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जिन क्षेत्रों में ज्यादा नशा तस्करी, उनमें बढ़ेगी एएनटीएफ की निगरानी
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जम्मू। नए साल में सरकार नशे के खिलाफ बड़ी जंग शुरू करेगी। कई विभागों और जिला प्रशासन के साथ मिलकर इसकी तस्करी करने वालों से लेकर इसके दलदल में फंस चुके युवाओं को बाहर निकालने पर जोर दिया जाएगा। जिन क्षेत्रों में सबसे ज्यादा नशा बेचा जा रहा है, वहां पर एंटी नारकोटिक्स टास्क फोर्स (एएनटीएफ) की निगरानी बढ़ेगी। गृह विभाग, शिक्षा विभाग, एएनटीएफ, स्वास्थ्य विभाग, सामाजिक कल्याण विभाग, पुलिस विभाग मिलकर इसे लेकर काम करेंगे। बुधवार को उपराज्यपाल के सलाहकार राजीव भटनागर ने इसे लेकर उच्च स्तरीय बैठक की। इसमें प्रदेश में चलने वाले नशामुक्ति केंद्रों और पुनर्वास केंद्रों की समीक्षा की गई।
बैठक में चिंता जाहिर की गई कि किस तरह से नशा युवाओं को शारीरिक और मानसिक तौर पर खत्म कर रहा है। इससे निपटने के लिए सख्त कदम उठाने की आवश्यकता है। नशा सिर्फ युवाओं को शारीरिक और मानसिक रूप से कमजोर नहीं कर रहा, बल्कि उन्हें आसानी से अपराधी बनाने में भी काम करता है। इसके लिए शिक्षकों, अभिभावकों, जिला प्रशासन को आगे आना होगा और मिलकर काम करना होगा। इसके लिए विशेष काउंसलिंग सत्र और जागरूकता कार्यक्रम चलाए जाएं। भटनागर ने अधिकारियों को निर्देश दिया कि फील्ड विभागों, पुलिस और अन्य बलों के स्वयंसेवकों के लिए प्रशिक्षण कार्यक्रम शुरू किए जाने चाहिए जिनकी सेवाओं का इस्तेमाल बाद में विभिन्न स्तरों पर लोगों को प्रशिक्षित करने के लिए किया जाएगा। नशे के दलदल में फंस चुके युवाओं को इससे बाहर निकालने के लिए हर संभव प्रयास और आधुनिक ढांचे का इस्तेमाल करने के लिए कहा गया। ताकि यह लोग जब ठीक होकर जाएं तो इन्हें घर में बेहतर महसूस हो। एंटी नारकोटिक्स टास्क फोर्स को कहा कि ऐसे क्षेत्रों पर निगरानी बढ़ाएं, यहां पर सबसे अधिक नशा बिकता है और इस्तेमाल होता है। क्योंकि इसी से इस पर नियंत्रण होगा। बैठक में गृह सचिव, विशेष डीजीपी क्राइम, स्किल डेवलपमेंट के आयुक्त सचिव, सामाजिक कल्याण विभाग, स्वास्थ्य विभाग के आयुक्त सचिव, निदेशक कालेज, आबकारी आयुक्त समेत कई अन्य अफसर मौजूद रहे।
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बैठक में चिंता जाहिर की गई कि किस तरह से नशा युवाओं को शारीरिक और मानसिक तौर पर खत्म कर रहा है। इससे निपटने के लिए सख्त कदम उठाने की आवश्यकता है। नशा सिर्फ युवाओं को शारीरिक और मानसिक रूप से कमजोर नहीं कर रहा, बल्कि उन्हें आसानी से अपराधी बनाने में भी काम करता है। इसके लिए शिक्षकों, अभिभावकों, जिला प्रशासन को आगे आना होगा और मिलकर काम करना होगा। इसके लिए विशेष काउंसलिंग सत्र और जागरूकता कार्यक्रम चलाए जाएं। भटनागर ने अधिकारियों को निर्देश दिया कि फील्ड विभागों, पुलिस और अन्य बलों के स्वयंसेवकों के लिए प्रशिक्षण कार्यक्रम शुरू किए जाने चाहिए जिनकी सेवाओं का इस्तेमाल बाद में विभिन्न स्तरों पर लोगों को प्रशिक्षित करने के लिए किया जाएगा। नशे के दलदल में फंस चुके युवाओं को इससे बाहर निकालने के लिए हर संभव प्रयास और आधुनिक ढांचे का इस्तेमाल करने के लिए कहा गया। ताकि यह लोग जब ठीक होकर जाएं तो इन्हें घर में बेहतर महसूस हो। एंटी नारकोटिक्स टास्क फोर्स को कहा कि ऐसे क्षेत्रों पर निगरानी बढ़ाएं, यहां पर सबसे अधिक नशा बिकता है और इस्तेमाल होता है। क्योंकि इसी से इस पर नियंत्रण होगा। बैठक में गृह सचिव, विशेष डीजीपी क्राइम, स्किल डेवलपमेंट के आयुक्त सचिव, सामाजिक कल्याण विभाग, स्वास्थ्य विभाग के आयुक्त सचिव, निदेशक कालेज, आबकारी आयुक्त समेत कई अन्य अफसर मौजूद रहे।
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