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घाटी में अब रोहिंग्याओं के मददगार निशाने पर: ज्यादातर संस्थाएं कश्मीर की, जांच की तैयारी

Mon, 08 Mar 2021 02:49 AM IST
दुष्यंत शर्मा बृजेश कुमार सिंह, जम्मू
बृजेश कुमार सिंह, जम्मू Published by: दुष्यंत शर्मा Updated Mon, 08 Mar 2021 02:49 AM IST
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Jammu kashmir News : now helpers of rohingyas on the target
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जम्मू-कश्मीर में अवैध रूप से रह रहे रोहिंग्याओं के खिलाफ कार्रवाई के बाद अब इनके मददगारों पर भी शिकंजा कसेगा। इन्हें मदद पहुंचाने वाले एनजीओ, व्यक्तिगत लोगों, धर्म प्रचारकों की जांच की तैयारी सरकार ने की है। इनमें से ज्यादा कश्मीर के रहने वाले हैं। 

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सरकार से जुड़े उच्च पदस्थ सूत्रों ने बताया कि इनके मददगारों को चिह्नित कर लिया गया है। ये रोहिंग्याओं को पढ़ाई लिखाई तथा खाने-पीने के सामान के रूप में मदद पहुंचाते रहे हैं। आशंका जताई जा रही है कि इन संस्थाओं को बाहरी लोगों की मदद मिलती रही है। बच्चों को आस-पास के मदरसे में भेजने के साथ ही बस्तियों में भी पढ़ाई लिखाई कराई जाती है। कट्टरता की भावना पैदा करने का भी शक है। 
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सूत्रों ने बताया कि इन संस्थाओं की पृष्ठभूमि, उनके बैंक अकाउंट तथा आडिट रिपोर्ट की जांच की जाएगी। इससे सब कुछ स्पष्ट हो जाएगा। यह भी इनपुट है कि बठिंडी तथा सुजुवां इलाके में सबसे पहले एक एनजीओ ने लाकर 45-50 रोहिंग्याओं को बसाया था। इसके बाद इनकी संख्या धीरे-धीरे बढ़ती गई। जम्मू के बाहरी इलाके में 30 से अधिक स्थानों पर इन्होंने अपना अस्थायी ठिकाना बना लिया। इनमें सुजुवां तथा नगरोटा जैसे इलाके भी शामिल हैं जहां से सैन्य प्रतिष्ठान की दूरी बहुत अधिक नहीं है। 
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सूत्रों का कहना है कि श्रीनगर के साथ ही दिल्ली आधारित कुछ संस्थाएं भी इनकी मदद में जुटी हुई हैं। महीने में दो से तीन बार इन संस्थाओं के प्रतिनिधि रोहिंग्या बस्ती में पहुंचते हैं और उन्हें आर्थिक तथा पठन पाठन संबंधी सामग्री से मदद पहुंचाते हैं।

हालांकि, आशंका जताई जा रही है कि संस्था के अन्य लोग पूरे महीने यहां रहते हैं जो रोहिंग्या बस्ती में आते-जाते तथा उठते बैठते रहे हैं। उच्च पदस्थ सूत्रों ने बताया कि संस्थाओं की जांच से इस बात का भी खुलासा हो सकता है कि जम्मू लाकर रोहिंग्याओं को बसाने की योजना कैसे बनी। इसके पीछे जम्मू की डेमोग्राफी में बदलाव तो वजह नहीं थी। 


जितने डिटेंशन सेंटर की जरूरत होगी बनेगी
सूत्रों ने बताया कि रोहिंग्याओं के वेरिफिकेशन का सिलसिला आगे भी जारी रहेगा। जितने भी डिटेंशन (होल्डिंग) सेंटर की जरूरत पड़ेगी उतना बनाया जाएगा। यहां रहने वाले रोहिंग्या अवैध है। इनके पास यूएनएचआरसी का वैध प्रमाणपत्र नहीं है। सभी के खिलाफ पासपोर्ट एक्ट के तहत कार्रवाई की जाएगी। सूत्रों ने बताया कि रोहिंग्याओं ने यूएनएचआरसी के पास आवेदन जमा कर रखा है और उसकी रिसीविंग के आधार पर यहां रह रहे हैं।

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