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Jammu News: कोर्ट ने पत्नी और बच्चों को उत्तराधिकार की मंजूरी दी
Sun, 07 Jun 2026 02:22 AM IST
जम्मू और कश्मीर ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, जम्मू
संवाद न्यूज एजेंसी, जम्मू
Updated Sun, 07 Jun 2026 02:22 AM IST
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अदालत से
दिवंगत पुलिसकर्मी के सेवा लाभ के 12 लाख परिवार को जारी
संवाद न्यूज एजेंसी
सांबा। अतिरिक्त जिला न्यायाधीश सांबा की अदालत ने दिवंगत पुलिसकर्मी की पत्नी और उनके दो नाबालिग बच्चों के पक्ष में 12 लाख रुपये की जीपीएफ, लीव सैलरी और अन्य सेवा लाभों की राशि के लिए उत्तराधिकार प्रमाणपत्र जारी करने की मंजूरी दे दी है।
अदालत में दायर याचिका के अनुसार पुलिसकर्मी का 7 नवंबर 2025 को निधन हो गया था। उनके निधन के बाद देय सेवा लाभों की राशि प्राप्त करने के लिए उनकी पत्नी ने स्वयं तथा अपने नाबालिग पुत्र और पुत्री की ओर से उत्तराधिकार प्रमाणपत्र की मांग की थी।
सुनवाई के दौरान सार्वजनिक सूचना जारी की गई लेकिन किसी भी व्यक्ति ने कोई आपत्ति दर्ज नहीं कराई। मृतक की माता ने भी अदालत में उत्तराधिकार प्रमाणपत्र जारी किए जाने पर सहमति जताई और कोई आपत्ति नहीं उठाई। रिकॉर्ड पर उपलब्ध दस्तावेजों और गवाहों के बयानों के आधार पर अदालत ने पाया कि पत्नी और उनके दोनों बच्चे मृतक के वैध उत्तराधिकारी हैं। इसके बाद अदालत ने तीनों के पक्ष में समान हिस्सेदारी के आधार पर उत्तराधिकार प्रमाणपत्र जारी करने का आदेश दिया। अदालत ने यह भी निर्देश दिया कि दोनों नाबालिग बच्चों के हिस्से की राशि उनकी व्यस्कता तक फिकस्ड डिपॉजिट में रखी जाएगी जबकि उस पर मिलने वाले ब्याज का उपयोग उनके पालन-पोषण और शिक्षा के लिए किया जा सकेगा। साथ ही अदालत ने इस मामले में देय कोर्ट फीस को भी माफ कर दिया।
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दिवंगत पुलिसकर्मी के सेवा लाभ के 12 लाख परिवार को जारी
संवाद न्यूज एजेंसी
सांबा। अतिरिक्त जिला न्यायाधीश सांबा की अदालत ने दिवंगत पुलिसकर्मी की पत्नी और उनके दो नाबालिग बच्चों के पक्ष में 12 लाख रुपये की जीपीएफ, लीव सैलरी और अन्य सेवा लाभों की राशि के लिए उत्तराधिकार प्रमाणपत्र जारी करने की मंजूरी दे दी है।
अदालत में दायर याचिका के अनुसार पुलिसकर्मी का 7 नवंबर 2025 को निधन हो गया था। उनके निधन के बाद देय सेवा लाभों की राशि प्राप्त करने के लिए उनकी पत्नी ने स्वयं तथा अपने नाबालिग पुत्र और पुत्री की ओर से उत्तराधिकार प्रमाणपत्र की मांग की थी।
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सुनवाई के दौरान सार्वजनिक सूचना जारी की गई लेकिन किसी भी व्यक्ति ने कोई आपत्ति दर्ज नहीं कराई। मृतक की माता ने भी अदालत में उत्तराधिकार प्रमाणपत्र जारी किए जाने पर सहमति जताई और कोई आपत्ति नहीं उठाई। रिकॉर्ड पर उपलब्ध दस्तावेजों और गवाहों के बयानों के आधार पर अदालत ने पाया कि पत्नी और उनके दोनों बच्चे मृतक के वैध उत्तराधिकारी हैं। इसके बाद अदालत ने तीनों के पक्ष में समान हिस्सेदारी के आधार पर उत्तराधिकार प्रमाणपत्र जारी करने का आदेश दिया। अदालत ने यह भी निर्देश दिया कि दोनों नाबालिग बच्चों के हिस्से की राशि उनकी व्यस्कता तक फिकस्ड डिपॉजिट में रखी जाएगी जबकि उस पर मिलने वाले ब्याज का उपयोग उनके पालन-पोषण और शिक्षा के लिए किया जा सकेगा। साथ ही अदालत ने इस मामले में देय कोर्ट फीस को भी माफ कर दिया।
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