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Jammu News: डेढ़ घंटे चला कौए को बचाने का मिशन... सफलता पर गूंजीं तालियां
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जम्म। सुबह के 9:00 बज रहे थे। सतवारी चौक पर करीब 60 फुट ऊंचे सफेदे के पेड़ के आसपास लोगों की काफी भीड़ जुटी थी। क्रेन भी काम पर लगी थी। पूछने पर पता चला कि पेड़ की टहनी पर उलझी चाइनीज डोर में कौआ फंसा हुआ है, जिसे निकालने के प्रयास जारी थे। डोर में फंसे कौए को छटपटाते हुए सबसे पहले वहां तैनात यातायात कर्मियों ने देखा था। उसके बाद बेजुबान की जान बचाने के लिए क्रेन को मंगवाया गया था।
क्रेन की सहायता से पहले चाइनीज डोर को काटने की कोशिश की गई। डोर को जैसे काटने की कोशिश करते, कौए की छटपटाहट बढ़ जाती। काफी मशक्कत के बाद भी डोर को काटने में सफलता नहीं मिली।
इसके बाद क्रेन चालक ने प्लान बदला। अब चाइनीज डोर को खींच कर धीरे-धीरे नीचे की तरफ लाया जाने लगा। डोर के साथ कौआ भी छटपटाता हुआ नीचे आने लगा। पेड़ के आसपास जुटी भीड़ टकटकी लगाए ऊपर की तरफ देखती रही। करीब डेढ़ घंटा मशक्कत जारी रही। 10:30 बजे कौए को नीचे लाने में सफलता मिली। इसके बाद क्रेन चालक ने कौए को पकड़ लिया। कौए को बचाने की खुशी में भीड़ ने तालियां बजाईं।
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तभी भीड़ से निकला एक युवक क्रेन के ऊपर चढ़ गया और डोर को दांतों से काटा। डोर में उलझे कौए के पंख सावधानी से सुलझाए। तभी एक सरदार जी क्रेन के ऊपर चढ़ गए और क्रेन के चालक को 500 रुपये का नोट देकर कर गले लगाया और कहा... शाबाश। इसके बाद कौए को पानी पिलाया। कौए का पंख डोर से कुछ जख्मी हो गया था। लोगों ने आसपास से जुगाड़ करके मरहम लगाया। इसके कुछ देर बाद कौआ जख्मों की परवाह किए बिना उड़ गया। कौए के आजाद होने के बाद भी तालियां की गड़गड़ाहट गूंजने लगी। लोगों ने बेजुबान की जान बचाने के लिए क्रेन चालक का शुक्रिया अदा किया।
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क्रेन की सहायता से पहले चाइनीज डोर को काटने की कोशिश की गई। डोर को जैसे काटने की कोशिश करते, कौए की छटपटाहट बढ़ जाती। काफी मशक्कत के बाद भी डोर को काटने में सफलता नहीं मिली।
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इसके बाद क्रेन चालक ने प्लान बदला। अब चाइनीज डोर को खींच कर धीरे-धीरे नीचे की तरफ लाया जाने लगा। डोर के साथ कौआ भी छटपटाता हुआ नीचे आने लगा। पेड़ के आसपास जुटी भीड़ टकटकी लगाए ऊपर की तरफ देखती रही। करीब डेढ़ घंटा मशक्कत जारी रही। 10:30 बजे कौए को नीचे लाने में सफलता मिली। इसके बाद क्रेन चालक ने कौए को पकड़ लिया। कौए को बचाने की खुशी में भीड़ ने तालियां बजाईं।
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तभी भीड़ से निकला एक युवक क्रेन के ऊपर चढ़ गया और डोर को दांतों से काटा। डोर में उलझे कौए के पंख सावधानी से सुलझाए। तभी एक सरदार जी क्रेन के ऊपर चढ़ गए और क्रेन के चालक को 500 रुपये का नोट देकर कर गले लगाया और कहा... शाबाश। इसके बाद कौए को पानी पिलाया। कौए का पंख डोर से कुछ जख्मी हो गया था। लोगों ने आसपास से जुगाड़ करके मरहम लगाया। इसके कुछ देर बाद कौआ जख्मों की परवाह किए बिना उड़ गया। कौए के आजाद होने के बाद भी तालियां की गड़गड़ाहट गूंजने लगी। लोगों ने बेजुबान की जान बचाने के लिए क्रेन चालक का शुक्रिया अदा किया।