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अमरनाथ यात्रियों को मौसम की सटीक जानकारी मिलेगी
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जम्मू। श्री अमरनाथ यात्रा 2022 के दौरान शिव भक्तों को मौसम की सटीक जानकारी मिल सकेगी। शिवभक्त मौसम की पूर्व जानकारी से अपनी यात्रा को सुगम और सुरक्षित बना सकेंगे। श्रीनगर और जम्मू के बाद यात्रा के दौरान बनिहाल में अत्याधुनिक डाप्लर रडार तंत्र को शुरू करने की तैयारी की जा रही है। यह रडार जम्मू और कश्मीर दोनों के लिए महत्वपूर्ण होगा और 100 किमी. हवाई क्षेत्र को कवर करेगा।
रडार तंत्र के माध्यम से यात्रियों को दो से तीन घंटे पहले मौसम की सही जानकारी दी जा सकेगी। इसमें भारी बारिश, आंधी, बाढ़, बादल फटने जैसी महत्वपूर्ण जानकारियां पहले से मिलने पर आपात प्रबंधन को मजबूत बनाकर जानमाल के नुकसान को कम किया जा सकता है। बनतालाब, जम्मू स्थित मौसम विज्ञान केंद्र के कार्यालय में चालू रडार तंत्र से दस जिलों को कवर किया जा रहा है। हालांकि उच्च पर्वतीय क्षेत्रों में सिग्नल कम होने के कारण ऐसी जानकारी पूरी नहीं मिल पाती है। एक सामान्य क्लाउड बर्स्ट (बादल फटने) में एक घंटे में 100 मिलीमीटर से अधिक बारिश हो जाती है, जिससे निचले इलाकों के नदी नालों में अचानक तेज बहाव से जानमाल का नुकसान होता है। अमरनाथ यात्रा ट्रैक पर कई ऐसे स्थल संवेदनशील हैं यहां बादल फटने की आशंका रहती है, लेकिन बनिहाल में रडार तंत्र शुरू होने से खासतौर पर जम्मू-श्रीनगर राष्ट्रीय राजमार्ग पर मौसम की महत्वपूर्ण जानकारियां समय पूर्व मिल सकेंगी। इसके साथ श्रीनगर स्थित अत्याधुनिक रडार तंत्र पहले ही काम कर रहा है। इसे वर्ष 2014 की भीषण बाढ़ के बाद वहां स्थापित किया गया था। बनिहाल को मिलाकर जम्मू कश्मीर में जम्मू, श्रीनगर और बनिहाल में तीन डाप्लर रडार तंत्र स्थापित हो जाएंगे। बनिहाल रडार तंत्र को स्थापित करने के लिए काम जारी है। आगामी 30 जून से शुरू हो रही अमरनाथ यात्रा की तैयारियां तेज की गई हैं। इसमें जिला स्तर पर 15 जून तक सभी यात्रा संबंधी इंतजामों को पूरा करने का लक्ष्य रखा गया है। यात्रियों की सुरक्षा पर भी विशेष ध्यान केंद्रित किया जा रहा है।
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रडार तंत्र के माध्यम से यात्रियों को दो से तीन घंटे पहले मौसम की सही जानकारी दी जा सकेगी। इसमें भारी बारिश, आंधी, बाढ़, बादल फटने जैसी महत्वपूर्ण जानकारियां पहले से मिलने पर आपात प्रबंधन को मजबूत बनाकर जानमाल के नुकसान को कम किया जा सकता है। बनतालाब, जम्मू स्थित मौसम विज्ञान केंद्र के कार्यालय में चालू रडार तंत्र से दस जिलों को कवर किया जा रहा है। हालांकि उच्च पर्वतीय क्षेत्रों में सिग्नल कम होने के कारण ऐसी जानकारी पूरी नहीं मिल पाती है। एक सामान्य क्लाउड बर्स्ट (बादल फटने) में एक घंटे में 100 मिलीमीटर से अधिक बारिश हो जाती है, जिससे निचले इलाकों के नदी नालों में अचानक तेज बहाव से जानमाल का नुकसान होता है। अमरनाथ यात्रा ट्रैक पर कई ऐसे स्थल संवेदनशील हैं यहां बादल फटने की आशंका रहती है, लेकिन बनिहाल में रडार तंत्र शुरू होने से खासतौर पर जम्मू-श्रीनगर राष्ट्रीय राजमार्ग पर मौसम की महत्वपूर्ण जानकारियां समय पूर्व मिल सकेंगी। इसके साथ श्रीनगर स्थित अत्याधुनिक रडार तंत्र पहले ही काम कर रहा है। इसे वर्ष 2014 की भीषण बाढ़ के बाद वहां स्थापित किया गया था। बनिहाल को मिलाकर जम्मू कश्मीर में जम्मू, श्रीनगर और बनिहाल में तीन डाप्लर रडार तंत्र स्थापित हो जाएंगे। बनिहाल रडार तंत्र को स्थापित करने के लिए काम जारी है। आगामी 30 जून से शुरू हो रही अमरनाथ यात्रा की तैयारियां तेज की गई हैं। इसमें जिला स्तर पर 15 जून तक सभी यात्रा संबंधी इंतजामों को पूरा करने का लक्ष्य रखा गया है। यात्रियों की सुरक्षा पर भी विशेष ध्यान केंद्रित किया जा रहा है।
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