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Jammu News: जीवन के भटकाव को दूर करने के लिए शिव से श्रेष्ठ कोई गुरु नहीं
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राजोरी। एसवीएस ज्ञान गंगा मठ राजोेरी में रविवार सुबह शिव मंदिर में महाशिव अभिषेक पूजन के साथ वातावरण भक्तिमय हो गया। इस दौरान महामंडलेश्वर श्रीश्री 1008 श्री स्वामी विश्वात्मानंद सरस्वती जी महाराज ने कहा कि जीवन के भटकाव को दूर करने के लिए शिव से श्रेष्ठ कोई गुरु नहीं है। सुखी जीवन के लिए शिव को अपना गुरु बनाएं। उनसे अपने प्रश्नों के उत्तर, समस्या समाधान, मनोकामना पूर्ति और दिव्य सहायता मांगें। भगवान शिव उन सभी के हैं, जिन्हें उन्हें पाने के लिए कहीं जाना पड़ता है। इसके बाद एक विशाल भंडारा भी आयोजित किया गया।
इसके बाद, स्वामी जी लम्बेड़ी स्थित शिव मंदिर गए, जहां दोपहर में उसी विधि से एक और महाशिव अभिषेक पूजन किया गया। अपने प्रवचनों में स्वामी जी ने कहा कि शिवत्व एक रहस्यमय तत्व है। पिनाकधारी शिव का वास्तविक स्वरूप कोई नहीं जानता, लेकिन जैसा कहा गया है कि केवल आप ही अपने स्वरूप को जानते हैं, दूसरा कोई नहीं जानता। इसलिए शिव के तत्व की व्याख्या केवल शिव ही कर सकते हैं। वे स्वयं बार-बार प्रकट होकर अपने इस दुर्लभ तत्व को सुलभ कराते हैं। उनके इस साकार रूप को गुरु नाम से संबोधित किया जाता है। इसलिए जब शिव शंकर स्वयं सशरीर गुरु बनकर अवतरित होते हैं, तभी वे अपने शिवत्व को प्रकट कर सकते हैं। इससे यह भी सिद्ध होता है कि शिव का ज्ञान देने वाला गुरु स्वयं शिव का ही स्वरूप है।
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इसके बाद, स्वामी जी लम्बेड़ी स्थित शिव मंदिर गए, जहां दोपहर में उसी विधि से एक और महाशिव अभिषेक पूजन किया गया। अपने प्रवचनों में स्वामी जी ने कहा कि शिवत्व एक रहस्यमय तत्व है। पिनाकधारी शिव का वास्तविक स्वरूप कोई नहीं जानता, लेकिन जैसा कहा गया है कि केवल आप ही अपने स्वरूप को जानते हैं, दूसरा कोई नहीं जानता। इसलिए शिव के तत्व की व्याख्या केवल शिव ही कर सकते हैं। वे स्वयं बार-बार प्रकट होकर अपने इस दुर्लभ तत्व को सुलभ कराते हैं। उनके इस साकार रूप को गुरु नाम से संबोधित किया जाता है। इसलिए जब शिव शंकर स्वयं सशरीर गुरु बनकर अवतरित होते हैं, तभी वे अपने शिवत्व को प्रकट कर सकते हैं। इससे यह भी सिद्ध होता है कि शिव का ज्ञान देने वाला गुरु स्वयं शिव का ही स्वरूप है।
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