जम्मू-कश्मीरः गुलमर्ग में किसी भी तरह के निर्माण और पेड़ों की कटाई पर रोक
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गुलमर्ग में किसी भी तरह के निर्माण और पेड़ों की कटाई पर हाईकोर्ट ने रोक लगा दी है। जस्टिस अली मोहम्मद मागरे और जस्टिस विनोद चटर्जी कौल की खंडपीठ ने बुधवार को इस मामले से जुड़ी एक याचिका पर सुनवाई करते हुए यह आदेश दिया। याचिका में गुलमर्ग के पर्यावरण को बचाने की मांग की गई थी।
2012 में मोहम्मद रफीक जरगर ने याचिका दायर कर कहा था कि गुलमर्ग का पुराना रूप वापस लाया जाए। इसके बाद कोर्ट ने कई तरह के आदेश इसे लेकर समय समय पर पारित किए, ताकि इसका संरक्षण हो सके। तब इसे लेकर एक उच्च स्तरीय बैठक करने को कहा गया।
बैठक हुई भी और कई कदम उठाने पर चर्चा हुई। नया मास्टर प्लान बनाने पर भी बात हुई। कई कमेटियों का गठन भी हुआ। सीईओ से अवैध निर्माणों की जानकारी भी मांगी गई। पिछले आठ साल से कोर्ट इस याचिका पर दिए गए आदेशों के तहत होने वाले पालन की मॉनिटरिंग कर रहा है।
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खंडपीठ ने महसूस किया कि गुलमर्ग में किसी भी तरह के निर्माण पर रोक लगानी चाहिए। साथ ही यहां पर पेड़ों की कटाई भी नहीं होनी चाहिए। लिहाजा इस पर रोक लगाई जा रही है। प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड को भी कोर्ट ने जरूरी आदेश दिया है कि होटल वाले पूरी तरह से ड्रेनेज की व्यवस्था करें। हाईकोर्ट ने रजिस्ट्रार ज्यूडिशियल को कोर्ट आयुक्त भी नियुक्त किया है, ताकि स्पाट वेरिफिकेशन की जा सके।
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सरकार को बाल अधिकार आयोग गठित करने का आदेश
उधर, हाईकोर्ट ने सरकार को बाल अधिकारों के लिए आयोग गठित करने के आदेश दिए हैं। हाईकोर्ट में इसे लेकर याचिका दायर की गई थी। चीफ जस्टिस पंकज मित्तल और जस्टिस जावेद इकबाल वाली खंडपीठ ने बुधवार को मामले पर सुनवाई की और आदेश देकर निपटारा कर दिया कि सरकार बाल अधिकार आयोग का गठन करे और इसके लिए जरूरी दिशा निर्देश और नियम बनाए। हालांकि राष्ट्रीय स्तर के नियम इसमें शामिल किए जा सकते हैं।
कोर्ट ने महसूस किया कि समय समय पर इसे लेकर आदेश दिए गए हैं और समय समय पर सरकार ने भी अपना पक्ष रखा है और बाल अधिकारों के लिए कई कदम उठाए हैं, लेकिन अब भी यह मामला विचार का विषय है। जिसमें बाल अधिकार आयोग का गठन न होना शामिल है। लिहाजा अब इसके लिए आयोग का गठन होना चाहिए। एडवोकेट शिवम महाजन ने कोर्ट को बताया कि हर एक राज्य और केंद्र शासित प्रदेश के लिए आयोग का होना जरूरी है।
उधर, हाईकोर्ट श्रीनगर विंग ने सीडब्लयूएसएन श्रेणी में बच्चों को दाखिला देने वाली याचिका का निपटारा कर दिया। कोर्ट ने कहा कि इस मामले में सरकार को कोई आदेश देने की आवश्यकता नहीं है। लिहाजा याचिका को डिपोज आफ किया जा रहा है।