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Jammu News: जीएमसी में कैंसर मरीजों को लगाया एक्सपायरी ग्लूकोज
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तीमारदार की शिकायत पर बदली गईं बोतलें, रिएक्शन से बचे
अमर उजाला ब्यूरो
जम्मू। गवर्नमेंट मेडिकल कॉलेज (जीएमसी) जम्मू के कैंसर वार्ड में रविवार को दो मरीजों को एक्सपायरी डेट का डीएनएस ग्लूकोज लगा दिया गया। ग्लूकोज लगाने के कुछ ही देर बाद तीमारदारों को इसका पता चलने पर चिकित्सा स्टाफ से शिकायत की गई। जिसके बाद ग्लूकोज लगाए गए दो मरीजों की बोतलें बदल दी गईं।
इसके बाद अन्य स्टाक को भी हटा लिया गया। समय पर एक्सपायरी ग्लूकोज का पता चलने से मरीजों का रिएक्शन से बचाव हो गया। कैंसर वार्ड में मरीज शिवराम कैंसर को डीएनएस ग्लूकोज लगाया गया। वह कैंसर की चौथी स्टेज से पीड़ित हैं और बुजुर्ग हैं। उनके साथ आए तीमारदार ने जब ग्लूकोज बोतल पर नजर दौड़ाई तो पता चला कि वह एक्सपायरी हो चुका है। उसकी तिथि मार्च 2023 से लेकर फरवरी 2025 तक थी।
इसकी शिकायत तुरंत संबंधित स्टाफ से की गई। तब तक दो मरीजों को ग्लूकोज लगा दिया गया था। आनन फानन में दोनों के ग्लूकोज बदले गए और स्टाक से एक्सपायरी तिथि का ग्लूकोज हटाया गया।
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मैं खुद उक्त मरीज को देख रहा हूं। रविवार को वार्ड का भी दौरा किया, लेकिन उस समय तीमारदार ने इसकी शिकायत नहीं की। स्टाफ ने तुरंत एक्सपायरी तिथि के ग्लूकोज को बदल दिया था। अन्य ग्लूकोज के साथ एक डिब्बे में यह ग्लूकोज पहुंचा था और इसकी जांच कर रहे हैं। फरवरी में ही ग्लूकोज एक्सपायर हुआ है। ऐसे में कोई खतरा नहीं था। किसी भी ग्लूकोज के एक्सपायर होने से टाक्सिन नहीं होते हैं, बल्कि उसका प्रभाव थोड़ा कम हो जाता है।
- डा. आशुतोष गुप्ता, प्रिंसिपल, जीएमसी जम्मू
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अमर उजाला ब्यूरो
जम्मू। गवर्नमेंट मेडिकल कॉलेज (जीएमसी) जम्मू के कैंसर वार्ड में रविवार को दो मरीजों को एक्सपायरी डेट का डीएनएस ग्लूकोज लगा दिया गया। ग्लूकोज लगाने के कुछ ही देर बाद तीमारदारों को इसका पता चलने पर चिकित्सा स्टाफ से शिकायत की गई। जिसके बाद ग्लूकोज लगाए गए दो मरीजों की बोतलें बदल दी गईं।
इसके बाद अन्य स्टाक को भी हटा लिया गया। समय पर एक्सपायरी ग्लूकोज का पता चलने से मरीजों का रिएक्शन से बचाव हो गया। कैंसर वार्ड में मरीज शिवराम कैंसर को डीएनएस ग्लूकोज लगाया गया। वह कैंसर की चौथी स्टेज से पीड़ित हैं और बुजुर्ग हैं। उनके साथ आए तीमारदार ने जब ग्लूकोज बोतल पर नजर दौड़ाई तो पता चला कि वह एक्सपायरी हो चुका है। उसकी तिथि मार्च 2023 से लेकर फरवरी 2025 तक थी।
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इसकी शिकायत तुरंत संबंधित स्टाफ से की गई। तब तक दो मरीजों को ग्लूकोज लगा दिया गया था। आनन फानन में दोनों के ग्लूकोज बदले गए और स्टाक से एक्सपायरी तिथि का ग्लूकोज हटाया गया।
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मैं खुद उक्त मरीज को देख रहा हूं। रविवार को वार्ड का भी दौरा किया, लेकिन उस समय तीमारदार ने इसकी शिकायत नहीं की। स्टाफ ने तुरंत एक्सपायरी तिथि के ग्लूकोज को बदल दिया था। अन्य ग्लूकोज के साथ एक डिब्बे में यह ग्लूकोज पहुंचा था और इसकी जांच कर रहे हैं। फरवरी में ही ग्लूकोज एक्सपायर हुआ है। ऐसे में कोई खतरा नहीं था। किसी भी ग्लूकोज के एक्सपायर होने से टाक्सिन नहीं होते हैं, बल्कि उसका प्रभाव थोड़ा कम हो जाता है।
- डा. आशुतोष गुप्ता, प्रिंसिपल, जीएमसी जम्मू