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Election: इतिहास में चिनाब घाटी की इन छह सीटों पर रहा नेकां-कांग्रेस का दबदबा; डोडा में मोदी लहर में खिला कमल
Sun, 25 Aug 2024 10:38 AM IST
शाहरुख खान
सौरभ सागर, अमर उजाला, उधमपुर
सौरभ सागर, अमर उजाला, उधमपुर
Published by: शाहरुख खान
Updated Sun, 25 Aug 2024 10:38 AM IST
सार
इतिहास में चिनाब घाटी के तीनों जिलों की छह सीटों पर नेकां-कांग्रेस का दबदबा रहा है। मोदी लहर के बीच 2014 में छह में से चार सीटों पर भाजपा ने सेंध लगाई थी।
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jammu kashmir election 2024
- फोटो : अमर उजाला
विस्तार
विधानसभा चुनाव के पहले चरण में जम्मू संभाग के डोडा, रामबन और किश्तवाड़ जिलों में आठ सीटों के लिए 18 सितंबर को मतदान होने हैं। इनमें से दो सीटों के लिए पहली बार चुनाव होने जा रहे हैं। अन्य छह के इतिहास में कांग्रेस और नेशनल कॉन्फ्रेंस का गढ़ रहे, विस क्षेत्रों में 2014 में मोदी लहर के बीच तीन सीटों पर भाजपा ने पहली बार अपना खाता खोला था, जबकि 1996 के बाद दूसरी बार रामबन विधानसभा क्षेत्र का नेतृत्व करने का मौका प्राप्त किया था।
2014 के मुकाबले मौजूदा चुनावों में राजनीतिक हालात पूरी तरह से विपरीत हैं और नेकां व कांग्रेस जैसे विपक्षी दल एक दूसरे का समर्थन का एलान कर चुके हैं।
कांग्रेस के खिलाफ मोर्चा खोलने वाले पूर्व मुख्यमंत्री गुलाम नबी आजाद जैसे दिग्गज नेता भी अपनी नई पार्टी डीपीएपी के साथ चुनौती देने के लिए तैयार हैं। ऐसे में चिनाब घाटी की आठ सीटों पर दो नई सीटों के साथ इतिहास दोहरा पाना जहां पुराने दलों के लिए भी आसान नहीं होगा।
वहीं, तीनों मुस्लिम बाहुल्य जिलों में इस बार भाजपा को कड़ी चुनौती का सामना करना पड़ सकता है। रामबन जिले से शुरूआत करें तो रामबन विधानसभा क्षेत्र में 1962, 77, 87 व 2002 में हुए विधानसभा चुनावों में नेकां, जबकि 1967, 72, 83 और 2008 में कांग्रेस और 1996 और 2014 में भाजपा को सफलता मिली।
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2014 के मुकाबले मौजूदा चुनावों में राजनीतिक हालात पूरी तरह से विपरीत हैं और नेकां व कांग्रेस जैसे विपक्षी दल एक दूसरे का समर्थन का एलान कर चुके हैं।
कांग्रेस के खिलाफ मोर्चा खोलने वाले पूर्व मुख्यमंत्री गुलाम नबी आजाद जैसे दिग्गज नेता भी अपनी नई पार्टी डीपीएपी के साथ चुनौती देने के लिए तैयार हैं। ऐसे में चिनाब घाटी की आठ सीटों पर दो नई सीटों के साथ इतिहास दोहरा पाना जहां पुराने दलों के लिए भी आसान नहीं होगा।
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वहीं, तीनों मुस्लिम बाहुल्य जिलों में इस बार भाजपा को कड़ी चुनौती का सामना करना पड़ सकता है। रामबन जिले से शुरूआत करें तो रामबन विधानसभा क्षेत्र में 1962, 77, 87 व 2002 में हुए विधानसभा चुनावों में नेकां, जबकि 1967, 72, 83 और 2008 में कांग्रेस और 1996 और 2014 में भाजपा को सफलता मिली।
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बनिहाल में 1967, 77, 83 व 87 में नेकां जबकि 1996 में आजाद और 2002 में लगातार तीन बार नेकां से विधायक रह चुके मौलवी अब्दुल रशीद को चौथी बार आजाद उम्मीदवार के रूप में जीत प्राप्त हुई। वर्ष 1972 के अलावा 2008 और 2014 में विस चुनावों में कांग्रेस ने लगातार दो बार जीत हासिल की।
डोडा में भाजपा को 2014 में मिली जीत
डोडा जिले में डोडा विधानसभा क्षेत्र से 1962 व 67 में नेकां-कांग्रेस गठबंधन, 1987, 96 व 97 (उपचुनाव) में नेकां, 1972 में कांग्रेस, 2002 में आजाद उम्मीदवार के रूप में जीत हासिल कर अब्दुल मजीद वानी ने 2008 में दूसरी बार कांग्रेस की टिकट पर जीत हासिल की।
डोडा जिले में डोडा विधानसभा क्षेत्र से 1962 व 67 में नेकां-कांग्रेस गठबंधन, 1987, 96 व 97 (उपचुनाव) में नेकां, 1972 में कांग्रेस, 2002 में आजाद उम्मीदवार के रूप में जीत हासिल कर अब्दुल मजीद वानी ने 2008 में दूसरी बार कांग्रेस की टिकट पर जीत हासिल की।
भाजपा को 2014 में क्षेत्र का नेतृत्व करने का मौका मिला। पूर्व मुख्यमंत्री गुलाम नबी आजाद जैसे दिग्गज नेता के विधानसभा क्षेत्र में 1962, 67, 72, 83, 87, 2006, 08 व 2009 (उपचुनाव मिलाकर) लगातार कांग्रेस को जीत हासिल होती रही।
1977 में जनता पार्टी, 1996 में बसपा और 2014 में भाजपा को एक-एक बार क्षेत्र का नेतृत्व करने का मौका मिला। गुलाम नबी आजाद भी 2006 के उपचुनाव और 2008 के चुनाव में जीत हासिल कर भद्रवाह के विधायक रह चुके हैं। 2022 में स्थापित की गई डोडा वेस्ट में पहली बार चुनाव होने जा रहे हैं।
किश्तवाड़ के तीन विस क्षेत्रों मे से पाडर नागसेनी 2022 में परिसीमन के वाद स्थापित हुआ। इसमें पाडर के लिए पहली बार चुनाव होंगे। किश्तवाड़ 2014 तक नेकां व कांग्रेस का मुख्य गढ़ रहा है। 1962, 77, 87, 96, 2002 व 2008 में नेकां को जीत हासिल हुई। जबकि 1967, 72 व 83 में कांग्रेस ने क्षेत्र का नेतृत्व किया।
हालांकि 2014 में भाजपा को किश्तवाड़ में पहली बार अपना खाता खोलने का मौका प्राप्त हुआ। इंद्रवल में 1972,87 व 96 में मात्र तीन बार जहां नेकां को सफलता मिली तो वहीं 1967, 77, 83 में हुए चुनाव में सफलता हासिल करने के बाद 2002, 08 व 14 में लगातार कांग्रेस का दबदबा रहा।