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पुलवामा की घटना के बाद भी नहीं बरती जा रही सतर्कता, सुरक्षा में बड़ी चूक है बनिहाल कार धमाका
Sun, 31 Mar 2019 12:43 PM IST
Pranjal Dixit
अजय मीनिया, जम्मू
अजय मीनिया, जम्मू
Published by: Pranjal Dixit
Updated Sun, 31 Mar 2019 12:43 PM IST
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बनिहाल कार ब्लास्ट
- फोटो : फाइल, अमर उजाला
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जम्मू-कश्मीर में पुलवामा हमले के बाद तय किया गया था कि सुरक्षाबलों का काफिला गुजरने के दौरान आम वाहनों की आवाजाही बंद रहेगी। बावजूद इसके बनिहाल में सीआरपीएफ काफिले में घुसकर दोबारा पुलवामा हमले जैसी साजिश दोहराई गई। इसे सुरक्षा में बहुत बड़ी चूक माना जा रहा है। यह तो संयोग कहा जाएगा कि हमलावर अपने मंसूबे में कामयाब नहीं हुए।
सूत्रों का कहना है कि श्रीनगर से सीआरपीएफ के 80 वाहनों का काफिला जम्मू के लिए निकला था। यह काफिला काजीगुंड से लेकर जवाहर टनल के आगे तक फैला हुआ था। अचानक से पीछे एक कार आई और सीआरपीएफ के काफिले में जा घुसी। ठीक उसी तरह जिस तरह से पुलवामा में हमला हुआ था। पुलवामा हमले के बाद केंद्रीय गृह मंत्रालय की तरफ से कई तरह के बदलाव किए गए थे।
फैसला लिया गया था कि जब भी जम्मू से श्रीनगर या श्रीनगर से जम्मू तक सुरक्षाबलों का काफिला जाएगी तो उस समय हाईवे पर आम वाहनों को आने-जाने की अनुमति नहीं दी जाएगी। बावजूद इसके सीआरपीएफ के काफिले में कार घुस गई और लगभग पुलवामा की तरह से धमाका हो गया। ऊपर वालों का रहम ही कहिए कि इस धमाके से जानमाल का नुकसान नहीं हुआ।
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चूक इसलिए भी है
लोकसभा चुनाव के लिए राजनीतिक दल पूरी तैयारी में लगे हैं। पूरा सुरक्षा अमला भी कश्मीर में चुनाव के लिए सक्रिय है। सुरक्षाबलों की तमाम खुफिया विंग की टीमें एक्टिव हैं। पुलवामा हमले के बाद करीब 10 हजार सुरक्षा बल कश्मीर भेजे गए। बावजूद इसके पुलवामा की तरह कार में धमाका कहीं न कहीं सुरक्षाबलों को खुली चुनौती है। इतना तंत्र सक्रिय रहने के बावजूद इसकी किसी को पहले भनक तक नहीं लगी।
जानबूझ कर चुना चिनाब घाटी
पिछले कुछ समय से चिनाब घाटी (डोडा, रामबन, किश्तवाड़) में आतंकवाद को दोबारा जिंदा करने की कोशिश की जा रही है। रामबन, किश्तवाड़ और डोडा इन तीनों ही जिलों में पिछले दो सालो से एक के बाद एक आतंकी हमले हुए हैं। चिनाब घाटी में आतंकी इस तरह का हमला करने के बाद यह संदेश देने की कोशिश में हैं, कि वह यहां भी पूरी सक्रियता से हैं।
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सूत्रों का कहना है कि श्रीनगर से सीआरपीएफ के 80 वाहनों का काफिला जम्मू के लिए निकला था। यह काफिला काजीगुंड से लेकर जवाहर टनल के आगे तक फैला हुआ था। अचानक से पीछे एक कार आई और सीआरपीएफ के काफिले में जा घुसी। ठीक उसी तरह जिस तरह से पुलवामा में हमला हुआ था। पुलवामा हमले के बाद केंद्रीय गृह मंत्रालय की तरफ से कई तरह के बदलाव किए गए थे।
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फैसला लिया गया था कि जब भी जम्मू से श्रीनगर या श्रीनगर से जम्मू तक सुरक्षाबलों का काफिला जाएगी तो उस समय हाईवे पर आम वाहनों को आने-जाने की अनुमति नहीं दी जाएगी। बावजूद इसके सीआरपीएफ के काफिले में कार घुस गई और लगभग पुलवामा की तरह से धमाका हो गया। ऊपर वालों का रहम ही कहिए कि इस धमाके से जानमाल का नुकसान नहीं हुआ।
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चूक इसलिए भी है
लोकसभा चुनाव के लिए राजनीतिक दल पूरी तैयारी में लगे हैं। पूरा सुरक्षा अमला भी कश्मीर में चुनाव के लिए सक्रिय है। सुरक्षाबलों की तमाम खुफिया विंग की टीमें एक्टिव हैं। पुलवामा हमले के बाद करीब 10 हजार सुरक्षा बल कश्मीर भेजे गए। बावजूद इसके पुलवामा की तरह कार में धमाका कहीं न कहीं सुरक्षाबलों को खुली चुनौती है। इतना तंत्र सक्रिय रहने के बावजूद इसकी किसी को पहले भनक तक नहीं लगी।
जानबूझ कर चुना चिनाब घाटी
पिछले कुछ समय से चिनाब घाटी (डोडा, रामबन, किश्तवाड़) में आतंकवाद को दोबारा जिंदा करने की कोशिश की जा रही है। रामबन, किश्तवाड़ और डोडा इन तीनों ही जिलों में पिछले दो सालो से एक के बाद एक आतंकी हमले हुए हैं। चिनाब घाटी में आतंकी इस तरह का हमला करने के बाद यह संदेश देने की कोशिश में हैं, कि वह यहां भी पूरी सक्रियता से हैं।