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जम्मू कश्मीर हाईकोर्ट: बिजली तार टूटने से हादसा हो तो सरकार जिम्मेदार, पीड़ित को दें 24 लाख मुआवजा

Mon, 28 Nov 2022 02:12 AM IST
विमल शर्मा अमर उजाला नेटवर्क, श्रीनगर
अमर उजाला नेटवर्क, श्रीनगर Published by: विमल शर्मा Updated Mon, 28 Nov 2022 02:12 AM IST
सार

श्रीनगर के पारिमपोरा में सब्जी के खेत में काम करते समय हाईटेंशन तार की चपेट में आने से महिला झुलस गई थी। इस कारण उसके दोनों पैर काटने पड़े थे। हाईकोर्ट ने ग्यारह साल पुराने मामले में सुनवाई करते हुए सरकार की दलीलें खारिज करते हुए कहा कि पीड़ित को छह फीसदी ब्याज भी देना होगा।

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Jammu Kashmir High Court: accident happens due breaking electric wire government responsible
highcourt srinagar - फोटो : फाइल

विस्तार

खेत में काम करते समय बिजली तार टूटने से करंट की चपेट में आई महिला को जम्मू-कशमीर व लद्दाख हाईकोर्ट ने 24 लाख रुपये मुआवजा देने का फैसला सुनाया है। ग्यारह साल पुराने इस मामले में बुरी तरह से झुलसी महिला के दोनों पैर काटने पड़े थे।

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सरकार की दलीलों को खारिज करते हुए न्यायाधीश संजय धर ने कहा, बिजली तार से लोगों की सुरक्षा विभाग की जिम्मेदारी है। अदालत केस से जुड़ी औपचारिक आपत्तियों पर ध्यान न देकर पीड़ित को मुआवजा देने का आदेश देती है।
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महिला को एक लाख रुपये की अनुग्रह राशि और उसके पति को बिजली विभाग में डेली वेजर नियुक्ति किया गया था। कुल मुआवजा 26 लाख बना था, लेकिन अनुग्रह राशि और पति की नौकरी को ध्यान में रखते हुए मुआवजा राशि में से दो लाख घटाए जा रहे हैं।
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मुआवजा राशि के साथ छह फीसदी ब्याज भी देना होगा। 25 अगस्त 2011 को पूर्व माला बेगम श्रीनगर के बाहरी क्षेत्र पारिमपोरा में अपने सब्जी के खेत में काम रही थी। इसी दौरान बेमिना-बडगाम ट्रांसमिशन लाइन का हाईटेंशन तार टूटकर उस पर आ गिरा।

जांच में पाया गया कि हाईटेंशन तार को जिस खंभे का सहारा दिया गया था, वह लकड़ी का था। कमजोर सहारे को मजबूत करना सरकार का काम था, जिसकी अनदेखी की गई। न्यायाधीश ने कहा, हाईकोर्ट के पास अनुच्छेद 226 के तहत पर्याप्त शक्तियां हैं।  

जिसका इस मामले में प्रयोग किया जा रहा है। सरकार ने जब स्वीकार कर लिया है कि इस हादसे में विभागीय लापरवाही थी, तो औपचारिक आपत्तियाें पर वक्त जाया करने के बजाय बात न्याय की होनी चाहिए।

अनदेखी की गई तो कोई अपने खेत से नहीं जाने देगा तार

हाईकोर्ट ने कहा, जब मामला बिजली तार जैसी बेहद खतरनाक वस्तु का हो, हादसे को रोकने के लिए अतिरिक्त सावधानी बरतना विभागीय अमले का दायित्व है। हाईटेंशन तार अमूमन खेतों से होकर गुजरते हैं। यदि इस मामले में गंभीरता नहीं जताई गई तो कोई भी अपनी भूमि या खेत से ट्रांसमिशन लाइन को नहीं जाने देगा। 

ऐसे तय की गई मुआवजा राशि

हाईकोर्ट ने कहा, पीड़ित महिला को मुआवजा देने के लिए 26 लाख की राशि तय की गई है। इसमें भविष्य को लेकर हुए नुकसान की भरपाई के लिए नौ लाख, चिकित्सा खर्च के लिए पांच लाख, तीमारदार खर्च के लिए दो लाख, परिवहन किराये के 50 हजार, खाना और पोषण के लिए 50 हजार, कृत्रिम अंगों के लिए छह लाख, जीवन की सुविधाओं को खोने के लिए एक लाख और पीड़ा सहने के लिए दो लाख रुपये निर्धारित किए गए।

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