{"_id":"66dc13e9337250d6470b7a02","slug":"jammu-kashmir-assembly-election-2024-party-avoid-announcement-of-cm-face-small-parties-equation-2024-09-07","type":"feature-story","status":"publish","title_hn":"Jammu Election: बहुमत की अस्पष्टता, असंतोष का डर...CM चेहरे के एलान से बच रहीं पार्टी; छोटे दल होंगे किंगमेकर!","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
Jammu Election: बहुमत की अस्पष्टता, असंतोष का डर...CM चेहरे के एलान से बच रहीं पार्टी; छोटे दल होंगे किंगमेकर!
Sat, 07 Sep 2024 02:23 PM IST
शाहरुख खान
अमर उजाला नेटवर्क, जम्मू
अमर उजाला नेटवर्क, जम्मू
Published by: शाहरुख खान
Updated Sat, 07 Sep 2024 02:23 PM IST
सार
जम्मू-कश्मीर में विधानसभा के चुनावी अखाड़े का मंच सज चुका है। राजनीतिक दलों के नेता इस अखाड़े में उतर चुके हैं, लेकिन किसी भी दल ने अपनी तक अपने मुख्यमंत्री चेहरे का एलान नहीं किया है।
विज्ञापन
Jammu Kashmir Assembly Election
- फोटो : अमर उजाला
विस्तार
विधानसभा चुनाव का मैदान सज चुका है, लेकिन किसी भी दल ने अभी तक अपने मुख्यमंत्री चेहरे का एलान नहीं किया है। सभी दल बिना मुख्यमंत्री के चेहरे के चुनाव मैदान में हैं। प्रदेश में स्थापित राजनीतिक दल नेकां व पीडीपी जिनके नेता मुख्यमंत्री रह चुके हैं, ने भी मुख्यमंत्री का चेहरा घोषित नहीं किया है।
सीएम के चेहरे का एलान नहीं करने के पीछे बड़ा कारण यह माना जा रहा है कि पार्टियां जनादेश मिलने को लेकर स्पष्ट नहीं हैं। असंतोष का डर है। राजनीतिक माहिर कहते हैं कि अभी तक के परिदृश्य में जो भी पार्टी सरकार बनाना चाहेगी, उसे दूसरे का सहयोग लेना पड़ेगा।
पिछले दो विस चुनाव में ऐसा देखने को मिल चुका है। 2014 में भाजपा ने पीडीपी के साथ और 2008 में नेशनल कॉन्फ्रेंस ने कांग्रेस के साथ मिलकर सरकार बनाई थी। 2002 में कांग्रेस और पीडीपी ने मिलकर सरकार बनाई थी। पीडीपी इस बार भी किंगमेकर की भूमिका निभाने का दावा कर रही है। पूर्व में कांग्रेस और भाजपा को समर्थन दे चुकी पीडीपी का रुख इस बार भी अहम होगा।
विज्ञापन
राजनीतिक दल पहले किसी तरह से सरकार बनाने की स्थिति में आना चाहते हैं। यही कारण है कि भाजपा पीएम मोदी, कांग्रेस राहुल गांधी, नेशनल कॉन्फ्रेंस (नेकां) फारूक और पीपुल्स डेमोक्रेटिक पार्टी (पीडीपी) मुफ्ती के नाम पर जनता से वोट मांगती नजर आ रही है। छोटे दल किसी तरह कुछ सीट जीतकर किंगमेकर की भूमिका निभाने का जुगाड़ लगा रहे हैं। पूर्व सीएम गुलाम नबी आजाद तक अपना दल बनाकर आगे आने से कतरा रहे हैं।
विज्ञापन
सीएम के चेहरे का एलान नहीं करने के पीछे बड़ा कारण यह माना जा रहा है कि पार्टियां जनादेश मिलने को लेकर स्पष्ट नहीं हैं। असंतोष का डर है। राजनीतिक माहिर कहते हैं कि अभी तक के परिदृश्य में जो भी पार्टी सरकार बनाना चाहेगी, उसे दूसरे का सहयोग लेना पड़ेगा।
विज्ञापन
