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Jammu Ground Report: दक्षिण में फंसा पूरब... वीरी, रियाज सराफ और योगी, सबकी परीक्षा; किसी के लिए जीत आसान नहीं
Mon, 16 Sep 2024 02:49 PM IST
शाहरुख खान
अमृतपाल सिंह बाली/फ़िदा हुसैन, अमर उजाला,जम्मू
अमृतपाल सिंह बाली/फ़िदा हुसैन, अमर उजाला,जम्मू
Published by: शाहरुख खान
Updated Mon, 16 Sep 2024 02:49 PM IST
सार
जम्मू-कश्मीर की इस सीट पर चतुष्कोणीय मुकाबला है। पीडीपी के वीरी को बिजबिहाड़ा के तिलिस्म का साथ है। नेकां के रियाज पर कांग्रेस का हाथ है। वीरी पांचवीं जीत की उम्मीद में हैं।
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Jammu Kashmir Election
- फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
अजान, घंटियों की आवाज और कानों में घुलते शबद कीर्तन के मीठे बोल, यह खूबसूरती है मुस्लिम बहुल शांगस-अनंतनाग पूर्व सीट की। मंदिर, मस्जिद और गुरुद्वारों वाली इस सीट पर चतुष्कोणीय मुकाबला है। कांग्रेस ने रियाज अहमद खान, पीपुल्स डेमोक्रेटिक पार्टी ने अब्दुल रहमान वीरी, भाजपा ने वीर जी सराफ और अपनी पार्टी ने महाराज कृष्ण योगी को चुनाव मैदान में उतारा है।
कांग्रेस-नेकां के साझे प्रत्याशी को पार्टी ने दोबारा मौका दिया है। 2014 में रियाज को हार का सामना करना पड़ा था। पीडीपी प्रत्याशी वीरी शांगस-अनंतनाग पूर्व सीट के लिए नया चेहरा हैं। वह बिजबिहाड़ा सीट से चार बार के विधायक हैं और मंत्री भी रह चुके हैं। अपनी पार्टी ने विस्थापितों के वोट साधने के लिए एमके योगी के रूप में कश्मीरी पंडित चेहारा उतारा है।
बिजबिहाड़ा क्षेत्र के कई गांव अब अनंतनाग पूरब का हिस्सा हैं। वीरी बेशक इस सीट पर नया चेहरा हैं लेकिन उनके लिए इस विधानसभा क्षेत्र में भी पुराने इलाके जुड़ने का एक सुखद पहलू है। दूसरी ओर लंबे समय से नेकां से जुड़े रियाज अहमद खान को गठबंधन का फायदा है। उन्हें भरोसा है कि कांग्रेस का पक्का वोट उन्हें मिल जाएगा।
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खान वोट बटोरने के लिए सक्रिय हैं और खुद को प्रतिद्वंद्वी के रूप में स्थापित कर रहे हैं। भाजपा के वीर जी सराफ और अपनी पार्टी के महाराज कृष्ण योगी भी क्षेत्र में पूरी तरह सक्रिय हो चुके हैं। चारों के मैदान में होने से यहां किसी के लिए भी जीत आसान नहीं है। बिजबिहाड़ा विस सीट से टूटकर मिले इलाके और पहलगाम निर्वाचन क्षेत्र के मतदाता जीत-हार में निर्णयक होंगे।
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कांग्रेस-नेकां के साझे प्रत्याशी को पार्टी ने दोबारा मौका दिया है। 2014 में रियाज को हार का सामना करना पड़ा था। पीडीपी प्रत्याशी वीरी शांगस-अनंतनाग पूर्व सीट के लिए नया चेहरा हैं। वह बिजबिहाड़ा सीट से चार बार के विधायक हैं और मंत्री भी रह चुके हैं। अपनी पार्टी ने विस्थापितों के वोट साधने के लिए एमके योगी के रूप में कश्मीरी पंडित चेहारा उतारा है।
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बिजबिहाड़ा क्षेत्र के कई गांव अब अनंतनाग पूरब का हिस्सा हैं। वीरी बेशक इस सीट पर नया चेहरा हैं लेकिन उनके लिए इस विधानसभा क्षेत्र में भी पुराने इलाके जुड़ने का एक सुखद पहलू है। दूसरी ओर लंबे समय से नेकां से जुड़े रियाज अहमद खान को गठबंधन का फायदा है। उन्हें भरोसा है कि कांग्रेस का पक्का वोट उन्हें मिल जाएगा।
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खान वोट बटोरने के लिए सक्रिय हैं और खुद को प्रतिद्वंद्वी के रूप में स्थापित कर रहे हैं। भाजपा के वीर जी सराफ और अपनी पार्टी के महाराज कृष्ण योगी भी क्षेत्र में पूरी तरह सक्रिय हो चुके हैं। चारों के मैदान में होने से यहां किसी के लिए भी जीत आसान नहीं है। बिजबिहाड़ा विस सीट से टूटकर मिले इलाके और पहलगाम निर्वाचन क्षेत्र के मतदाता जीत-हार में निर्णयक होंगे।
कांग्रेस और पीडीपी में बंटती रही है सीट
वर्ष 2014 में गुलजार अहमद वानी (कांग्रेस) 21,085 वोटों के साथ यहां से जीत चुके हैं, जबकि पीरजादा मंसूर हुसैन (पीडीपी) को 18,896 वोट मिले, वह 2,189 वोट से हार गए। वर्ष 2008 में पीरजादा मंसूर हुसैन (पीडीपी) 13,853 वोटों के साथ जीते, जबकि गुलजार अहमद वानी (कांग्रेस) को 12,423 वोट मिले, वह 1,430 वोट से हार गए। वर्ष 2002 में पीर मोहम्मद हुसैन (पीडीपी) 5,115 वोटों के साथ जीते, जबकि गुलजार अहमद (कांग्रेस) को 4,774 वोट मिले, वह 341 वोटों से हार गए।
वर्ष 2014 में गुलजार अहमद वानी (कांग्रेस) 21,085 वोटों के साथ यहां से जीत चुके हैं, जबकि पीरजादा मंसूर हुसैन (पीडीपी) को 18,896 वोट मिले, वह 2,189 वोट से हार गए। वर्ष 2008 में पीरजादा मंसूर हुसैन (पीडीपी) 13,853 वोटों के साथ जीते, जबकि गुलजार अहमद वानी (कांग्रेस) को 12,423 वोट मिले, वह 1,430 वोट से हार गए। वर्ष 2002 में पीर मोहम्मद हुसैन (पीडीपी) 5,115 वोटों के साथ जीते, जबकि गुलजार अहमद (कांग्रेस) को 4,774 वोट मिले, वह 341 वोटों से हार गए।
लोगों को भरोसा, विधायक मिलने से विकास तेज होगा
मोहम्मद सदीक ने कहा कि दस वर्ष का इंतजार समाप्त हुआ। क्षेत्र के विकास को लेकर हम सरकारी विभागों के पास जाते थे तो समाधान तो निकलता था लेकिन अगर हमारे पास अपना विधायक होगा तो क्षेत्र का विकास तेजी से होगा। उन्होंने कहा कि अभी भी कई गांव हैं जहां सड़कों का निर्माण हुआ ही नहीं है। जो सड़कें बनीं थीं उनकी हालत खस्ता है।
मोहम्मद सदीक ने कहा कि दस वर्ष का इंतजार समाप्त हुआ। क्षेत्र के विकास को लेकर हम सरकारी विभागों के पास जाते थे तो समाधान तो निकलता था लेकिन अगर हमारे पास अपना विधायक होगा तो क्षेत्र का विकास तेजी से होगा। उन्होंने कहा कि अभी भी कई गांव हैं जहां सड़कों का निर्माण हुआ ही नहीं है। जो सड़कें बनीं थीं उनकी हालत खस्ता है।
युवक रसिक अहमद का कहना है कि मैं पहली बार वोट दूंगा और इंतजार है उस समय का जब मैं ईवीएम में अपना वोट दर्ज करवाऊंगा। वह ऐसा उम्मीदवार चाहतें हैं जो युवाओं के मसलों का समाधान करे। यहां खेल के मैदान, स्टेडियम सहित लाइब्रेरी की बहुत जरूरत है।
जहूर अहमद ने कहा कि बिजली के बिल बहुत ज्यादा हैं। इतना पैसा लिया जाता है लेकिन फिर भी 24 घंटे बिजली नहीं मिलती। कई इलाकों में बिजली की सप्लाई ही नहीं है। सर्दियों में अधिकतर इलाके अंधेरे में डूबे रहते हैं।