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स्टार्टअप्स के लिए अलग औद्योगिक एस्टेट की नीति बनेगी : एलजी
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जम्मू। उपराज्यपाल मनोज सिन्हा ने कहा कि प्रशासन स्टार्टअप्स के लिए अलग औद्योगिक एस्टेट की नीति पर काम कर रहा है। सरकार की औद्योगिक नीति के मूल में स्थानीय उद्योगों को अवसर और सहायता प्रदान करने के साथ आर्थिक विकास व रोजगार पैदा करना है। व्यापार पुनरु द्धार पैकेज 2020 के कुछ उपाय जिन्हें अभी तक उद्योगों में शामिल किया जाना है को एक समय सीमा के भीतर लागू किया जाएगा।
निवेश के माहौल को बढ़ावा देने के लिए प्रदेश सरकार निरंतर उचित प्रयास कर रही है। उपराज्यपाल ने शनिवार को श्रीनगर में जम्मू कश्मीर के उद्योग जगत के लोगों और विभिन्न उद्योग संघों के प्रतिनिधियों से उद्योग क्षेत्र के बढ़ावे पर चर्चा की। उपराज्यपाल ने व्यापार करने में आसानी बढ़ाने और स्थानीय उद्योगों को समर्थन देने पर बात की। उन्होंने कहा कि जल्द ही जम्मू में चैंबर और उद्योग के प्रतिनिधियों से बात की जाएगी। प्रधानमंत्री के आत्मनिर्भर भारत के दृष्टिकोण को पूरा करने के साथ पूंजी को आकर्षित करने और स्थानीय उद्यमशीलता क्षमता बढ़ाने को एक पारदर्शी प्रणाली स्थापित की गई है। शांतिपूर्ण माहौल को बाधित करने की कोशिश करने वाले जम्मू कश्मीर के औद्योगिक, सामाजिक और आर्थिक विकास के सबसे बड़े दुश्मन हैं। सरकार उद्योग और व्यापार क्षेत्र के मुद्दों के प्रति संवेदनशील होने के साथ सभी सहायता प्रदान करने के लिए प्रतिबद्ध है। उद्योग और वाणिज्य विभाग व उद्यमियों की एक समिति का गठन एक संस्थागत तंत्र के रूप में किया जा रहा है जो उद्योग के प्रतिनिधियों, दोनों संभागों के चैंबरों के साथ नियमित बातचीत के साथ व्यवसायों के मुद्दों और चुनौतियों का समाधान किया जाएगा। पारदर्शिता बढ़ाने के लिए ऑनलाइन सेवाओं का विस्तार किया गया है। जम्मू-श्रीनगर हाईवे प्रभावित होने के कारण चैंबर एंड इंडस्ट्रीज एसोसिएशन के कई प्रतिनिधि बैठक में शामिल नहीं हो पाए। इस दौरान एफसीआईके, केसीसीआई, पीएचडीसीसीआई, केपीओ, टीएएचएएफयूजेड, केसीसी, भारतीय उद्योग परिसंघ, हाइडल पावर एसोसिएशन, कठुआ इंडस्ट्रियल एसोसिएशन, इंडस्ट्रियल एस्टेट आदि संघों के प्रतिनिधियों ने अपने मुद्दों और चिंताओं को पेश किया।
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निवेश के माहौल को बढ़ावा देने के लिए प्रदेश सरकार निरंतर उचित प्रयास कर रही है। उपराज्यपाल ने शनिवार को श्रीनगर में जम्मू कश्मीर के उद्योग जगत के लोगों और विभिन्न उद्योग संघों के प्रतिनिधियों से उद्योग क्षेत्र के बढ़ावे पर चर्चा की। उपराज्यपाल ने व्यापार करने में आसानी बढ़ाने और स्थानीय उद्योगों को समर्थन देने पर बात की। उन्होंने कहा कि जल्द ही जम्मू में चैंबर और उद्योग के प्रतिनिधियों से बात की जाएगी। प्रधानमंत्री के आत्मनिर्भर भारत के दृष्टिकोण को पूरा करने के साथ पूंजी को आकर्षित करने और स्थानीय उद्यमशीलता क्षमता बढ़ाने को एक पारदर्शी प्रणाली स्थापित की गई है। शांतिपूर्ण माहौल को बाधित करने की कोशिश करने वाले जम्मू कश्मीर के औद्योगिक, सामाजिक और आर्थिक विकास के सबसे बड़े दुश्मन हैं। सरकार उद्योग और व्यापार क्षेत्र के मुद्दों के प्रति संवेदनशील होने के साथ सभी सहायता प्रदान करने के लिए प्रतिबद्ध है। उद्योग और वाणिज्य विभाग व उद्यमियों की एक समिति का गठन एक संस्थागत तंत्र के रूप में किया जा रहा है जो उद्योग के प्रतिनिधियों, दोनों संभागों के चैंबरों के साथ नियमित बातचीत के साथ व्यवसायों के मुद्दों और चुनौतियों का समाधान किया जाएगा। पारदर्शिता बढ़ाने के लिए ऑनलाइन सेवाओं का विस्तार किया गया है। जम्मू-श्रीनगर हाईवे प्रभावित होने के कारण चैंबर एंड इंडस्ट्रीज एसोसिएशन के कई प्रतिनिधि बैठक में शामिल नहीं हो पाए। इस दौरान एफसीआईके, केसीसीआई, पीएचडीसीसीआई, केपीओ, टीएएचएएफयूजेड, केसीसी, भारतीय उद्योग परिसंघ, हाइडल पावर एसोसिएशन, कठुआ इंडस्ट्रियल एसोसिएशन, इंडस्ट्रियल एस्टेट आदि संघों के प्रतिनिधियों ने अपने मुद्दों और चिंताओं को पेश किया।
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