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Jammu News: जीएमसी जम्मू में कोविड शहीदों के नाम बलिदान वाटिका स्थापित
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जीएमसी जम्मू की ओपीडी के साथ स्थापित बलिदान वाटिका। इसमें लोगों के बैठने के लिए बैंच और पौधे लग
मानव सेवा के लिए डा. रजत, रतना देवी, कृष्णा देवी और पवन कुमार ने कर दिए थे प्राण न्यौछावर
अमर उजाला ब्यूरो
जम्मू। कोविड में मानव सेवा के लिए अपने जीवन का बलिदान देने वाले चार चिकित्सा स्टाफ सदस्यों के नाम पर जीएमसी जम्मू में बलिदान वाटिका खोली गई है। अस्पताल परिसर में ओपीडी से सटी इस वाटिका में जीएमसी के शहीद कोविड स्टाफ डा. रजत महाजन (पीजी रेडियोडायग्नोसिस), रतना देवी (सहायक मेट्रन), कृष्णा देवी (सीनियर स्टाफ नर्स) और पवन कुमार (पुरुष स्टाफ नर्स) का नाम अंकित किया गया है। अस्पताल में आने वाले लोगों के लिए यह वाटिका कोविड शहीदों से प्रेरणा लेने के साथ उन्हें बैठने के लिए आरामदायक जगह उपलब्ध कराएगी।
गणतंत्र दिवस पर जीएमसी जम्मू के प्रिंसिपल डा. आशुतोष गुप्ता ने चिकित्सा स्टाफ के साथ बलिदान वाटिका में चारों शहीद स्टाफ सदस्यों को श्रद्धांजलि देते हुए उनकी सेवाओं को याद किया। इस दौरान शहीदों के परिवारवालों को सम्मानित किया गया। डा. गुप्ता ने कहा कि हम उम्र भर ऐसे कोविड योद्धाओं के ऋणी रहेंगे जिन्होंने अपनी जान की परवाह किए बिना मानव जीवन को बचाने में पहली प्राथमिकता दी। यह बलिदान वाटिका उनके अनमोल योगदान को हमेशा याद कराती रहेगी। जीएमसी जम्मू प्रदेश में पहला अस्पताल है, जहां कोविड शहीद चिकित्सा स्टाफ के लिए कोई वाटिका स्थापित की गई है।
शादी की सालगिरह पर पवन की गई थी जान
जीएमसी में सम्मान पाने पहुंचे दिवंगत पवन कुमार (एसआरओ-384 में कार्यरत) के पिता तारा चंद ने नम आंखों से बताया कि कोविड में मानव सेवा देते हुए उनके बेटे की 23 सितंबर 2020 को मौत हो गई थी। उस दिन उसकी शादी की तीसरी सालगिरह थी। वह कोविड ड्यूटी में लगा था और एक दिन घर आकर बीमार हो गया। उसे सांस लेने में तकलीफ हो रही थी। उसे घर के पास पीएचसी बरनाड़ा ले जाया गया लेकिन वहां से जीएमसी जम्मू में रेफर करते समय उसने रास्ते में ही दम तोड़ दिया। तब उसका बेटा कुछ ही महीने का था। उन्होंने जीएमसी प्रशासन द्वारा पवन को याद करने के लिए आभार जताया।
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जिस अस्पताल में सालों सेवा दी उसी में कृष्णा ने दम तोड़ दिया
जीएमसी जम्मू के मेडिसिन विभाग के आपात केंद्र में सालों सेवाएं देने वाली कृष्णा देवी को क्या पता था कि कोविड से उसकी उसी अस्पताल में मौत हो जाएगी। उनके पति नरेश शर्मा ने बताया कि कृष्णा अपने प्राण के प्रति समर्पित थी। कोविड के दौरान भी अपनी जान की परवाह किए बिना वह एक वीर योद्धा की तरह अपने काम पर डटी रही। वह आध्यात्मिक थी और अधिकांश व्रत रखी थी। जिससे शारीरिक रूप से थोड़ा कमजोर होने पर कोविड ने उसे घेर लिया। अचानक किडनी ने जवाब दे दिया, डायलिसिस हुए, लेकिन बचाया नहीं जा सका। वह अपने पीछे अपनी बेटी को छोड़ गई। इसी तरह रजत ने मानव सेवा के लिए युवा अवस्था में अपने जीवन का बलिदान दे दिया।
