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Jammu News: सुलग उठे जंगल, कटड़ा के सरना व नुमाई में भीषण आग, कई किलोमीटर तक लपटें
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कटड़ा। जम्मू-कश्मीर में लगातार बढ़ रही गर्मी और शुष्क मौसम के बीच जंगलों में आग लगने की घटनाएं थमने का नाम नहीं ले रही हैं। इसी कड़ी में सरना और नुमाई क्षेत्र के जंगलों में बुधवार देर रात अचानक भीषण आग लग गई। तेज हवाओं और सूखे पत्तों के कारण आग ने विकराल रूप धारण कर लिया और कई किलोमीटर क्षेत्र को चपेट में ले लिया। पहाड़ियों से उठतीं ऊंची लपटें और आसमान में छाया धुएं का गुबार दूर से भी साफ देखा गया जिससे आसपास के गांवों में दहशत का माहौल है।
रात भर ग्रामीणों ने जागकर स्थिति पर नजर रखी ताकि आग को रिहायशी इलाकों तक पहुंचने से रोका जा सके। घटना की सूचना मिलते ही फायर ब्रिगेड की टीमें और वन विभाग के अधिकारी-कर्मचारी मौके पर पहुंच गए और राहत व बचाव कार्य शुरू किया। हालांकि दुर्गम पहाड़ी क्षेत्र होने के कारण अभियान में कठिनाइयों का सामना करना पड़ रहा है। कई प्रभावित स्थानों तक दमकल की गाड़ियां नहीं पहुंच पा रही हैं। कर्मियों को पैदल ही जंगल के भीतर जाकर आग बुझाने का प्रयास करना पड़ रहा है। अभियान में बड़ी संख्या में स्थानीय ग्रामीण भी शामिल हैं, जो पेड़ों की टहनियों और उपलब्ध संसाधनों की मदद से आग पर काबू पाने की कोशिश कर रहे हैं।
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वन्यजीवों और पर्यावरण को नुकसान की आशंका
वन विभाग के अनुसार अभी आग लगने के सटीक कारण का पता नहीं चल पाया है। जांच की जा रही है। विशेषज्ञों का मानना है कि अत्यधिक तापमान और सूखी वनस्पति के साथ-साथ कई बार मानवीय लापरवाही भी इसका कारण है। आग से जनहानि की सूचना तो नहीं है लेकिन जंगल के एक बड़े हिस्से और वन्यजीवों के प्राकृतिक आवासों को भारी नुकसान पहुंचने की आशंका है। लोगों ने प्रशासन से मांग की है कि जंगलों में आग की निगरानी के लिए आधुनिक तकनीकों का उपयोग किया जाए। समाचार लिखे जाने तक सभी टीमें आग पर काबू पाने के प्रयास में जुटी हुई थीं।
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रात भर ग्रामीणों ने जागकर स्थिति पर नजर रखी ताकि आग को रिहायशी इलाकों तक पहुंचने से रोका जा सके। घटना की सूचना मिलते ही फायर ब्रिगेड की टीमें और वन विभाग के अधिकारी-कर्मचारी मौके पर पहुंच गए और राहत व बचाव कार्य शुरू किया। हालांकि दुर्गम पहाड़ी क्षेत्र होने के कारण अभियान में कठिनाइयों का सामना करना पड़ रहा है। कई प्रभावित स्थानों तक दमकल की गाड़ियां नहीं पहुंच पा रही हैं। कर्मियों को पैदल ही जंगल के भीतर जाकर आग बुझाने का प्रयास करना पड़ रहा है। अभियान में बड़ी संख्या में स्थानीय ग्रामीण भी शामिल हैं, जो पेड़ों की टहनियों और उपलब्ध संसाधनों की मदद से आग पर काबू पाने की कोशिश कर रहे हैं।
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वन्यजीवों और पर्यावरण को नुकसान की आशंका
वन विभाग के अनुसार अभी आग लगने के सटीक कारण का पता नहीं चल पाया है। जांच की जा रही है। विशेषज्ञों का मानना है कि अत्यधिक तापमान और सूखी वनस्पति के साथ-साथ कई बार मानवीय लापरवाही भी इसका कारण है। आग से जनहानि की सूचना तो नहीं है लेकिन जंगल के एक बड़े हिस्से और वन्यजीवों के प्राकृतिक आवासों को भारी नुकसान पहुंचने की आशंका है। लोगों ने प्रशासन से मांग की है कि जंगलों में आग की निगरानी के लिए आधुनिक तकनीकों का उपयोग किया जाए। समाचार लिखे जाने तक सभी टीमें आग पर काबू पाने के प्रयास में जुटी हुई थीं।
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