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J&K: कश्मीर में आतंकियों के मददगार को एलजी ने किया बर्खास्त, दो सरकारी कर्मचारियों पर लगा देशद्रोह का आरोप

Fri, 29 Nov 2024 04:26 PM IST
निकिता गुप्ता अमर उजाला नेटवर्क, जम्मू
अमर उजाला नेटवर्क, जम्मू Published by: निकिता गुप्ता Updated Fri, 29 Nov 2024 04:26 PM IST
सार

जम्मू-कश्मीर के उपराज्यपाल मनोज सिन्हा ने सुरक्षा कारणों से आतंकवादी लिंक वाले दो सरकारी कर्मचारियों, अब.रहमान नाइक और जाहिर अब्बास, की सेवाएं समाप्त कर दीं।

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Jammu Kashmir: LG dismissed the helper of terrorists in Kashmir, two government employees accused
उपराज्यपाल मनोज सिन्हा - फोटो : डीपीआईआर, जम्मू कश्मीर

विस्तार

जम्मू-कश्मीर के उपराज्यपाल मनोज सिन्हा ने  दो सरकारी कर्मचारियों की सेवाएं समाप्त कर दी हैं। कानून प्रवर्तन और खुफिया एजेंसियों की  जांच के बाद यह कदम उठाया गया। दोनों कर्मचारियों के आतंकवादी संगठनों से गहरे संबंध थे और इन्हें पाकिस्तान आधारित आतंकवादी समूहों से सहायता मिल रही थी।
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पहला कर्मचारी रहमान नाइक (स्वास्थ्य विभाग में फार्मासिस्ट)
अब. रहमान नाइक जो कश्मीर के कुलगाम जिले के देवसर के निवासी थे, को 1992 में चिकित्सा सहायक के रूप में नियुक्त किया गया था। उनकी आतंकवादी संगठन हिज्बुल मुजाहिदीन से साठगांठ तब पता चल जब पुलिस ने देवसर में राजनीतिक व्यक्ति गुलाम हसन लोन की हत्या के मामले की जांच शुरू की। जांच के दौरान यह सामने आया कि नैका ने आतंकियों को स्थानीय राजनीतिक नेताओं और सुरक्षा बलों को निशाना बनाने के लिए सहायता प्रदान की।

नाइक ने यह स्वीकार किया कि उसने पाकिस्तान से निर्देश प्राप्त किए थे और वह एक ओवरग्राउंड वर्कर (OGW) के रूप में काम करता था, जिसका मुख्य कार्य लक्ष्यों की पहचान और आतंकवादी हमलों के लिए तैयारी करना था। उन्हें और उनके सहयोगियों को हैंड ग्रेनेड और AK-47 के गोला-बारूद के साथ गिरफ्तार किया गया था।

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दूसरा कर्मचारी, जाहिर अब्बास (शिक्षा विभाग में शिक्षक)
जाहिर अब्बास, जो किश्तवाड़ जिले के बादत सरूर के निवासी थे, जो  2012 में सरकारी स्कूल में शिक्षक के रूप में नियुक्त किया गया था। 2020 में उन्हें के तीन सक्रिय आतंकवादियों को आश्रय देने के आरोप में गिरफ्तार किया गया था। अब्बास का यह भी खुलासा हुआ कि वह पाकिस्तानी आतंकवादियों को हथियारों, गोला-बारूद और आपूर्ति प्रदान कर रहे थे।

वह आतंकवादियों को सुरक्षा बलों की स्थिति के बारे में जानकारी भी दे रहे थे और उनके साथ खाद्य, आश्रय और अन्य आवश्यक सामग्री मुहैया कराते थे। जांच से यह भी पता चला कि वह जेल में रहते हुए भी अपने आतंकवादी संपर्को के साथ सक्रिय रूप से जुड़े हुए थे।

उपराज्यपाल मनोज सिन्हा ने इन दोनों कर्मचारियों की सेवाएं समाप्त करने के बाद कहा कि यह कदम पाकिस्तान और पाक-आधारित आतंकवादी संगठनों के भारत के भीतर गहरे प्रवेश को उजागर करता है। इन कर्मचारियों द्वारा देश की सुरक्षा से समझौता करने और भारतीय करदाताओं का पैसा आतंकवादी गतिविधियों में लगाने के मामले से यह साबित होता है कि आतंकवादी संगठन किस तरह से भारत के सरकारी तंत्र में घुसपैठ कर रहे हैं।

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