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जम्मू कश्मीर: आतंकवादी गुटों की मदद के लिए पाकिस्तान का नया पैंतरा, PoK में बढ़ाए टेलीकॉम टावर

Sun, 18 Feb 2024 04:46 PM IST
kumar गुलशन कुमार पीटीआई, जम्मू कश्मीर
पीटीआई, जम्मू कश्मीर Published by: kumar गुलशन कुमार Updated Sun, 18 Feb 2024 04:46 PM IST
सार

पीर पंजाल के दक्षिण क्षेत्र में आतंकवादी गुट अत्यधिक एन्क्रिप्टेड वाईएसएमएस सेवाओं का इस्तेमाल कर रहे हैं। YSMS एक ऐसी तकनीक है, जिससे स्मार्ट फोन और रेडियो सेट को मर्ज कर गुप्त संदेश भेजे जा सकते हैं। इन संदेशों को पकड़ (डिकोड) पाना कर आसान नहीं रहता है।

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jammu kashmir news: Pakistan increases telecom towers in PoK to help terror groups
सांकेतिक तस्वीर - फोटो : प्रयागराज

विस्तार

पाकिस्तान के कब्जे वाले कश्मीर (पीओके) में नियंत्रण रेखा के पास हाल के दिनों में दूरसंचार टावरों की संख्या में वृद्धि की गई है। आतंकवादियों और उनके मददगारों को घुसपैठ की गतिविधियों में मदद करने के लिए पाकिस्तान ने यह नई चाल चली है।

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जम्मू संभाग के पीर पंजाल के दक्षिण क्षेत्र में आतंकवादी गुट अत्यधिक एन्क्रिप्टेड YSMS सेवाओं का इस्तेमाल कर रहे हैं। YSMS एक ऐसी तकनीक है, जिससे स्मार्ट फोन और रेडियो सेट को मर्ज कर गुप्त संदेश भेजे जा सकते हैं। इन संदेशों को पकड़ (डिकोड) पाना कर आसान नहीं रहता है। अधिकारियों ने कहा कि इन क्षेत्रों में हाली ही के घुसपैठ और आतंकी हमलों के पैटर्न के अध्ययन के बाद यह बात सामने आई है।
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इस तकनीक की मदद से पीओके में आतंकी संगठन का हैंडलर एलओसी के पार इस्तेमाल होने वाले टेलीकॉम नेटवर्क पर जम्मू संभाग में घुसपैठ करने वाले समूह और उसकी रिसेप्शन पार्टी से जुड़ा होता है। ऐसा सेना या बीएसएफ के जवानों से बचने के लिए जाता है।
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टेलीकॉम सिग्नल को बढ़ावा देने की परियोजना पूरी तरह से पाकिस्तानी सेना अधिकारी मेजर जनरल उमर अहमद शाह के नेतृत्व वाले विशेष संचार संगठन (एससीओ) को सौंप दी गई है। अहमद शाह के बारे में माना जाता है कि वह पहले पाकिस्तान की जासूसी एजेंसी आईएसआई के साथ काम करता था।

एलओसी और अंतरराष्ट्रीय सीमा के पास आतंकियों की मदद के लिए स्थापित किए जा रहे दूरसंचार टावरों का रणनीतिक प्लेसमेंट संयुक्त राष्ट्र के तहत अंतरराष्ट्रीय दूरसंचार संघ (आईटीयू) के संविधान के अनुच्छेद 45 का उल्लंघन है। .

आईटीयू के संविधान के अनुच्छेद 45 में सभी 193 सदस्य देशों को पहचान संकेतों के प्रसारण या प्रसार को रोकने के लिए आवश्यक कदम उठाने की आवश्यकता के लिए कहा गया है। साथ ही ऐसे संकेतों को प्रसारित करने वाले अपने अधिकार क्षेत्र के तहत स्टेशनों का पता लगाने और पहचानने में सहयोग करने के लिए कहा गया है।

अधिकारियों ने कहा, आईटीयू के तहत रेडियो कम्युनिकेशन ब्यूरो (बीआर) ने सभी स्टेशनों को "अनावश्यक प्रसारण, या अनावश्यक संकेतों का प्रसारण, या गलत या भ्रामक संकेतों का प्रसारण, या बिना पहचान के संकेतों का प्रसारण" करने से मना किया गया है।

उन्होंने कहा कि मामले को संबंधित अंतरराष्ट्रीय मंच पर उठाने के लिए मंत्री स्तर पर चर्चा की जा रही है। अधिकारियों ने कहा कि नए टेलीकॉम टावर कोड-डिवीजन मल्टीपल एक्सेस (सीडीएमए) तकनीक पर काम कर रहे हैं और एन्क्रिप्शन मुख्य रूप से वाईएसएमएस संचालन को पूरा करने के लिए एक चीनी फर्म द्वारा किया गया है। यह रूज टेलीकॉम इंफ्रास्ट्रक्चर जम्मू और कश्मीर क्षेत्रों में घुसपैठ करने वाले आतंकवादियों और उनके संपर्कों का समर्थन करता है।

नियंत्रण रेखा पर सीडीएमए प्रौद्योगिकी की तैनाती निगरानी प्रयासों को जटिल बनाने के उद्देश्य से की गई है। ये प्रौद्योगिकी एक ही ट्रांसमिशन चैनल पर कई संकेतों की अनुमति देती है, जिससे अवैध संचार को नियंत्रित करने में चुनौतियां पैदा होती हैं।

2019 और 2020 में ऐसी तकनीक के उपयोग के पिछले उदाहरणों को सुरक्षा एजेंसियों ने एन्क्रिप्शन को तोड़कर विफल कर दिया था। अधिकारियों ने कहा कि पाकिस्तान के सरकारी एजेंटों द्वारा समर्थित आतंकवादी समूहों के वर्तमान प्रयास का भी यही हश्र होगा।

गिलगित और बाल्टिस्तान सहित पीओके में एससीओ की विशाल उपस्थिति के बावजूद, ऊंचे इलाके के कारण कश्मीर घाटी में दूरसंचार टावर न्यूनतम लाभ प्रदान करते हैं। लेकिन, उनके संकेत जम्मू के मैदानी इलाकों तक फैले हुए हैं, जिनके निशान कोट बलवाल जेल क्षेत्र जैसे संवेदनशील स्थानों तक भी पहुंचते हैं।

जैमर और प्रबंधित एक्सेस सिस्टम जैसे पारंपरिक उपाय मोबाइल-फोन के उपयोग को रोकने में कम पड़ गए हैं, जिससे परिभाषित क्षेत्रों के भीतर सक्रिय फोन का पता लगाने और उन्हें निष्क्रिय करने के उद्देश्य से उन्नत पहचान क्षमताओं के विकास को बढ़ावा मिला है।

अधिकारियों ने कहा कि सुरक्षा खतरों से प्रभावी ढंग से निपटने के लिए सुरक्षा एजेंसियों द्वारा देश भर में, विशेषकर जेलों में नई तकनीक का परीक्षण किए जाने की संभावना है।

अधिकारियों ने कहा कि जेलों में सेल फोन की तस्करी एक महत्वपूर्ण सार्वजनिक सुरक्षा खतरा पैदा करती है, जिससे अपराधियों को जेल के भीतर से आतंकवादी गतिविधियों को अंजाम देने का अधिकार मिलता है।

यह कई सुरक्षा एजेंसियों द्वारा संकेत दिए जाने के बाद सामने आया है कि पीओके से दूरसंचार सिग्नल भारतीय क्षेत्रों में प्रवेश कर रहे हैं, जिससे कश्मीर में बारामुला और कुपवाड़ा से लेकर जम्मू संभाग में जम्मू, कठुआ, राजोरी और पुंछ जिले तक के क्षेत्र प्रभावित हो रहे हैं।

विशेष चिंता का विषय भारतीय धरती पर आतंकवादियों और पाकिस्तान में उनके आकाओं के बीच बातचीत है, जो लोरा, वाईएसएमएस, बायडू और थुराया सैटेलाइट कम्युनिकेशन जैसी विभिन्न तकनीकों द्वारा हो रही है।

अपनी लंबी दूरी की क्षमताओं के लिए जानी जाने वाली लोरा तकनीक का उपयोग आतंकवादी समूहों और उनके आकाओं द्वारा किया जा रहा है ताकि आतंकवादियों और ओवरग्राउंड वर्कर्स (ओजीडब्ल्यू) के बीच संचार का पता न चल सके।

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