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Jammu News: नई बस्ती में फ्लाईओवर के निर्माण के सर्वे के लिए टीमें पहुंचने पर बवाल
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नई बस्ती में बवाल के बाद अधिकारियों से बात करते विधायक। संवाद
- फोटो : flyover survey, problem
स्थानीय दुकानदारों ने पुलिस की मौजूदगी में जताया विरोध, कहा-दुकानें तोड़नी ही हैं तो पहले पुनर्वास के इंतजाम किए जाएं
भाजपा के दो विधायक मौके पर पहुंचे, कल एनएचएआई और दूसरे अधिकारी के साथ बैठक, मौके का जायजा भी लेंगे
अमर उजाला ब्यूरो
जम्मू। नई बस्ती में मंगलवार की शाम को फ्लाईओवर के निर्माण के सर्वे के लिए राजस्व विभाग और एनएचएआई की टीमों के पुलिसबल के साथ पहुंचने पर बवाल हुआ। स्थानीय दुकानदारों ने इसका विरोध करते हुए कामकाज को बाधित किया।
उनका आरोप था कि उपराज्यपाल प्रशासन से फ्लाईओवर के निर्माण में उनकी दुकानें बचाने के लिए आश्वस्त किया गया है और इसके लिए निर्माण के डिजाइन में संशोधन भी किया गया था। लेकिन, अगर ऐसा नहीं होता है तो पहले उनके पुनर्वास के लिए इंतजाम किए जाएं। माहौल खराब होता देख भाजपा के दो विधायक मौके पर पहुंचे, जिसके बाद वीरवार को एनएचएआई और दूसरे संबंधित अधिकारियों के साथ बैठक कर जगह की स्थिति स्पष्ट की जाएगी। अधिकारी मौके का जायजा भी लेंगे
नई बस्ती में मंगलवार की शाम करीब सात बजे राजस्व विभाग और एनएचएआई के अधिकारी सर्वे के लिए पहुंचे। इसकी जानकारी मिलने पर सभी स्थानीय दुकानदार इकट्ठा हो गए और विरोध करने लगे। अधिकारियों ने तर्क दिया कि सर्विस रोड के लिए सर्वे किया जा रहा है। इस पर स्थानीय पूर्व पार्षद पवन सिंह ने कहा कि दुकानदारों को स्पष्ट किया जाए कि किसकी दुकानें तोड़नी हैं या नहीं। अगर फ्लाईओवर के डिजाइन में संशोधन किया गया था तो उसका मकसद इन दुकानों को तोड़ने से बचाना था। फिर ऐसी क्या नौबत आ गई है।
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अगर डिजाइन में कुछ दुकानों की जगह आ भी रही है तो वे खुद तोड़ने को तैयार हैं। लेकिन अगर ऐसा नहीं होता है तो पहले उनके पुुनर्वास के लिए उचित इंतजाम किए जाएं। सिंह ने कहा कि अगर निर्माण एजेंसी के लिए ट्रैफिक की समस्या हो रही है तो दुकानदार कुछ समय के लिए अपनी दुकानें बंद रखने को भी तैयार हैं। इस बीच बाहु विधानसभा के विधायक विक्रम रंधावा और आरएस पुरा-जम्मू दक्षिण के विधायक नरेंद्र सिंह ने मौके पर पहुंचकर एनएचएआई के अधिकारियों से बात की। इस पर फैसला लिया गया कि वीरवार को एनएचएआई और दूसरे संबंधित अधिकारी मौके पर आकर जायजा लेंगे और बैठक करके दुकानदारों को जगह के लिए स्थिति स्पष्ट करेंगे।
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उपराज्यपाल के पास पहुंचा था मामला
करीब छह माह पहले कुंजवानी से नई बस्ती तक फ्लाईओवर के निर्माण में सतवारी से नई बस्ती के बीच 70 दुकानों को लाने का विरोध हुआ था। दुकानदारों के भारी विरोध के बाद यह मामला उपराज्यपाल मनोज सिन्हा तक पहुंचा। जिसमें मुख्य सचिव, मंडलायुक्त आदि के हस्तक्षेप के बाद एक प्रस्ताव बनाकर उपराज्यपाल प्रशासन को भेजा गया। इसमें एनएचएआई की ओर से डिजाइन में संशोधन करके 32 दुकानों को निर्माण के दायरे से बाहर रखने की बात कही, जबकि 38 दुकानें निर्माण के दायरे में आ रही थीं। लेकिन आश्वस्त किया गया कि तोड़ी जाने वाली सभी दुकानों के लिए दुकानदारों का पहले पुनर्वास किया जाएगा। इसके लिए उन्हें दूसरी जगह दुकानें अलाट होंगी। यह सारा घटनाक्रम विधानसभा चुनाव से पहले हुआ और चुनाव घोषित हो जाने पर यह मामला लटक गया। जिसके बाद फिर फ्लाईओवर के निर्माण में दुकानों के आने का विरोध शुरू हो गया है।
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दुकानदारों का बेवजह नुकसान न हो : विधायक
