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Jammu Election: अपनी और डोगरा पहचान बचाने की जंग लड़ रही ऐतिहासिक मुबारक मंडी, महाराजा का शाही निवास थी यह जगह
Mon, 30 Sep 2024 02:49 PM IST
शाहरुख खान
अरुण कुमार, अमर उजाला, जम्मू
अरुण कुमार, अमर उजाला, जम्मू
Published by: शाहरुख खान
Updated Mon, 30 Sep 2024 02:49 PM IST
सार
ऐतिहासिक मुबारक मंडी अपनी और डोगरा पहचान बचाने की जंग लड़ रही है। 25 वर्षों से जीर्णोद्धार का काम चल रहा है, लेकिन अभी तक पूरा नहीं हो सका है। मुबारक मंडी वर्ष 1925 तक डोगरा राजवंश के महाराजा का शाही निवास था।
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Jammu Kashmir Election
- फोटो : अमर उजाला
विस्तार
डोगरा राजवंश और पांच धार्मिक स्थानों का केंद्र पंजतर्थी शहर के सबसे पुराने इलाकों में आता है। यहां की पहचान पांच मंदिर व ऐतिहासिक मुबारक मंडी से है। कभी पर्यटन का केंद्र रही मुबारक मंडी लंबे समय तक सरकारों की अनदेखी का शिकार रही।
डोगरा पहचान, संस्कृति व इतिहास को समेटे मुबारक मंडी का 20 साल से जीर्णोद्धार का काम चल रहा है, लेकिन लेटलतीफी पूरा नहीं हो पा रहा है। मुबारक मंडी जम्मू-कश्मीर के डोगरा राजवंश के महाराजा रणबीर सिंह, प्रताप सिंह व हरि सिंह का शाही निवास रहा है।
1925 तक वह यहां रहते रहे हैं। हालांकि बाद में राजवंश के लोग हरि निवास पैलेस में रहने लगे। मुबारक मंडी के आसपास पंजतर्थी का बड़ा बाजारा, राजभवन, दूरदरर्शन, ऑल इंडिया रेडियो की इमारतें हैं। इलाके में लोगों के लिए मुबारक मंडी का जीर्णोद्धार बड़ा मुद्दा है।
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मुबारक मंडी के मुख्य गेट के साथ चाय की टपरी चलने वाले अशोक कहते हैं 20 सालों से यहां कम चलते देख रहा हूं। एक हिस्सा बनाते हैं तो दूसरा गिर जाता है। मुबारक मंडी डोगरा की पहचान का प्रतीक है।
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डोगरा पहचान, संस्कृति व इतिहास को समेटे मुबारक मंडी का 20 साल से जीर्णोद्धार का काम चल रहा है, लेकिन लेटलतीफी पूरा नहीं हो पा रहा है। मुबारक मंडी जम्मू-कश्मीर के डोगरा राजवंश के महाराजा रणबीर सिंह, प्रताप सिंह व हरि सिंह का शाही निवास रहा है।
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1925 तक वह यहां रहते रहे हैं। हालांकि बाद में राजवंश के लोग हरि निवास पैलेस में रहने लगे। मुबारक मंडी के आसपास पंजतर्थी का बड़ा बाजारा, राजभवन, दूरदरर्शन, ऑल इंडिया रेडियो की इमारतें हैं। इलाके में लोगों के लिए मुबारक मंडी का जीर्णोद्धार बड़ा मुद्दा है।
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मुबारक मंडी के मुख्य गेट के साथ चाय की टपरी चलने वाले अशोक कहते हैं 20 सालों से यहां कम चलते देख रहा हूं। एक हिस्सा बनाते हैं तो दूसरा गिर जाता है। मुबारक मंडी डोगरा की पहचान का प्रतीक है।
चाय की टपरी पर ही बैठे डाक विभाग के कर्मचारी कहते हैं कि कश्मीर केंद्रित सरकारों ने डोगर पहचान मिटाने का काम किया है। पीडीपी-कांग्रेस, नेकां-कांग्रेस की यहां सरकारें रहीं, लेकिन मुबारक मंडी के जीर्णोद्धार के लिए किसी ने कुछ नहीं किया।