पिछले दो विस चुनाव में ऐसा देखने को मिल चुका है। 2014 में भाजपा ने पीडीपी के साथ और 2008 में नेशनल कॉन्फ्रेंस ने कांग्रेस के साथ मिलकर सरकार बनाई थी। 2002 में कांग्रेस और पीडीपी ने मिलकर सरकार बनाई थी। पीडीपी इस बार भी किंगमेकर की भूमिका निभाने का दावा कर रही है। पूर्व में कांग्रेस और भाजपा को समर्थन दे चुकी पीडीपी का रुख इस बार भी अहम होगा।
विज्ञापन
राजनीतिक दल पहले किसी तरह से सरकार बनाने की स्थिति में आना चाहते हैं। यही कारण है कि भाजपा पीएम मोदी, कांग्रेस राहुल गांधी, नेशनल कॉन्फ्रेंस (नेकां) फारूक और पीपुल्स डेमोक्रेटिक पार्टी (पीडीपी) मुफ्ती के नाम पर जनता से वोट मांगती नजर आ रही है। छोटे दल किसी तरह कुछ सीट जीतकर किंगमेकर की भूमिका निभाने का जुगाड़ लगा रहे हैं। पूर्व सीएम गुलाम नबी आजाद तक अपना दल बनाकर आगे आने से कतरा रहे हैं।
भाजपा के लिए मोदी ही सहारा
भारतीय जनता पार्टी पीएम मोदी और भाजपा सरकार के करवाए गए कामों के सहारे मैदान में है। हालांकि भाजपा की बिना सीएम चेहरे के चुनाव लड़ने की नीति रही है, ऐसे में जम्मू-कश्मीर में किसी चेहरे की चर्चा भी नहीं है। पार्टी के पास पूर्व उप मुख्यमंत्री कविंद्र गुप्ता, निर्मल सिंह, पांच वर्ष से अधिक समय से प्रदेश अध्यक्ष बने हुए रविंद्र रैना समेत कई पुराने चेहरे हैं। पार्टी प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और गृह मंत्री अमित शाह के चेहरों के सहारे चुनाव लड़ रही है। पार्टी के होर्डिंग तक में प्रदेश के नेताओं के चेहरे नहीं हैं। टिकट वितरण से पैदा हुए असंतोष के चलते भी पार्टी किसी एक चेहरे को सामने लाकर रिस्क नहीं लेना चाहती।
भारतीय जनता पार्टी पीएम मोदी और भाजपा सरकार के करवाए गए कामों के सहारे मैदान में है। हालांकि भाजपा की बिना सीएम चेहरे के चुनाव लड़ने की नीति रही है, ऐसे में जम्मू-कश्मीर में किसी चेहरे की चर्चा भी नहीं है। पार्टी के पास पूर्व उप मुख्यमंत्री कविंद्र गुप्ता, निर्मल सिंह, पांच वर्ष से अधिक समय से प्रदेश अध्यक्ष बने हुए रविंद्र रैना समेत कई पुराने चेहरे हैं। पार्टी प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और गृह मंत्री अमित शाह के चेहरों के सहारे चुनाव लड़ रही है। पार्टी के होर्डिंग तक में प्रदेश के नेताओं के चेहरे नहीं हैं। टिकट वितरण से पैदा हुए असंतोष के चलते भी पार्टी किसी एक चेहरे को सामने लाकर रिस्क नहीं लेना चाहती।
पीडीपी: पूर्व मुख्यमंत्री मैदान में ही नहीं उतरीं
पीडीपी अपने संस्थापक मुफ्ती मोहम्मद सईद के बिना पहला विधानसभा चुनाव लड़ रही है। पार्टी के बड़े नेता साथ छोड़ चुके हैं। महबूबा मुफ्ती खुद चुनाव नहीं लड़ रही हैं। हाल ही में संपन्न लोकसभा चुनाव में पार्टी को जनादेश वाले कश्मीर संभाग में आशा अनुरूप सफलता नहीं मिल पाई। वोट बैंक भी खिसका है। पार्टी अभी इस हार से बाहर नहीं निकल पाई है। महबूबा की बेटी इल्तिजा ने एक मोर्चा संभाल रखा है। इल्तिजा कह चुकी हैं कि सीएम के लिए वह चुनाव नहीं लड़ रही हैं। न ही उन्हें सीएम बनना है। ऐसे में पार्टी मुफ्ती मोहम्मद के चेहरे के साथ ही चुनाव लड़ रही है।