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अमर उजाला ब्यूरो
जम्मू। कोविड में मानव सेवा के लिए अपने जीवन का बलिदान देने वाले चार चिकित्सा स्टाफ सदस्यों के नाम पर जीएमसी जम्मू में बलिदान वाटिका खोली गई है। अस्पताल परिसर में ओपीडी से सटी इस वाटिका में जीएमसी के शहीद कोविड स्टाफ डा. रजत महाजन (पीजी रेडियोडायग्नोसिस), रतना देवी (सहायक मेट्रन), कृष्णा देवी (सीनियर स्टाफ नर्स) और पवन कुमार (पुरुष स्टाफ नर्स) का नाम अंकित किया गया है। अस्पताल में आने वाले लोगों के लिए यह वाटिका कोविड शहीदों से प्रेरणा लेने के साथ उन्हें बैठने के लिए आरामदायक जगह उपलब्ध कराएगी।
गणतंत्र दिवस पर जीएमसी जम्मू के प्रिंसिपल डा. आशुतोष गुप्ता ने चिकित्सा स्टाफ के साथ बलिदान वाटिका में चारों शहीद स्टाफ सदस्यों को श्रद्धांजलि देते हुए उनकी सेवाओं को याद किया। इस दौरान शहीदों के परिवारवालों को सम्मानित किया गया। डा. गुप्ता ने कहा कि हम उम्र भर ऐसे कोविड योद्धाओं के ऋणी रहेंगे जिन्होंने अपनी जान की परवाह किए बिना मानव जीवन को बचाने में पहली प्राथमिकता दी। यह बलिदान वाटिका उनके अनमोल योगदान को हमेशा याद कराती रहेगी। जीएमसी जम्मू प्रदेश में पहला अस्पताल है, जहां कोविड शहीद चिकित्सा स्टाफ के लिए कोई वाटिका स्थापित की गई है।
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शादी की सालगिरह पर पवन की गई थी जान
जीएमसी में सम्मान पाने पहुंचे दिवंगत पवन कुमार (एसआरओ-384 में कार्यरत) के पिता तारा चंद ने नम आंखों से बताया कि कोविड में मानव सेवा देते हुए उनके बेटे की 23 सितंबर 2020 को मौत हो गई थी। उस दिन उसकी शादी की तीसरी सालगिरह थी। वह कोविड ड्यूटी में लगा था और एक दिन घर आकर बीमार हो गया। उसे सांस लेने में तकलीफ हो रही थी। उसे घर के पास पीएचसी बरनाड़ा ले जाया गया लेकिन वहां से जीएमसी जम्मू में रेफर करते समय उसने रास्ते में ही दम तोड़ दिया। तब उसका बेटा कुछ ही महीने का था। उन्होंने जीएमसी प्रशासन द्वारा पवन को याद करने के लिए आभार जताया।
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जिस अस्पताल में सालों सेवा दी उसी में कृष्णा ने दम तोड़ दिया
जीएमसी जम्मू के मेडिसिन विभाग के आपात केंद्र में सालों सेवाएं देने वाली कृष्णा देवी को क्या पता था कि कोविड से उसकी उसी अस्पताल में मौत हो जाएगी। उनके पति नरेश शर्मा ने बताया कि कृष्णा अपने प्राण के प्रति समर्पित थी। कोविड के दौरान भी अपनी जान की परवाह किए बिना वह एक वीर योद्धा की तरह अपने काम पर डटी रही। वह आध्यात्मिक थी और अधिकांश व्रत रखी थी। जिससे शारीरिक रूप से थोड़ा कमजोर होने पर कोविड ने उसे घेर लिया। अचानक किडनी ने जवाब दे दिया, डायलिसिस हुए, लेकिन बचाया नहीं जा सका। वह अपने पीछे अपनी बेटी को छोड़ गई। इसी तरह रजत ने मानव सेवा के लिए युवा अवस्था में अपने जीवन का बलिदान दे दिया।