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Jammu News: जीएमसी की एमआरआई मशीन अब खराब हुई तो फिर प्राइवेट का ही रास्ता
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25 साल की हुई मशीन, व्यापक रखरखाव के लिए संबंधित कंपनी ने हाथ किए खड़े, संभाग के मरीजों पर बढ़ेगा एमआरआई का संकट
पहले ही महीनों की तिथि के बाद हो रहे टेस्ट, दस जिलों के लिए सरकारी स्तर पर अब एकमात्र मशीन बची
अमर उजाला ब्यूरो
जम्मू। जीएमसी जम्मू के रेडियोलाॅजी विभाग में एमआरआई (चुुंबकीय अनुनाद इमेजिंग) की एक मशीन की बुधवार को 25 साल हो गई है। वहीं, इसकी सीएमसी (व्यापक रखरखाव अनुबंध) के लिए संबंधित कंपनी ने मना कर दिया है। उनका कहना है कि 1999 में लगाई गई इस मशीन के स्पेयरपार्ट अब नहीं बनाए जा रहे हैं। अब भविष्य में अगर मशीन में कोई खराबी भी आई तो कबाड़ बनकर रह जाएगी।
इन परिस्थितियों में संभाग के दस जिलों के मरीजों के लिए सरकारी स्तर पर एमआरआई करवाने का संकट बढ़ जाएगा। अमूमन एमआरआई जैसी बड़ी मशीनों की उम्र 10 से 15 साल होती है। लेकिन, जीएमसी जम्मू में इस मशीन को किसी तरह से चलाया जा रहा था। इसकी कई बार सीएमसी कराई गई।
जीएमसी के रेडियोलाॅजी विभाग में दो एमआरआई मशीनें स्थापित हैं, जिनमें रोजाना 55 से 60 एमआरआई हो रही हैं। इनमें आधी एमआरआई सामान्य और आपात मामलों में की जा रही हैं। लेकिन, अब इस पुरानी मशीन में थोड़ी सी खराबी भी आई तो एमआरआई करवाने वाले मरीजों के लिए बड़ा संकट खड़ा हो जाएगा। क्योंकि, संभाग के अन्य अस्पतालों में कहीं भी सुविधा नहीं है।
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हालांकि, बाजार में सुविधा है, लेकिन इसके लिए मरीजों को टेस्ट के लिए कई गुणा अधिक शुल्क देना पड़ता है। जीएमसी में भी संभाग भर से मरीजों के लोड के कारण उन्हें एमआरआई टेस्ट के लिए तीन-चार माह या इससे अधिक समय बाद की तिथि दी जाती है। इससे ऐसे अधिकांश मरीज निजी निदान केंद्रों पर ही चले जाते हैं।
चार नए मेडिकल काॅलेजों में भी कोई एमआरआई मशीन नहीं
जम्मू संभाग में वर्ष 2017 के बाद से चार नए मेडिकल कॉलेज खोले गए हैं। इनमें जीएमसी राजोरी, जीएमसी डोडा, जीएमसी कठुआ और जीएमसी उधमपुर में वर्तमान में 100-100 एमबीबीएस छात्रों के बैच को पढ़ाया जा रहा है। लेकिन, कहीं भी एमआरआई का प्रावधान नहीं है। इससे न्यूरो, नेफरो, कार्डियोलाॅजी सहित अन्य विभागों के मरीजों को एमआरआई के लिए जीएमसी जम्मू आना पड़ रहा है।
नई मशीन के लिए खरीद की प्रक्रिया चल रही-प्रिंसिपल
जीएमसी जम्मू में एमआरआई की खरीद के लिए जम्मू कश्मीर मेडिकल सप्लाई कारपोरेशन लिमिटेड को प्रस्ताव भेजा गया है, लेकिन अभी मंजूरी नहीं मिली है। सभी तरह के टेस्ट के लिए मरीजों को हर संभव सुविधाएं मुहैया करवाई जा रही हैं।