डोगरा पहचान के प्रतीक स्थल के संरक्षण को लेकर इतना गैर- जिम्मेदारना रवैया डोगरा समाज के प्रति राजनीतिक दलों की सोच को भी बयां करता है। अगर काम समय पर होता तो आज ये स्थल पर्यटन का केंद्र बनता। पुराने शहर के प्राचीन मंदिरों की तरफ भी सरकार का ध्यान नहीं है।
2008 से मुबारक मंडी के जीर्णोद्धार का चल रहा काम
26 अप्रैल, 2005 को जारी एसआरओ-126 के तहत ऐतिहासिक मुबारक मंडी परिसर को प्राचीन स्मारक संरक्षण अधिनियम के प्रावधानों के अनुसार राज्य संरक्षित स्मारक घोषित किया गया था। इसके बाद अभिलेखागार, पुरातत्व एवं संग्रहालय निदेशालय ने पर्यटन विभाग के माध्यम से अत्यावश्यक प्रकृति के मरम्मत कार्य करवाने शुरू किए। मुबारक मंडी हेरिटेज सोसायटी के गठन के बाद सरकार ने 23 अप्रैल, 2008 को परिसर को केवल प्रबंधन और संरक्षण उद्देश्यों के लिए सोसायटी को हस्तांतरित कर दिया और जीर्णोद्धार कार्य शुरू किया। हाल ही में सरकार ने मुबारक मंडी का प्रशासनिक विभाग पर्यटन से हटाकर संस्कृति विभाग में स्थानांतरित कर दिया है। वर्तमान में आर्मी मुख्यालय का काम पूरा हुआ है। मुबारक मंडी में पांच इमारतों का जीर्णोद्धार होना है।
26 अप्रैल, 2005 को जारी एसआरओ-126 के तहत ऐतिहासिक मुबारक मंडी परिसर को प्राचीन स्मारक संरक्षण अधिनियम के प्रावधानों के अनुसार राज्य संरक्षित स्मारक घोषित किया गया था। इसके बाद अभिलेखागार, पुरातत्व एवं संग्रहालय निदेशालय ने पर्यटन विभाग के माध्यम से अत्यावश्यक प्रकृति के मरम्मत कार्य करवाने शुरू किए। मुबारक मंडी हेरिटेज सोसायटी के गठन के बाद सरकार ने 23 अप्रैल, 2008 को परिसर को केवल प्रबंधन और संरक्षण उद्देश्यों के लिए सोसायटी को हस्तांतरित कर दिया और जीर्णोद्धार कार्य शुरू किया। हाल ही में सरकार ने मुबारक मंडी का प्रशासनिक विभाग पर्यटन से हटाकर संस्कृति विभाग में स्थानांतरित कर दिया है। वर्तमान में आर्मी मुख्यालय का काम पूरा हुआ है। मुबारक मंडी में पांच इमारतों का जीर्णोद्धार होना है।
मुबारक मंडी का इतिहास
मुबारक मंडी राजमहल को राजा ध्रुव देव ने वर्ष 1710 में बनवाना शुरू किया था और इसे पूरा होने में 150 साल लग गए। ये तीन निर्माण शैलियों में बना है। महल का वास्तु यूरोपीय, मुगल और राजस्थानी शैली से लिया गया है। मुबारक मंडी पैलेस में डोगरा शासकों के शाही कार्यक्रम और समारोह होते थे। इस महल में अब तक 36 बार आग लग चुकी है। 1980 और 2005 में यह महल भूकंप का भी शिकार हुआ। यहां जनाना महल, पिंक हॉल, शीश महल, गोल घर काम्पलेक्स, नया महल, हवा महल, रानी चरक पैलेस है।
मुबारक मंडी राजमहल को राजा ध्रुव देव ने वर्ष 1710 में बनवाना शुरू किया था और इसे पूरा होने में 150 साल लग गए। ये तीन निर्माण शैलियों में बना है। महल का वास्तु यूरोपीय, मुगल और राजस्थानी शैली से लिया गया है। मुबारक मंडी पैलेस में डोगरा शासकों के शाही कार्यक्रम और समारोह होते थे। इस महल में अब तक 36 बार आग लग चुकी है। 1980 और 2005 में यह महल भूकंप का भी शिकार हुआ। यहां जनाना महल, पिंक हॉल, शीश महल, गोल घर काम्पलेक्स, नया महल, हवा महल, रानी चरक पैलेस है।