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Jammu News: महिला से मारपीट व धमकी के मामले में आरोपी को जमानत
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सांबा। मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट (सीजेएम) सांबा स्मृति शर्मा की अदालत ने थाना सांबा में दर्ज एक मामले में आरोपी मोहम्मद असलम को जमानत दी है। आरोपी पर भारतीय न्याय संहिता की संबंधित धाराओं के तहत मामला दर्ज किया गया था।
पुलिस रिपोर्ट के अनुसार, यह मामला महिला से मारपीट, जानबूझकर चोट पहुंचाने और आपराधिक धमकी से जुड़ा हुआ है। आरोप है कि आरोपी ने पीड़िता के साथ शारीरिक रूप से हिंसा की और उसे गंभीर परिणाम भुगतने की धमकी दी, जिसके आधार पर पुलिस ने संबंधित धाराओं के तहत एफआईआर दर्ज की।
अदालत में दाखिल जमानत याचिका में आरोपी की ओर से दलील दी गई कि समाज में उसकी अच्छी प्रतिष्ठा है और उसे झूठे व मनगढ़ंत मामले में फंसाया गया है।
वहीं अभियोजन पक्ष ने जमानत का विरोध करते हुए कहा कि आरोपी पर लगे आरोप गंभीर प्रकृति के हैं और जमानत मिलने पर वह गवाहों को प्रभावित कर सकता है। अभियोजन ने यह भी आशंका जताई कि आरोपी न्यायिक प्रक्रिया से भाग सकता है।
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दोनों पक्षों की दलीलें सुनने और रिकॉर्ड का अवलोकन करने के बाद अदालत ने कहा कि आरोपी अभी केवल अभियुक्त है, दोषी नहीं और इस स्तर पर हिरासत में रखना पूर्व दोषसिद्धि के समान होगा। अदालत ने यह भी माना कि आरोपित धाराएं मृत्युदंड या आजीवन कारावास से दंडनीय नहीं हैं और जांच लगभग पूरी हो चुकी है।
इन सभी तथ्यों को ध्यान में रखते हुए अदालत ने आरोपी को 20 हजार रुपये के निजी मुचलके और समान राशि की जमानत पर रिहा करने का आदेश दिया। साथ ही यह शर्त रखी कि आरोपी जांच में किसी प्रकार की बाधा नहीं डालेगा और जांच अधिकारी को पूरा सहयोग करेगा।
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पुलिस रिपोर्ट के अनुसार, यह मामला महिला से मारपीट, जानबूझकर चोट पहुंचाने और आपराधिक धमकी से जुड़ा हुआ है। आरोप है कि आरोपी ने पीड़िता के साथ शारीरिक रूप से हिंसा की और उसे गंभीर परिणाम भुगतने की धमकी दी, जिसके आधार पर पुलिस ने संबंधित धाराओं के तहत एफआईआर दर्ज की।
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अदालत में दाखिल जमानत याचिका में आरोपी की ओर से दलील दी गई कि समाज में उसकी अच्छी प्रतिष्ठा है और उसे झूठे व मनगढ़ंत मामले में फंसाया गया है।
वहीं अभियोजन पक्ष ने जमानत का विरोध करते हुए कहा कि आरोपी पर लगे आरोप गंभीर प्रकृति के हैं और जमानत मिलने पर वह गवाहों को प्रभावित कर सकता है। अभियोजन ने यह भी आशंका जताई कि आरोपी न्यायिक प्रक्रिया से भाग सकता है।
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दोनों पक्षों की दलीलें सुनने और रिकॉर्ड का अवलोकन करने के बाद अदालत ने कहा कि आरोपी अभी केवल अभियुक्त है, दोषी नहीं और इस स्तर पर हिरासत में रखना पूर्व दोषसिद्धि के समान होगा। अदालत ने यह भी माना कि आरोपित धाराएं मृत्युदंड या आजीवन कारावास से दंडनीय नहीं हैं और जांच लगभग पूरी हो चुकी है।
इन सभी तथ्यों को ध्यान में रखते हुए अदालत ने आरोपी को 20 हजार रुपये के निजी मुचलके और समान राशि की जमानत पर रिहा करने का आदेश दिया। साथ ही यह शर्त रखी कि आरोपी जांच में किसी प्रकार की बाधा नहीं डालेगा और जांच अधिकारी को पूरा सहयोग करेगा।