जम्मू-कश्मीर: जमात-ए इस्लामी टेरर फंडिंग में 16 स्थानों पर छापा, डिजिटल सबूत व अन्य आपत्तिजनक सामग्री बरामद
एनआईए के अधिकारी ने बताया कि जमात के सदस्यों और समर्थकों के 16 परिसरों की तलाशी ली गई। इसमें 11 कश्मीर घाटी के बारामुला जिले में और शेष 5 जम्मू क्षेत्र के किश्तवाड़ जिले में स्थित हैं।
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जमात-ए इस्लामी (जेईआई) टेरर फंडिंग मामले में राष्ट्रीय जांच एजेंसी (एनआईए) ने वीरवार को जम्मू-कश्मीर में 16 ठिकानों पर दबिश दी। इसमें कश्मीर में 11 तथा जम्मू संभाग के किश्तवाड़ में पांच स्थान शामिल हैं। इस कार्रवाई में डिजिटल सबूत के साथ ही कई आपत्तिजनक साक्ष्य हाथ लगे हैं।
एनआईए के एक अधिकारी ने बताया कि जमात के सदस्यों और समर्थकों के 16 परिसरों की तलाशी ली गई, जिनमें 11 कश्मीर घाटी के बारामुला जिले में और शेष 5 जम्मू क्षेत्र के किश्तवाड़ जिले में स्थित हैं। एनआईए ने प्रतिबंधित जमात-ए इस्लामी (जेईआई) की अलगाववादी गतिविधियों से जुड़े एक मामले में जम्मू-कश्मीर में टेरर फंडिंग पर अपनी कार्रवाई जारी रखते हुए कई स्थानों पर छापेमारी की।
उन्होंने बताया कि जमात पर प्रतिबंध के बाद भी जम्मू-कश्मीर में आतंकवादी गतिविधियों को अंजाम देता पाया गया है। एनआईए ने विशेष अदालत पटियाला हाउस, नई दिल्ली में 12 मई 2022 को चार आरोपियों के खिलाफ चार्जशीट दायर की थी। इससे पहले 5 फरवरी 2021 को इस मामले में स्वत: संज्ञान लेते हुए मामला दर्ज किया था।
जमात दान के पैसे का इस्तेमाल हिंसक घटनाओं में कर रहा
एनआईए की अब तक की जांच से पता चला है कि जमात के सदस्य दान के माध्यम से घरेलू और विदेश से धन एकत्र कर रहे थे। विशेष रूप से जकात, मोवदा और बैत-उल-माल के रूप में। यह सब धर्मार्थ उद्देश्यों, धर्म के प्रचार, शिक्षा और स्वास्थ्य के क्षेत्र में काम करने के लिए लिया जा रहा था।
इन सब कामों के बजाय इस फंड का इस्तेमाल जम्मू-कश्मीर में हिंसक और अलगाववादी गतिविधियों के लिए किया जा रहा था। उन्हें जमात कैडरों के सुसंगठित नेटवर्क के माध्यम से प्रतिबंधित आतंकवादी संगठनों हिजबुल मुजाहिदीन (एचएम), लश्कर-ए-ताइबा (एलईटी) और अन्य के लिए भी भेजा जा रहा था।
जमात प्रभावशाली युवाओं की भर्ती में जुटा था
उन्होंने बताया कि जमात कश्मीर के प्रभावशाली युवाओं को प्रेरित करने और हिंसक, विघटनकारी और अलगाववादी गतिविधियों को अंजाम देने के लिए जम्मू-कश्मीर में नए सदस्यों (रुकुन) की भर्ती करने में भी लगा हुआ था।
अधिकारी ने बताया कि एनआईए द्वारा की गई पिछली जांच से पता चला था कि गिरफ्तार किए गए चार आरोपियों में से एक जावेद अहमद लोन जमात-ए-इस्लामी जम्मू-कश्मीर के नाम पर धन की मांग कर रहा था और बैठकें आयोजित कर रहा था।
वह इन बैठकों में घृणास्पद, भारत-विरोधी भाषण देता था और लोगों को चंदा देने के लिए उकसाता था। उसने अन्य दो मंजूर अहमद डार और रमीज अहमद कोंडू से गलत इरादे से हथियार और गोला-बारूद भी हासिल किया था।