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Jammu News: प्रदेश में अब प्राकृतिक तरीके से होगी स्ट्राबेरी की खेती
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जम्मू। प्रदेश में अब स्ट्राबेरी को प्राकृतिक तरीके से उगाने की तैयारी है। इसमें जीव अमृत और पंच द्रव्य से बनी खाद का प्रयोग किया जाएगा। इस पर स्कास्ट जम्मू में शोध चल रहा है। जीव अमृत और पंच द्रव्य खाद में गोबर, गोमूत्र, घी, बेसन, गुड़, दही और केले का मिश्रण होगा।
शोध अक्तूबर 2022 में आरंभ हुआ जो अगले साल अक्तूबर तक चलेगा। यहां पर स्ट्राबेरी प्राकृतिक रूप से उगाई जा रही है। खास बात यह है कि अगले साल स्कास्ट जम्मू की ओर से अक्तूबर माह में पौधे भी वितरित किए जाएंगे। इसके बाद किसान इसे अपने खेतों में उगा सकते हैं। मौजूदा समय में मार्किट में स्ट्राबेरी 300 रुपये प्रति किलो के हिसाब से मिल रही है। प्राकृतिक रूप से तैयार स्ट्राबेरी के बाजार में 400 से 450 रुपये प्रति किलो मिलेंगे।
स्कास्ट जम्मू के वैज्ञानिकों ने दावा किया कि प्राकृतिक रूप से स्ट्राबेरी में पोषक तत्व पर्याप्त मात्रा में मिलेंगे, जो घातक बीमारियों से बचाव करते हैं। इस पर शोध अंतिम चरण में चल रहा है। प्रदेश में पहली बार प्राकृतिक रूप से स्ट्राबेरी उगाने की तकनीक किसानों को दी जाएगी। इसमें फल मार्च से अप्रैल माह में आ जाते हैं। यह शारीरिक विकास के लिए लाभदायक सिद्ध होगा।
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अभी 15 टन हो रही पैदावार
प्रदेश में अभी तक 15 टन स्ट्राबेरी का उत्पादन हो रहा है। उत्पादन 30 टन तक करने का लक्ष्य निर्धारित किया गया है। अभी तक 50 हजार हेक्टेयर भूमि में उगाई जाती है। 100 हेक्टेयर में उगाने का लक्ष्य निर्धारित किया गया है।
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इन बीमारियों से लड़ने की है शक्ति
स्ट्राबेरी में मौजूद तत्व हृदय रोग, स्ट्रोक, कैंसर, उच्च रक्तचाप से बचाने में मदद करते हैं। मोटापे के कारण होने वाली बीमारियों से भी आराम देती है। इसके अलावा सेवन से शरीर में पोषक तत्वों की कमी दूर होती है।
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कहां-कहां उग रही स्ट्राबेरी
स्ट्राबेरी ट्रायल के रूप में जम्मू, सांबा और कठुआ जिलों में उगाई जा रही है। मौजूदा समय में स्ट्राबेरी स्थानीय जरूरतों को पूरी कर रही है। बाजारों में प्रदेश में उगने वाली स्ट्राबेरी बाजारों में नहीं पहुंच रही है।
कोट
स्ट्राबेरी को प्राकृतिक तरीके से उगाया जाएगा। पहले रसायन खाद के माध्यम से पैदावार होती थी। यूनिवर्सिटी में शोध चल रहा है, जो अगले साल पूरा होगा और पौधे वितरित किए जाएंगे।
- डाॅ. प्रशांत बख्शी, एचओडी, बागवानी स्कास्ट जम्मू
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शोध अक्तूबर 2022 में आरंभ हुआ जो अगले साल अक्तूबर तक चलेगा। यहां पर स्ट्राबेरी प्राकृतिक रूप से उगाई जा रही है। खास बात यह है कि अगले साल स्कास्ट जम्मू की ओर से अक्तूबर माह में पौधे भी वितरित किए जाएंगे। इसके बाद किसान इसे अपने खेतों में उगा सकते हैं। मौजूदा समय में मार्किट में स्ट्राबेरी 300 रुपये प्रति किलो के हिसाब से मिल रही है। प्राकृतिक रूप से तैयार स्ट्राबेरी के बाजार में 400 से 450 रुपये प्रति किलो मिलेंगे।
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स्कास्ट जम्मू के वैज्ञानिकों ने दावा किया कि प्राकृतिक रूप से स्ट्राबेरी में पोषक तत्व पर्याप्त मात्रा में मिलेंगे, जो घातक बीमारियों से बचाव करते हैं। इस पर शोध अंतिम चरण में चल रहा है। प्रदेश में पहली बार प्राकृतिक रूप से स्ट्राबेरी उगाने की तकनीक किसानों को दी जाएगी। इसमें फल मार्च से अप्रैल माह में आ जाते हैं। यह शारीरिक विकास के लिए लाभदायक सिद्ध होगा।
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अभी 15 टन हो रही पैदावार
प्रदेश में अभी तक 15 टन स्ट्राबेरी का उत्पादन हो रहा है। उत्पादन 30 टन तक करने का लक्ष्य निर्धारित किया गया है। अभी तक 50 हजार हेक्टेयर भूमि में उगाई जाती है। 100 हेक्टेयर में उगाने का लक्ष्य निर्धारित किया गया है।
इन बीमारियों से लड़ने की है शक्ति
स्ट्राबेरी में मौजूद तत्व हृदय रोग, स्ट्रोक, कैंसर, उच्च रक्तचाप से बचाने में मदद करते हैं। मोटापे के कारण होने वाली बीमारियों से भी आराम देती है। इसके अलावा सेवन से शरीर में पोषक तत्वों की कमी दूर होती है।
कहां-कहां उग रही स्ट्राबेरी
स्ट्राबेरी ट्रायल के रूप में जम्मू, सांबा और कठुआ जिलों में उगाई जा रही है। मौजूदा समय में स्ट्राबेरी स्थानीय जरूरतों को पूरी कर रही है। बाजारों में प्रदेश में उगने वाली स्ट्राबेरी बाजारों में नहीं पहुंच रही है।
कोट
स्ट्राबेरी को प्राकृतिक तरीके से उगाया जाएगा। पहले रसायन खाद के माध्यम से पैदावार होती थी। यूनिवर्सिटी में शोध चल रहा है, जो अगले साल पूरा होगा और पौधे वितरित किए जाएंगे।
- डाॅ. प्रशांत बख्शी, एचओडी, बागवानी स्कास्ट जम्मू