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Jammu News: स्मार्ट सिटी सर्वे के आधार पर कचरा शुल्क वसूली अप्रैल से
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2011 की जनगणना के अनुसार 1.20 लाख घरों से एकत्र हो रहा कचरा, स्मार्ट सिटी सर्वे में दो लाख का आंकड़ा
राजस्व बढ़ोतरी से सुधरेगी सफाई व्यवस्था, हो सकेगी वाहनों की खरीदारी
सतीश वालिया
जम्मू। अप्रैल माह से स्मार्ट सिटी सर्वे के हिसाब से कचरा शुल्क वसूलने की तैयारी है। मौजूदा समय में 2011 की जनगणना के हिसाब से 1.20 लाख घरों से कचरा एकत्रित किया जा रहा है। 2021-23 तक हुए स्मार्ट सिटी सर्वे में 1.60 लाख से ज्यादा घर चिह्नित किए गए हैं। इसके हिसाब से 40 हजार घरों से शुल्क नहीं आ रहा है। शहर की कालोनियों के शेड और झोपड़ियों में रहने वालों से भी अब शुल्क वसूला जाएगा। अभी तक यह आवास पंजीकृत नहीं है, मगर कचरा एकत्रित हो रहा है। इनमें शेड-झुग्गियों की संख्या में औसतन 40 हजार के आसपास हैं। कुल मिलाकर आवासों और शेड को मिलाकर दो लाख घर हैं। इनमें 2018 में जुड़े चार नए वार्डों के घर भी शामिल हैं।
अब इनसे भी शुल्क वसूलने की तैयारी है। शुल्क न आने का सीधा असर सरकारी खजाने पर पड़ रहा है। सफाई पर हर साल 18 से 20 करोड़ रुपये खर्च होते हैं। सीटीओ तलत महमूद के अनुसार वाहनों के माध्यम से कचरा ठिकाने लगाने में पांच करोड़ रुपये सालाना खर्च हो रहा है। इसके अलावा हेल्थ विंग के अधीन कर्मचारियों, मशीनरी पर 11 करोड़ खर्च होते हैं। कार्यक्रम और अन्य कामों में दो करोड़ अतिरिक्त खर्च होते हैं।
मगर शुल्क सालाना 14 करोड़ ही एकत्र होता है। ऐसे में नगर निगम को शहर का 400 एमटी कचरा ठिकाने लगाना मुश्किल हो रहा है। इसका सीधा असर वाहनों की खरीद पर भी पड़ रहा है। मौजूदा समय में नगर निगम के पास 120 के करीब छोटे बड़े वाहन है। नए वाहन खरीदने के लिए कई बार प्रस्ताव भेजे गए, लेकिन बजट न होने के कारण पुराने वाहनों से ही काम चलाया जा रहा है। अब अप्रैल माह से सर्वे के हिसाब से कचरा शुल्क वसूला जाएगा। इससे राजस्व 24 से 25 करोड़ रुपये के आसपास पहुंच जाएगा। जितना खर्च हो रहा है, उसे चार करोड़ रुपये तक ज्यादा शुल्क मिलेगा। इससे सफाई के लिए वाहन और अन्य सामग्री पर खर्च किया जा सकेगा। नगर निगम के अनुसार स्मार्ट सिटी सर्वे में घर ज्यादा है। इसी आधार पर सेट शुल्क वसूल किया जाएगा। शहर में सफाई बेहतर तरीके से करने पर काम जोरों पर है। हर घर से कचरा शुल्क लिया जाएगा। मार्च माह में वार्डों में जागरूकता के लिए शिविर भी लगाए जाएंगे।
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अब किरायेदारों, बंद घरों से भी वसूला जाएगा सफाई शुल्क
सर्वे में आवासीय घरों में कामर्शियल गतिविधियां चल रही है। एक लाख बीस हजार घरों में से 80 हजार से ज्यादा घरों में घर किराये पर दे रखे हैं। कुछ घरों में पांच से दस किरायेदार रह रहे हैं। यहां से भी शुल्क एक ही घर से आ रहा है। इनसे भी शुल्क अलग-अलग वसूला जाएगा। सर्वे के दौरान किराये के मकानों की सूची तैयार की गई है। इससे राजस्व पांच से छह करोड़ बढ़ोतरी होनी है।
20 हजार दुकानों से भी नहीं आता किराया
आवासीय परिसरों में 60 हजार से ज्यादा दुकानें हैं। इसके अलावा ढाबे, होटल, संस्थान भी शामिल हैं। मौजूदा समय में 20 हजार दुकानों से ही राजस्व मिल रहा है। इस कारण भी नगर निगम को काफी नुकसान हो रहा है। कुछ दुकानें गलियों में होने के कारण भी बच रहे हैं।
शहर में तमाम घरों से कचरा शुल्क वसूला जाएगा। 2011 की जनगणना के हिसाब से घरों को लिया गया है। स्मार्ट सिटी सर्वे में घर ज्यादा हैं। इसी आधार पर वसूली की जाएगी। शुल्क वसूल होने पर बेहतर ढंग सफाई की जा सकेगी।
