जम्मू कश्मीर हाईकोर्ट: क्या जम्मू-कश्मीर में मुफ्त शिक्षा के नियम अधिसूचित हैं, नहीं तो सरकार बताए कब तक होगा
मुख्य न्यायाधीश पंकज मित्थल और न्यायमूर्ति पुनीत गुप्ता की खंडपीठ ने जनहित याचिका की सुनवाई के दौरान यह आदेश जारी किए। इस जनहित याचिका में निशुल्क और अनिवार्य शिक्षा अधिनियम, 2009 के बच्चों के अधिकार के तहत नियमों को तैयार करने और अधिसूचित करने के मुद्दे उठाए गए थे।
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जम्मू-कश्मीर और लद्दाख के उच्च न्यायालय ने प्रदेश सरकार से पूछा है कि क्या जम्मू-कश्मीर में बच्चों के मुफ्त और अनिवार्य शिक्षा के अधिकार अधिनियम, 2009 के तहत नियम अधिसूचित किए गए हैं ? यदि ऐसा नहीं है तो सरकार स्पष्ट करे कि वह कब तक ऐसा करेगी। सरकार को इसकी समय सीमा भी बतानी चाहिए।
मुख्य न्यायाधीश पंकज मित्थल और न्यायमूर्ति पुनीत गुप्ता की खंडपीठ ने शुक्रवार को एक जनहित याचिका की सुनवाई के दौरान यह आदेश जारी किए। इस जनहित याचिका में निशुल्क और अनिवार्य शिक्षा अधिनियम, 2009 के बच्चों के अधिकार के तहत नियमों को तैयार करने और अधिसूचित करने के मुद्दे उठाए गए थे।
याचिकाकर्ता ने सरकार को बच्चों के निशुल्क और अनिवार्य शिक्षा के अधिकार अधिनियम 2009 और धारा 12(1)(बी), 12(1)(सी) और धारा 13 के प्रावधानों को सामान्य रूप से लागू करने का निर्देश देने की मांग की है।
याचिका में सरकार से बच्चों के मुफ्त और अनिवार्य शिक्षा के अधिकार अधिनियम 2009 के तहत नियमों को जल्द से जल्द अधिसूचित करने का निर्देश देने की भी मांग की गई है। अदालत ने मुख्य सचिव और प्रमुख सचिव स्कूल शिक्षा विभाग से इस संबंध में स्पष्ट जवाब दाखिल करने के निर्देश दिए हैं।
सहायता प्राप्त व गैर सहायता प्राप्त स्कूलों की सूची मांगी
याचिकाकर्ता ने सरकार को जम्मू-कश्मीर में सहायता प्राप्त और गैर-सहायता प्राप्त निजी स्कूलों की सूची, सहायता प्राप्त निजी स्कूलों को प्रदान की जाने वाली सहायता के रूप और राशि, प्रदान किए गए बच्चों के अनुपात का वर्षवार विवरण का खुलासा करते हुए एक स्थिति रिपोर्ट दाखिल करने के लिए भी निर्देश देने की मांग की है।