विधायक विक्रम रंधावा ने कहा कि हम चाहते हैं कि कई दशकों से कारोबार कर रहे स्थानीय दुकानदारों को बेवजह कोई नुकसान न हो। इसके लिए उपराज्यपाल ने खुद आश्वस्त किया है। हमने संबंधित अधिकारियों से बोला है कि वे खुद मौके पर आकर दुकानदारों से स्पष्ट करें कि कितनी दुकानें निर्माण में आएंगी और उनका क्या विकल्प होगा। वीरवार को बैठक होगी।
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भाजपा के दो विधायक मौके पर पहुंचे, कल एनएचएआई और दूसरे अधिकारी के साथ बैठक, मौके का जायजा भी लेंगे
अमर उजाला ब्यूरो
जम्मू। नई बस्ती में मंगलवार की शाम को फ्लाईओवर के निर्माण के सर्वे के लिए राजस्व विभाग और एनएचएआई की टीमों के पुलिसबल के साथ पहुंचने पर बवाल हुआ। स्थानीय दुकानदारों ने इसका विरोध करते हुए कामकाज को बाधित किया।
उनका आरोप था कि उपराज्यपाल प्रशासन से फ्लाईओवर के निर्माण में उनकी दुकानें बचाने के लिए आश्वस्त किया गया है और इसके लिए निर्माण के डिजाइन में संशोधन भी किया गया था। लेकिन, अगर ऐसा नहीं होता है तो पहले उनके पुनर्वास के लिए इंतजाम किए जाएं। माहौल खराब होता देख भाजपा के दो विधायक मौके पर पहुंचे, जिसके बाद वीरवार को एनएचएआई और दूसरे संबंधित अधिकारियों के साथ बैठक कर जगह की स्थिति स्पष्ट की जाएगी। अधिकारी मौके का जायजा भी लेंगे
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नई बस्ती में मंगलवार की शाम करीब सात बजे राजस्व विभाग और एनएचएआई के अधिकारी सर्वे के लिए पहुंचे। इसकी जानकारी मिलने पर सभी स्थानीय दुकानदार इकट्ठा हो गए और विरोध करने लगे। अधिकारियों ने तर्क दिया कि सर्विस रोड के लिए सर्वे किया जा रहा है। इस पर स्थानीय पूर्व पार्षद पवन सिंह ने कहा कि दुकानदारों को स्पष्ट किया जाए कि किसकी दुकानें तोड़नी हैं या नहीं। अगर फ्लाईओवर के डिजाइन में संशोधन किया गया था तो उसका मकसद इन दुकानों को तोड़ने से बचाना था। फिर ऐसी क्या नौबत आ गई है।
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अगर डिजाइन में कुछ दुकानों की जगह आ भी रही है तो वे खुद तोड़ने को तैयार हैं। लेकिन अगर ऐसा नहीं होता है तो पहले उनके पुुनर्वास के लिए उचित इंतजाम किए जाएं। सिंह ने कहा कि अगर निर्माण एजेंसी के लिए ट्रैफिक की समस्या हो रही है तो दुकानदार कुछ समय के लिए अपनी दुकानें बंद रखने को भी तैयार हैं। इस बीच बाहु विधानसभा के विधायक विक्रम रंधावा और आरएस पुरा-जम्मू दक्षिण के विधायक नरेंद्र सिंह ने मौके पर पहुंचकर एनएचएआई के अधिकारियों से बात की। इस पर फैसला लिया गया कि वीरवार को एनएचएआई और दूसरे संबंधित अधिकारी मौके पर आकर जायजा लेंगे और बैठक करके दुकानदारों को जगह के लिए स्थिति स्पष्ट करेंगे।
उपराज्यपाल के पास पहुंचा था मामला
करीब छह माह पहले कुंजवानी से नई बस्ती तक फ्लाईओवर के निर्माण में सतवारी से नई बस्ती के बीच 70 दुकानों को लाने का विरोध हुआ था। दुकानदारों के भारी विरोध के बाद यह मामला उपराज्यपाल मनोज सिन्हा तक पहुंचा। जिसमें मुख्य सचिव, मंडलायुक्त आदि के हस्तक्षेप के बाद एक प्रस्ताव बनाकर उपराज्यपाल प्रशासन को भेजा गया। इसमें एनएचएआई की ओर से डिजाइन में संशोधन करके 32 दुकानों को निर्माण के दायरे से बाहर रखने की बात कही, जबकि 38 दुकानें निर्माण के दायरे में आ रही थीं। लेकिन आश्वस्त किया गया कि तोड़ी जाने वाली सभी दुकानों के लिए दुकानदारों का पहले पुनर्वास किया जाएगा। इसके लिए उन्हें दूसरी जगह दुकानें अलाट होंगी। यह सारा घटनाक्रम विधानसभा चुनाव से पहले हुआ और चुनाव घोषित हो जाने पर यह मामला लटक गया। जिसके बाद फिर फ्लाईओवर के निर्माण में दुकानों के आने का विरोध शुरू हो गया है।
दुकानदारों का बेवजह नुकसान न हो : विधायक
विधायक विक्रम रंधावा ने कहा कि हम चाहते हैं कि कई दशकों से कारोबार कर रहे स्थानीय दुकानदारों को बेवजह कोई नुकसान न हो। इसके लिए उपराज्यपाल ने खुद आश्वस्त किया है। हमने संबंधित अधिकारियों से बोला है कि वे खुद मौके पर आकर दुकानदारों से स्पष्ट करें कि कितनी दुकानें निर्माण में आएंगी और उनका क्या विकल्प होगा। वीरवार को बैठक होगी।