीएस एक्ट की धारा 37 की कठोर शर्तें इस मामले में लागू नहीं होतीं।
अदालत ने कहा कि दोष सिद्ध होने से पहले किसी व्यक्ति की स्वतंत्रता अनावश्यक रूप से सीमित नहीं की जा सकती। न्यायालय ने आरोपी को 50 हजार रुपये के निजी मुचलके और जमानत बॉन्ड पर रिहा करने का आदेश देते हुए उसे साक्ष्यों से छेड़छाड़ न करने तथा प्रत्येक सुनवाई पर उपस्थित रहने के निर्देश भी दिए।
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सांबा। अतिरिक्त सत्र न्यायाधीश सांबा ने एनडीपीएस एक्ट के तहत दर्ज हेरोइन बरामदगी के मामले में आरोपी अजय कुमार को जमानत दे दी है। उसके खिलाफ सांबा थाने में एफआईआर दर्ज की गई थी। पुलिस के अनुसार, 31 मई को गुप्त सूचना के आधार पर नाकेबंदी के दौरान कार को रोका गया। तलाशी के दौरान आरोपी के कब्जे से 3.68 ग्राम संदिग्ध हेरोइन और 8,810 रुपये नकद बरामद किए गए। इसके बाद उसे गिरफ्तार कर न्यायिक हिरासत में भेज दिया गया।
जमानत याचिका पर सुनवाई के दौरान बचाव पक्ष ने दलील दी कि मामले में एफएसएल रिपोर्ट अभी लंबित है और बरामद मादक पदार्थ की मात्रा व्यावसायिक श्रेणी से काफी कम है। वहीं, सरकारी पक्ष ने जमानत का विरोध करते हुए कहा कि रिपोर्ट आने तक आरोपी को रिहा नहीं किया जाना चाहिए। दोनों पक्षों की दलीलें सुनने के बाद अदालत ने माना कि बरामद मात्रा व्यावसायिक मात्रा से काफी कम है। इसलिए एनडीपीएस एक्ट की धारा 37 की कठोर शर्तें इस मामले में लागू नहीं होतीं।
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अदालत ने कहा कि दोष सिद्ध होने से पहले किसी व्यक्ति की स्वतंत्रता अनावश्यक रूप से सीमित नहीं की जा सकती। न्यायालय ने आरोपी को 50 हजार रुपये के निजी मुचलके और जमानत बॉन्ड पर रिहा करने का आदेश देते हुए उसे साक्ष्यों से छेड़छाड़ न करने तथा प्रत्येक सुनवाई पर उपस्थित रहने के निर्देश भी दिए।
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