पीडीपी अपने संस्थापक मुफ्ती मोहम्मद सईद के बिना पहला विधानसभा चुनाव लड़ रही है। पार्टी के बड़े नेता साथ छोड़ चुके हैं। महबूबा मुफ्ती खुद चुनाव नहीं लड़ रही हैं। हाल ही में संपन्न लोकसभा चुनाव में पार्टी को जनादेश वाले कश्मीर संभाग में आशा अनुरूप सफलता नहीं मिल पाई। वोट बैंक भी खिसका है। पार्टी अभी इस हार से बाहर नहीं निकल पाई है। महबूबा की बेटी इल्तिजा ने एक मोर्चा संभाल रखा है। इल्तिजा कह चुकी हैं कि सीएम के लिए वह चुनाव नहीं लड़ रही हैं। न ही उन्हें सीएम बनना है। ऐसे में पार्टी मुफ्ती मोहम्मद के चेहरे के साथ ही चुनाव लड़ रही है।
बहुमत से कम सीटों पर लड़ रही कांग्रेस
कांग्रेस ने नेशनल कॉन्फ्रेंस के साथ गठबंधन किया है। पार्टी 31 सीटों पर चुनाव लड़ रही है जबकि बहुमत के लिए 44 सीटें चाहिए। चुनाव से ठीक पहले पार्टी ने प्रदेश अध्यक्ष विकार रसूल को बदल दिया और हामिद कर्रा के रूप में नया प्रदेश अध्यक्ष बनाया। पार्टी के पास अधिकतर पुराने चेहरे नहीं हैं। राजनीतिक विशेषज्ञों का मानना है कि पार्टी राहुल गांधी को चेहरा बनाकर ही लड़ना चाहती है। गठबंधन में दूसरे स्थान पर रहने के कारण पार्टी केवल उप मुख्यमंत्री का चेहरा मांग सकती है। सीएम कांग्रेस से होना संभव नहीं लग रहा है।
कांग्रेस ने नेशनल कॉन्फ्रेंस के साथ गठबंधन किया है। पार्टी 31 सीटों पर चुनाव लड़ रही है जबकि बहुमत के लिए 44 सीटें चाहिए। चुनाव से ठीक पहले पार्टी ने प्रदेश अध्यक्ष विकार रसूल को बदल दिया और हामिद कर्रा के रूप में नया प्रदेश अध्यक्ष बनाया। पार्टी के पास अधिकतर पुराने चेहरे नहीं हैं। राजनीतिक विशेषज्ञों का मानना है कि पार्टी राहुल गांधी को चेहरा बनाकर ही लड़ना चाहती है। गठबंधन में दूसरे स्थान पर रहने के कारण पार्टी केवल उप मुख्यमंत्री का चेहरा मांग सकती है। सीएम कांग्रेस से होना संभव नहीं लग रहा है।
नेकां गठबंधन की मजबूरी में, फारूक ही बड़ा चेहरा
नेशनल कॉन्फ्रेंस के उमर अब्दुल्ला पूर्व में मुख्यमंत्री रह चुके हैं। पार्टी का इतिहास रहा है कि परिवार के लोग ही सीएम बनते रहे हैं। बावजूद इसके पार्टी सीएम चेहरे का खुलकर एलान नहीं कर पाई है। राजनीतिक माहिरों का कहना है कि कभी हद तक लोग पार्टी में सीएम चेहरे तो जानते हैं लेकिन गठबंधन के कारण पार्टी की मजबूरी है कि वह मुख्यमंत्री के चहेरे को लेकर एलान नहीं कर सकती। हाल ही में संपन्न लोकसभा चुनाव में हार से उमर की साख को धक्का भी लगा है। पार्टी अब भी 80 वर्ष पार कर चुके फारूक अब्दुल्ला के सहारे चुनाव लड़ रही है। पार्टी की सभाओं में फारूक अब्दुल्ला ही एक मात्रा बड़ा चेहरा हैं।
नेशनल कॉन्फ्रेंस के उमर अब्दुल्ला पूर्व में मुख्यमंत्री रह चुके हैं। पार्टी का इतिहास रहा है कि परिवार के लोग ही सीएम बनते रहे हैं। बावजूद इसके पार्टी सीएम चेहरे का खुलकर एलान नहीं कर पाई है। राजनीतिक माहिरों का कहना है कि कभी हद तक लोग पार्टी में सीएम चेहरे तो जानते हैं लेकिन गठबंधन के कारण पार्टी की मजबूरी है कि वह मुख्यमंत्री के चहेरे को लेकर एलान नहीं कर सकती। हाल ही में संपन्न लोकसभा चुनाव में हार से उमर की साख को धक्का भी लगा है। पार्टी अब भी 80 वर्ष पार कर चुके फारूक अब्दुल्ला के सहारे चुनाव लड़ रही है। पार्टी की सभाओं में फारूक अब्दुल्ला ही एक मात्रा बड़ा चेहरा हैं।
छोटे दल भी किंगमेकर बनने की उम्मीद में
अपनी पार्टी, पीपुल्स कॉन्फ्रेंस, इत्तेहाद पार्टी, जमात ए इस्लामिया, डेमोक्रेटिक प्रोग्रेसिव आजाद पार्टी भी चुनाव मैदान में है। ये दल किंगमेकर के रूप में लड़ रहे हैं। इन दलों में सबसे चर्चित चेहरा पूर्व मुख्यमंत्री गुलाम नबी आजाद का है।
अपनी पार्टी, पीपुल्स कॉन्फ्रेंस, इत्तेहाद पार्टी, जमात ए इस्लामिया, डेमोक्रेटिक प्रोग्रेसिव आजाद पार्टी भी चुनाव मैदान में है। ये दल किंगमेकर के रूप में लड़ रहे हैं। इन दलों में सबसे चर्चित चेहरा पूर्व मुख्यमंत्री गुलाम नबी आजाद का है।
विधानसभा चुनाव में किसी भी पार्टी को बहुमत मिलने की उम्मीद नहीं है। सभी पार्टियों को इस बात का पता है। पार्टियां चाहती हैं कि ज्यादा से ज्यादा सीटें जीतकर जोड़-तोड़ से सरकार बना लें। दलों की यह मजबूरी है। यह सरकार किस पार्टी के साथ मिलकर बनेगी, ये भी तय नहीं है। इसलिए सीएम फेस का एलान करना किसी के लिए भी संभव नहीं है और ऐसा करना जल्दबाजी होगा। -रेखा चौधरी, रिटा. प्रोफेसर, (एचओडी राजनीतिक विज्ञान) जम्मू यूनिवर्सिटी
स्थानीय लीडरशिप के अभाव में फंसे दल
पीडीपी की महबूबा मुफ्ती और नेकां के उमर अब्दुल्ला चुनाव से पहले बोल रहे थे कि वे चुनाव नहीं लड़ेंगे। अब उमर अब्दुल्ला ने दो जगह से नामांकन भर दिया। महबूबा लोस चुनाव में हार चुकी हैं। भाजपा के पास देशभर में नरेंद्र मोदी और अमित शाह के अलावा कोई चेहरा नहीं रहता। रही बात कांग्रेस की तो वे 31 सीट पर लड़ रहे हैं, उनके पास भी राहुल के सिवाय स्थानीय स्तर पर लीडरशिप नहीं है। यही कारण हैं कि दल सीएम का चेहरा पेश नहीं कर पा रहे। इन्हें जनादेश का भी विश्वास नहीं। -प्रोफेसर अलोरा पूरी, राजनीति विभाग जम्मू यूनिवर्सिटी
पीडीपी की महबूबा मुफ्ती और नेकां के उमर अब्दुल्ला चुनाव से पहले बोल रहे थे कि वे चुनाव नहीं लड़ेंगे। अब उमर अब्दुल्ला ने दो जगह से नामांकन भर दिया। महबूबा लोस चुनाव में हार चुकी हैं। भाजपा के पास देशभर में नरेंद्र मोदी और अमित शाह के अलावा कोई चेहरा नहीं रहता। रही बात कांग्रेस की तो वे 31 सीट पर लड़ रहे हैं, उनके पास भी राहुल के सिवाय स्थानीय स्तर पर लीडरशिप नहीं है। यही कारण हैं कि दल सीएम का चेहरा पेश नहीं कर पा रहे। इन्हें जनादेश का भी विश्वास नहीं। -प्रोफेसर अलोरा पूरी, राजनीति विभाग जम्मू यूनिवर्सिटी