- डॉ. आशुतोष गुप्ता, प्रिंसिपल, जीएमसी जम्मू
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पहले ही महीनों की तिथि के बाद हो रहे टेस्ट, दस जिलों के लिए सरकारी स्तर पर अब एकमात्र मशीन बची
अमर उजाला ब्यूरो
जम्मू। जीएमसी जम्मू के रेडियोलाॅजी विभाग में एमआरआई (चुुंबकीय अनुनाद इमेजिंग) की एक मशीन की बुधवार को 25 साल हो गई है। वहीं, इसकी सीएमसी (व्यापक रखरखाव अनुबंध) के लिए संबंधित कंपनी ने मना कर दिया है। उनका कहना है कि 1999 में लगाई गई इस मशीन के स्पेयरपार्ट अब नहीं बनाए जा रहे हैं। अब भविष्य में अगर मशीन में कोई खराबी भी आई तो कबाड़ बनकर रह जाएगी।
इन परिस्थितियों में संभाग के दस जिलों के मरीजों के लिए सरकारी स्तर पर एमआरआई करवाने का संकट बढ़ जाएगा। अमूमन एमआरआई जैसी बड़ी मशीनों की उम्र 10 से 15 साल होती है। लेकिन, जीएमसी जम्मू में इस मशीन को किसी तरह से चलाया जा रहा था। इसकी कई बार सीएमसी कराई गई।
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जीएमसी के रेडियोलाॅजी विभाग में दो एमआरआई मशीनें स्थापित हैं, जिनमें रोजाना 55 से 60 एमआरआई हो रही हैं। इनमें आधी एमआरआई सामान्य और आपात मामलों में की जा रही हैं। लेकिन, अब इस पुरानी मशीन में थोड़ी सी खराबी भी आई तो एमआरआई करवाने वाले मरीजों के लिए बड़ा संकट खड़ा हो जाएगा। क्योंकि, संभाग के अन्य अस्पतालों में कहीं भी सुविधा नहीं है।
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हालांकि, बाजार में सुविधा है, लेकिन इसके लिए मरीजों को टेस्ट के लिए कई गुणा अधिक शुल्क देना पड़ता है। जीएमसी में भी संभाग भर से मरीजों के लोड के कारण उन्हें एमआरआई टेस्ट के लिए तीन-चार माह या इससे अधिक समय बाद की तिथि दी जाती है। इससे ऐसे अधिकांश मरीज निजी निदान केंद्रों पर ही चले जाते हैं।
चार नए मेडिकल काॅलेजों में भी कोई एमआरआई मशीन नहीं
जम्मू संभाग में वर्ष 2017 के बाद से चार नए मेडिकल कॉलेज खोले गए हैं। इनमें जीएमसी राजोरी, जीएमसी डोडा, जीएमसी कठुआ और जीएमसी उधमपुर में वर्तमान में 100-100 एमबीबीएस छात्रों के बैच को पढ़ाया जा रहा है। लेकिन, कहीं भी एमआरआई का प्रावधान नहीं है। इससे न्यूरो, नेफरो, कार्डियोलाॅजी सहित अन्य विभागों के मरीजों को एमआरआई के लिए जीएमसी जम्मू आना पड़ रहा है।
नई मशीन के लिए खरीद की प्रक्रिया चल रही-प्रिंसिपल
जीएमसी जम्मू में एमआरआई की खरीद के लिए जम्मू कश्मीर मेडिकल सप्लाई कारपोरेशन लिमिटेड को प्रस्ताव भेजा गया है, लेकिन अभी मंजूरी नहीं मिली है। सभी तरह के टेस्ट के लिए मरीजों को हर संभव सुविधाएं मुहैया करवाई जा रही हैं।
- डॉ. आशुतोष गुप्ता, प्रिंसिपल, जीएमसी जम्मू