जम्मू-कश्मीर: धंसने से नहीं भूस्खलन से डोडा के घरों में दरारें, विशेषज्ञों की प्रारंभिक जांच में हुआ खुलासा
जम्मू विश्वविद्यालय के वरिष्ठ भू-विशेषज्ञ प्रो. जीएम भट के नेतृत्व में टीम ने घटनास्थल पर पहुंचकर नमूने लिए। इसकी जांच की जा रही है। डॉ. युद्धवीर सिंह ने बताया कि ठाठरी की नई बस्ती ढलान पर बसी है। जहां कुछ साल पहले पानी की निकासी की व्यवस्था नहीं थी।
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डोडा के ठाठरी के घरों में दरारें भू-धंसाव से नहीं, बल्कि जमीन खिसकने से आई हैं। यह खुलासा जम्मू विश्वविद्यालय के विशेषज्ञों की ओर से प्रभावित इलाके में की गई जांच में हुआ है। विवि के वरिष्ठ भू-विशेषज्ञ प्रो. जीएम भट के नेतृत्व में डॉ. युद्धवीर सिंह की टीम ने घटनास्थल पर पहुंचकर नमूने लिए हैं, जिन पर जांच की जा रही है।
डॉ. सिंह ने कहा कि ठाठरी की नई बस्ती ढलान पर बसी है। जहां कुछ साल पहले पानी की निकासी की व्यवस्था नहीं थी। इस कारण बारिश का पानी जमीन के अंदर रिसता रहा, जिसका प्रभाव अब दिखना शुरू हो गया है। अगर जल्द जल निकासी के उचित प्रबंध नहीं किए गए तो बड़े भूस्खलन का खतरा है।
विशेषज्ञों ने कहा कि शनिवार को फिर ग्राउंड पेनेट्रेटिंग रडार के जरिये जमीन की सतह तक जांच की जाएगी। पहले जांच के लिए उन्होंने फक्सू नाले से लेकर ठाठरी कस्बे के कालनाई पुल तक, चिनाब नदी के पार और प्रभावित क्षेत्र के ऊपरी ग्रामीण इलाके से नमूने लिए हैं।
हालांकि चिनाब और राष्ट्रीय राजमार्ग के निर्माण से कोई नुकसान की पुष्टि नहीं हुई है। ठाठरी के एसडीएम अथर अमीन जरगर ने कहा कि फिलहाल स्थिति में कोई बदलाव नहीं आया है। केंद्र सरकार जल्द रिपोर्ट सौंपेंगी।
घर बनाते समय पानी की निकासी के साथ नहीं रखा इन बातों का ध्यान
विशेषज्ञों का कहना है कि नई बस्ती को ढलान क्षेत्र में बसाया गया है। घर बनाते समय पानी की निकासी और बाकी चीजों का ध्यान नहीं रखा गया है। इस वजह से करीब 100 से 150 मीटर तक क्षेत्र में भूस्खलन हो रहा है। कहा कि प्रभावित क्षेत्र में पड़ी दरारें बारिश से पहले बंद की जानीं चाहिए।
बारिश से पहले कोई कदम नहीं उठाया गया तो दरारों में पानी भर जाएगा। इससे पूरा क्षेत्र भूस्खलन की चपेट में आ जाएगा। आसपास के क्षेत्र को भी नुकसान पहुंचेगा। दरारों में पानी जाने से रोका जाए तो स्थिति सामान्य हो जाएगी।
विशेषज्ञों का सुझाव है पहाड़ी क्षेत्र में घर बनाते समय पानी की निकासी के लिए उचित व्यवस्था रखें। नई बस्ती का प्रभावित क्षेत्र 65 से 70 डिग्री तक ढलान पर है। जहां से धीरे-धीरे जमीन खिसकनी शुरू हो गई है। हालांकि ठाठरी की तुलना जोशीमठ के साथ करनी तर्कसंगत नहीं है।
रामबन में सड़क बनाते वक्त नहीं की गई चरणबद्ध तरीके से कटाई
रामबन शहर के आसपास इलाकों में सड़क बनाते वक्त चरणबद्ध तरीके से भूमि कटाव का ध्यान नहीं रखा गया है। यहां ढलान की तरह कटाई हुई है, जिसका खामियाजा स्थानीय लोगों को भुगतना पड़ रहा है। कई परिवार अपनी संपत्तियों को छोड़ने के लिए मजबूर हैं।
अब यह प्रशासन के लिए भी समस्या बन चुकी है। जम्मू विवि के विशेषज्ञों ने कहा कि रामबन क्षेत्र में भूस्खलन के और भी कई कारण हैं। कई स्थानों पर प्राकृतिक तरीके से भी भूस्खलन हो रहा है। इससे मिट्टी की पकड़ ढीली पड़ रही है।