फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Jammu and Kashmir ›   Jammu News ›   jammu kashmir news Arthritis Day Youth are also becoming suffering of Arthritis

Arthritis Day: अर्थराइटिस का युवा भी हो रहे शिकार, चोट लगने पर देसी इलाज पड़ रहा महंगा

Wed, 12 Oct 2022 04:54 PM IST
kumar गुलशन कुमार अमर उजाला नेटवर्क, जम्मू
अमर उजाला नेटवर्क, जम्मू Published by: kumar गुलशन कुमार Updated Wed, 12 Oct 2022 04:54 PM IST
सार

डॉ. संजीव गुप्ता के अनुसार, कई मामले ऐसे भी सामने आए हैं, जिनमें पीड़ित खासतौर पर किसी सड़क हादसे के बाद देसी इलाज में मालिश आदि करवाता रहा और आखिर में उसके जोड़ खराब हो गए।

विज्ञापन
jammu kashmir news  Arthritis Day Youth are also becoming suffering of Arthritis
arthritis - फोटो : istock

विस्तार

जम्मू कश्मीर में अमूमन 50 की उम्र के बाद होने वाली अर्थराइटिस की शिकायत अब युवाओं को भी हो रही है। इसका एक कारण बढ़ते सड़क हादसों में घायल होने वाले 18 से 40 आयु वर्ग के कई युवा देसी इलाज से उपचार पाकर बाद में अर्थराइटिस की समस्या से जूझ रहे हैं। जीएमसी की आर्थो ओपीडी में पहुंचने वाले अर्थराइटिस के कई मामलों में यह इतिहास मिला है। जिसमें पीड़ित महीनों देसी इलाज करवाता रहा और आखिर में उसके जोड़ों में सूजन बढ़ गई। 
विज्ञापन


आरथो विभाग के एचओडी डॉ. संजीव गुप्ता ने बताया कि आरथो की 300 से 400 की ओपीडी  में 25 से 30 प्रतिशत अर्थराइटिस के मामले आ रहे हैं। इसमें 50 से 80 आयु वर्ग के अधिक मामले हैं, लेकिन कई मामले ऐसे भी सामने आए हैं, जिनमें पीड़ित खासतौर पर किसी सड़क हादसे के बाद देसी इलाज में मालिश आदि करवाता रहा और आखिर में उसके जोड़ खराब हो गए। इनमें अधिकांश युवा प्रभावित हैं और ऐसे हादसों में 40 प्रतिशत तक मामलों में युवा प्रभावित होते हैं। चोट से हड्डी व जोड़ में फ्रैक्चर होने पर उसका उचित उपचार न करवाना भी अर्थराइटिस का कारण बनता है। अस्पताल में सामान्य में घुटने का दर्द, कमर का दर्द, हाथों के दर्द की समस्या लेकर पीड़ित अधिक पहुंच रहे हैं। 90 प्रतिशत फ्रैक्चर के मामलों में पुरुष मरीज होते हैं। महिलाएं गलत ढंग से घंटों तक घरेलू कामकाज करती हैं, जिससे उन्हें अर्थराइटिस की शिकायत होती है। इसी तरह युवा घंटों मोबाइल से जुड़े रहते हैं, जिसका जोड़ों पर गलत प्रभाव पड़ता है।
विज्ञापन


 अर्थराइटिस जोड़ों की सूजन व दर्द से जुड़ा रोग है। इसे गठिया भी कहा जाता है। जॉइंट पैन अर्थराइटिस का मुख्य कारण होता है। उम्र के हिसाब से अमूमन 50 के बाद जोड़ों में घिसाव होना शुरू हो जाता है। जिसमें हिप ज्वाइन, हाथों के ज्वाइंट्स आदि होते हैं। इसी तरह जोड़ में सूजन आना यानी स्टिफनेस होने को इंफ्लेमेटरी आर्थराइटिस कहा जाता है। मानव शरीर में एक इम्यून सिस्टम (रोग प्रतिकार शक्ति) का काम होता है जो शरीर में बाहर से आए बैक्टीरिया से लड़ती है। इसमें एक तंत्र होता है जो शरीर के सेल और बाहर के सेल को पहचानता है, लेकिन कभी इस तंत्र में खराबी आ जाती है और वह खुद के शरीर के सेल को बाहर का समझ कर उसे खत्म करने लगता है। इसको आटोइम्यून स्थिति कहा जाता और यह इंफ्लेमेटरी आर्थराइटिस का भाग है। 
विज्ञापन
विज्ञापन


लक्षण 
  1. घिसावाला अर्थराइटिस वृद्धावस्था में होता है। इसमें ज्यादातर चलने की वजह से या सीढ़ियां ऊपर नीचे करने से घुटनों में दर्द होता है। 
  2. इन्फ्लेमेटरी अर्थराइटिस में जोड़ों में सूजन रहती है और तकलीफ सुबह अधिक होती है। यह जकड़न आधे घंटे से अधिक रहती है जो सामान्य नहीं है।
उपाय
  • अगर जोड़ों में दर्द हो तो आइस पैक का इस्तेमाल करें। 
  • जिस जोड़ में सूजन आ गई है उसे आराम देने की कोशिश करें
  • आराम करने पर भी सूजन कम नहीं हो रही तो तुरंत डॉक्टर की सलाह लें
  • जंक फूड का सेवन न करें, सॉफ्ट ड्रिंक्स न लें
  • कैल्शियम के लिए दुग्ध युक्त पदार्थ लें
विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed