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जम्मू-कश्मीरः संपत्ति का हक मिलने पर चहकीं दूसरे राज्यों में ब्याही गईं बेटियां
Fri, 01 Nov 2019 04:42 AM IST
संजीव कुमार झा
अमर उजाला ब्यूरो, जम्मू
अमर उजाला ब्यूरो, जम्मू
Published by: संजीव कुमार झा
Updated Fri, 01 Nov 2019 04:42 AM IST
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जम्मू-कश्मीर के केंद्र शासित प्रदेश बनने के साथ दूसरे राज्यों में ब्याही गईं जम्मू-कश्मीर की बेटियों को शादी के बाद भी तमाम अधिकार मिल सकेंगे। बेटियों के नाम जारी होने वाले स्टेट सब्जेक्ट (स्थायी नागरिकता प्रमाण पत्र) में वैलिड टिल मैरिज लिखा जाता था। जम्मू-कश्मीर से बाहर शादी होते ही बेटियों के नागरिकता समेत पैतृक संपत्ति के तमाम अधिकार खत्म हो जाते थे।
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केंद्र शासित प्रदेश बनने पर अब यह बेटियों फूली नहीं समा रहीं। उनका कहना है कि उन्हें अब दोयम दर्जे की नागरिकता से निजात मिली है।
पंजाब के पठानकोट क्षेत्र में 1999 में शादी करने वाली रमा कुमारी (मौजूदा जम्मू में) का कहना है कि नई व्यवस्था से बेटियों को लाभ मिला है। दूसरे राज्यों में शादी के बाद अधिकार के लिहाज से उन्हें बेदखल कर दिया जाता था। लेकिन अब ऐसा नहीं होगा। वे अपने पैतृक स्थान पर भी सभी अधिकारों की हकदार बनी हैं।
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यह उन बेटियों के लिए सबसे सुखद समाचार है जिनके जीवन में कोई अनहोनी हुई और वे वापस पैतृक स्थल पर पहुंचकर अपने अधिकार नहीं पा सकी हैं। न्यायालय में ऐसे सैकड़ों मामले विचाराधीन हैं।
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पहले जम्मू-कश्मीर में पहले 35-ए लागू था जिसके तहत यहां की बेटियों की शादी दूसरे राज्य में होने से उन्हें नागरिकता खोनी पड़ती थी। लेकिन अब उन्हें जम्मू-कश्मीर में जमीन खरीदने, पैतृक संपत्ति पर हक रखने आदि अधिकार प्राप्त हुए हैं। नये जम्मू-कश्मीर में स्टेट सब्जेक्ट की अनिवार्यता और कानून दोनों खत्म हो गए हैं।
2016 में राजस्थान में शादी करने वाली (मौजूदा सूरत में बसी) मृदुल वर्मा ने कहा कि जम्मू-कश्मीर में नई सुबह की शुरुआत होने से बेटियों के लिए खासतौर पर खुशी की बात है। वह बेटी जो आधी उम्र मां बाप के पास गुजारती है, लेकिन जम्मू-कश्मीर के बाहर शादी करने पर उन्हें कोई अधिकार नहीं दिए जाते थे। वे भी जम्मू-कश्मीर में समान अधिकारों के लिए हकदार होंगी। जम्मू कश्मीर से बड़ी संख्या में बेटियों की हिमाचल, पंजाब सहित अन्य साथ लगते राज्यों में शादी हुई है।