- डा. विनोद शर्मा, स्वास्थ्य अधिकारी, नगर निगम
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राजस्व बढ़ोतरी से सुधरेगी सफाई व्यवस्था, हो सकेगी वाहनों की खरीदारी
सतीश वालिया
जम्मू। अप्रैल माह से स्मार्ट सिटी सर्वे के हिसाब से कचरा शुल्क वसूलने की तैयारी है। मौजूदा समय में 2011 की जनगणना के हिसाब से 1.20 लाख घरों से कचरा एकत्रित किया जा रहा है। 2021-23 तक हुए स्मार्ट सिटी सर्वे में 1.60 लाख से ज्यादा घर चिह्नित किए गए हैं। इसके हिसाब से 40 हजार घरों से शुल्क नहीं आ रहा है। शहर की कालोनियों के शेड और झोपड़ियों में रहने वालों से भी अब शुल्क वसूला जाएगा। अभी तक यह आवास पंजीकृत नहीं है, मगर कचरा एकत्रित हो रहा है। इनमें शेड-झुग्गियों की संख्या में औसतन 40 हजार के आसपास हैं। कुल मिलाकर आवासों और शेड को मिलाकर दो लाख घर हैं। इनमें 2018 में जुड़े चार नए वार्डों के घर भी शामिल हैं।
अब इनसे भी शुल्क वसूलने की तैयारी है। शुल्क न आने का सीधा असर सरकारी खजाने पर पड़ रहा है। सफाई पर हर साल 18 से 20 करोड़ रुपये खर्च होते हैं। सीटीओ तलत महमूद के अनुसार वाहनों के माध्यम से कचरा ठिकाने लगाने में पांच करोड़ रुपये सालाना खर्च हो रहा है। इसके अलावा हेल्थ विंग के अधीन कर्मचारियों, मशीनरी पर 11 करोड़ खर्च होते हैं। कार्यक्रम और अन्य कामों में दो करोड़ अतिरिक्त खर्च होते हैं।
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मगर शुल्क सालाना 14 करोड़ ही एकत्र होता है। ऐसे में नगर निगम को शहर का 400 एमटी कचरा ठिकाने लगाना मुश्किल हो रहा है। इसका सीधा असर वाहनों की खरीद पर भी पड़ रहा है। मौजूदा समय में नगर निगम के पास 120 के करीब छोटे बड़े वाहन है। नए वाहन खरीदने के लिए कई बार प्रस्ताव भेजे गए, लेकिन बजट न होने के कारण पुराने वाहनों से ही काम चलाया जा रहा है। अब अप्रैल माह से सर्वे के हिसाब से कचरा शुल्क वसूला जाएगा। इससे राजस्व 24 से 25 करोड़ रुपये के आसपास पहुंच जाएगा। जितना खर्च हो रहा है, उसे चार करोड़ रुपये तक ज्यादा शुल्क मिलेगा। इससे सफाई के लिए वाहन और अन्य सामग्री पर खर्च किया जा सकेगा। नगर निगम के अनुसार स्मार्ट सिटी सर्वे में घर ज्यादा है। इसी आधार पर सेट शुल्क वसूल किया जाएगा। शहर में सफाई बेहतर तरीके से करने पर काम जोरों पर है। हर घर से कचरा शुल्क लिया जाएगा। मार्च माह में वार्डों में जागरूकता के लिए शिविर भी लगाए जाएंगे।
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अब किरायेदारों, बंद घरों से भी वसूला जाएगा सफाई शुल्क
सर्वे में आवासीय घरों में कामर्शियल गतिविधियां चल रही है। एक लाख बीस हजार घरों में से 80 हजार से ज्यादा घरों में घर किराये पर दे रखे हैं। कुछ घरों में पांच से दस किरायेदार रह रहे हैं। यहां से भी शुल्क एक ही घर से आ रहा है। इनसे भी शुल्क अलग-अलग वसूला जाएगा। सर्वे के दौरान किराये के मकानों की सूची तैयार की गई है। इससे राजस्व पांच से छह करोड़ बढ़ोतरी होनी है।
20 हजार दुकानों से भी नहीं आता किराया
आवासीय परिसरों में 60 हजार से ज्यादा दुकानें हैं। इसके अलावा ढाबे, होटल, संस्थान भी शामिल हैं। मौजूदा समय में 20 हजार दुकानों से ही राजस्व मिल रहा है। इस कारण भी नगर निगम को काफी नुकसान हो रहा है। कुछ दुकानें गलियों में होने के कारण भी बच रहे हैं।
शहर में तमाम घरों से कचरा शुल्क वसूला जाएगा। 2011 की जनगणना के हिसाब से घरों को लिया गया है। स्मार्ट सिटी सर्वे में घर ज्यादा हैं। इसी आधार पर वसूली की जाएगी। शुल्क वसूल होने पर बेहतर ढंग सफाई की जा सकेगी।
- डा. विनोद शर्मा, स्वास्थ्य अधिकारी, नगर निगम