जम्मू-कश्मीरः बर्खास्त किया गया लापता जवान मृत घोषित, उत्तर प्रदेश के मथुरा में हुई थी अंतिम तैनाती
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दस साल से लापता सीआरपीएफ के जवान को हाईकोर्ट ने मृत करार देते हुए परिवार को पेंशन सहित सभी लाभ देने के आदेश दिए हैं। उत्तर प्रदेश के मथुरा में सीआरपीएफ की 16वीं बटालियन में अंतिम तैनाती प्राप्त हेड कांस्टेबल आशा राम को गैर कानूनी रूप से गैरहाजिर दर्शाकर बर्खास्त किया गया था। जम्मू-कश्मीर हाईकोर्ट ने बर्खास्तगी आदेश को खारिज करते हुए कहा कि जवान को मृत घोषित किया जाता है। उसके परिवार को पेंशन सहित तमाम लाभ दिए जाएं।
आशा राम की बटालियन का ग्रुप सेंटर बनतालाब जम्मू में है। उसकी पत्नी ने अपनी याचिका में कहा था कि उसका पति ग्रुप सेंटर जम्मू में सरकारी आवास में रह रहा था। कंपनी कमांडर ने उसे जून 2010 में सूचना दी कि उसका पति बाजार में सब्जी लेने गया और फिर नहीं लौटा।
सूचना मिलने के बाद वह पति को ढूंढती रही, लेकिन उसका कहीं कोई सुराग नहीं लगा। पति का वेतन रोक दिया गया, जिससे तीन बच्चों समेत परिवार का खर्च चलाना मुश्किल हो गया। याची ने कहा कि उसने कई बार सीआरपीएफ अधिकारियों से अनुरोध किया कि वे उसके पति को ढूंढने में मदद करें। वह असहाय हो गई है, लेकिन लापता पति को सीआरपीएफ की ओर से गैर कानूनी रूप से गैरहाजिर दर्शा दिया गया। सुनवाई के दौरान कोर्ट ने पाया कि दोनों पक्षों ने स्वीकार किया है कि लापता जवान से किसी का संपर्क नहीं हुआ है। ऐसे में उसे भगोड़ा जैसी श्रेणी में कैसे रखा जा सकता है।
ऐसे में लापता जवान की बर्खास्तगी का आदेश रद्द माना जाए- कोर्ट
कोर्ट ने कहा कि इंडियन एविडेंस एक्ट की धारा 108 के तहत सात वर्ष से ज्यादा समय तक लापता व्यक्ति को मृत घोषित किया जा सकता है। ऐसे में लापता जवान की बर्खास्तगी का आदेश रद्द माना जाए। याची ने इसी धारा के तहत अनुरोध किया है, जिसे अदालत स्वीकार करती है। कोर्ट ने कहा कि लापता जवान को मृत करार देने के साथ ही संबंधित पक्ष को आदेश दिया जाता है कि वह याची के परिवार को पेंशन समेत अन्य सभी लाभ देना सुनिश्चित करें।