Jammu Kashmir: कश्मीरी हिंदू विस्थापितों ने एनएचआरसी से की मुलाकात, 13 सूत्रीय मांगें पूरी करने की मांग
कश्मीरी हिंदू विस्थापितों ने राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग को ज्ञापन सौंपा, जिसमें जन्मभूमि पर वापसी, सुरक्षा और सम्मान की मांग की गई, नरसंहार पीड़ितों को शहीद का दर्जा देने की मांग भी शामिल है।
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कश्मीरी हिंदू विस्थापितों के शिष्टमंडल ने मंगलवार को राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग (एनएचआरसी) की अध्यक्षा विजया भारती सियानी से मिला। इसका नेतृत्व केंद्र के अध्यक्ष डॉ. एमके भरत ने किया। शिष्टमंडल ने कश्मीरी हिंदू विस्थापित समाज को विगत तीन दशकों से पेश आ रही दिक्कतों से अवगत करवाते हुए 13 सूत्रीय मांगों से संबंधित ज्ञापन सौंपा।
शिष्टमंडल में शामिल सदस्यों ने कहा कि नरसंहारों में मारे गए 1400 से अधिक लोगों को शहीद का दर्जा दिया जाना चाहिए, क्योंकि उन्हें कट्टर भारतीय और हिंदू होने के कारण आतंकवादियों ने मार डाला था। उन्होंने कहा कि कश्मीरी हिंदुओं की सम्मान और सुरक्षा के साथ अपनी जन्मभूमि पर वापसी होनी चाहिए।
शिष्टमंडल ने कश्मीर में तैनात कर्मचारियों की सुरक्षा ग्रिड को गंभीरता से दुरुस्त करने की जरूरत पर भी जोर दिया। शिष्टमंडल ने कश्मीरी हिंदू विस्थापित युवाओं के लिए सांस्कृतिक और विरासत को जानने के लिए यात्राओं के आयोजन और शारदा माता का गलियारा करतारपुर साहिब गलियारे की तर्ज पर स्थापित करने पर भी जोर दिया। उन्होंने कहा कि शारदा माता मंदिर सभी कश्मीरी हिंदुओं द्वारा पूजनीय है, पीओजेके में शारदा मंदिर के रूप में इस महान शिक्षण स्थल के अवशेष पाकिस्तानी सेना द्वारा नष्ट किए जाने के कगार पर हैं।
इस मंदिर के लिए श्री करतारपुर साहिब गलियारे जैसा ही एक गलियारा बनाया जाए ताकि समुदाय इस प्रतिष्ठित विरासत को पुनर्जीवित और संरक्षित कर सके और मंदिर में अपनी श्रद्धा भी प्रकट कर सके। आयोग के डीजी इन्वेस्टिगेशन अजय भटनागर उपस्थित थे। शिष्टमंडल के अन्य सदस्यों में शिबन खैबरी, विकास रैना, प्यारे लाल भट्ट, प्रो.संदीप पंडिता और महाराजा कृष्ण भट्ट भी शामिल थे।
जिला डोडा विस्थापित वेल्फेयर कमेटी के शिष्टमंडल ने एनएचआरसी की कार्यवाहक अध्यक्ष विजया भारती सयानी से भेंट कर विस्थापित परिवारों को पेश आ रही दिक्कतों से अवगत करवाया। शिष्टमंडल में शामिल विस्थापित वेल्फयेर कमेटी के सदस्यों ने 8 सूत्रीय मांगों से संबंधित ज्ञापन सौंपा। शिष्टमंडल का नेतृत्व चेयरमैन कौशल शर्मा ने किया।
उन्होंने बताया कि पुराने डोडा जिले के विस्थापितों को जम्मू विस्थापितों के नाम से भी जाना जाता है। विस्थापित अपने पैतृक गांवों अथवा स्थानों में जाने को तैयार हैं, बशर्ते उनको बुनियादी सुविधाएं मिले।अदिति सेवा प्रतिष्ठान के संगीता फाटक कौशल विकास केंद्र का उद्घाटन विजया भारती सयानी के करकमलों द्वारा भारतीय विद्या मंदिर, मुख्य बाजार, पुराने टेलीफोन एक्सचेंज के पास, वार्ड नंबर 10, उधमपुर में हुआ। सयानी ने कहा कि भारत को विश्व गुरु बनाना है तो जॉब करने वाले नहीं, जॉब देने वाले बढ़ने चाहिए।
रियासी जिले के तलवाड़ा स्थित विस्थापित कैंप में रहने वाले विस्थापितों के शिष्टमंडल ने राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग (एनएचआरसी) की कार्यवाहक अध्यक्षा विजया भारती सियानी से भेंट कर अपनी समस्याओं से अवगत करवाया। इस शिष्टमंडल में रियासी जिले के प्राणकोट, नरकोट, टक्कीकोट, कैंतीचोरा, बलाड, थिल्लों, बहरनाली, कालावन आदि इलाकों के तलवाड़ा में रहने वाले विस्थापित शामिल थे।
इस अवसर पर राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग के डीजी इन्वेस्टिगेशन अजय भटनागर भी उपस्थित थे।फोरम फॉर ह्यूमन राइट्स एंड सोशल जस्टिस की स्थानीय इकाई के सदस्यों ने जम्मू कश्मीर में मानवाधिकारों पर चर्चा करते हुए उन्हें वर्तमान स्थिति से अवगत करवाया। फोरम के इस शिष्टमंडल में जम्मू कश्मीर हाईकोर्ट के वरिष्ठ एडवोकेट नंदा समेत अन्य एडवोकेट भी शामिल थे।