आदेशों की अवमानना मामले पर सख्त हुआ जम्मू कश्मीर हाईकोर्ट
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कोर्ट के फैसलों का पालन नहीं होने के मामलों को जम्मू कश्मीर हाईकोर्ट ने गंभीरता से लिया है। हाईकोर्ट ने मुख्य सचिव को कड़ा निर्देश दिया और कहा कि सभी विभाग के एचओडी को कोर्ट के आदेशों का पालन किया जाए। आदेश पालन के लिए समय सीमा तय की जाए।
हाईकोर्ट ने कहा कि कोर्ट में केस के लिए रुपये, दिमागी परेशानी, लोगों की मेहनत लग रही है। कोर्ट के फैसलों का पालन नहीं होने से नुकसान हो रहा है। लोगों को बिना वजह कोर्ट में दोबारा याचिका पेश करनी पड़ती है। न्यायाधीश ताशी रबसटन ने कहा कि हर दिन अवमानना याचिका कोर्ट में पेश की जा रही है। इस अवमानना याचिका पर दिए गए नोटिस को सरकार गंभीरता से नहीं लेती है।
जबकि फैसलों को सही तरीके से लागू किया जाना चाहिए। उन्होंने मुख्य सचिव को आदेश दिया कि वह अगली सुनवाई में बताएं कि सरकारी विभाग के एचओडी को सर्कुलर निकला है कि नहीं। महत्वपूर्ण आदेश कुसुम बाला की याचिका पर दिया गया, जिसमें हाईकोर्ट के आदेशों को लागू नहीं किए जाने पर अवमानना याचिका पेश की।
अदालत ने दिए सख्त आदेश
याचिका में बताया कि कोर्ट आदेश पर सरकार ने 11 सितंबर 1989 को नियमित तौर पर भर्ती करने के आदेश दिए। उस समय जूनियर असिस्टेंट का कोई पद खाली नहीं था। सरकार को आदेश दिया गया था कि वह दो महीने के भीतर अतिरिक्त पद का सृजन करे। पिछले 30 सालों से याची इंसाफ के लिए भटक रहा है। याची को नियुक्त नहीं किया गया है।
कोर्ट ने आदेश दिया अगर याची के पक्ष में उसे भर्ती करने के आदेश दो महीने में नहीं दिए गए तो पचास हजार रुपये जमा कराने हाेंगे। कोर्ट रजिस्ट्री में इसे जमा कराना होगा। याची को 25 अप्रैल 1999 से सभी लाभ दिए जाएं। अगर जूनियर असिस्टेंट का पद रिक्त नहीं है तो इसका सृजन कर याची को भर्ती किया जाए।
इस दौरान एडिशनल एडवोकेट जनरल ने कोर्ट को बताया कि हाईकोर्ट ने 2015 को भी आदेश दिया था। शिक्षा विभाग के निदेशालय की तरफ से दो सप्ताह अतिरिक्त दिए जाने की अपील की। कोर्ट ने कहा दो सप्ताह का समय देने के बाद भी अगर याची के पक्ष में फैसला नहीं हुआ तो शिक्षा विभाग के निदेशक का अप्रैल 2017 को वेतन रोका जाए।