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Hindi News ›   Jammu and Kashmir ›   Jammu News ›   Jammu election My ideology is different from Afzal says brother Ejaz Ahmed in an exclusive interview

Interview: 'भाई से मेरी विचारधारा अलग, चुनाव के बाद फातिया पढ़ने जाऊंगा'; खास बातचीत में बोले अफजल गुरु के भाई

Sat, 28 Sep 2024 02:30 PM IST
शाहरुख खान राहुल दुबे, अमर उजाला, जम्मू
राहुल दुबे, अमर उजाला, जम्मू Published by: शाहरुख खान Updated Sat, 28 Sep 2024 02:30 PM IST
सार

अफजल गुरु के भाई एजाज अहमद गुरु ने कहा कि पीडीपी, नेकां और इंजीनियर रशीद अनुच्छेद 370 पर आवाम को बहका रहे हैं। ये लोग इसे वापस नहीं ला सकते। 

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Jammu election My ideology is different from Afzal says brother Ejaz Ahmed in an exclusive interview
अफजल गुरु के भाई एजाज अहमद गुरु - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

अफजल गुरु के भाई एजाज अहमद गुरु सोपोर विधानसभा से चुनावी मैदान में हैं। अनुच्छेद 370 पर कहते हैं कि इसे हटाना गलत है। अगले ही पल कहते हैं कि अब ये सब कुरेदने से क्या फायदा, यही सब कुरेदेंगे तो कश्मीर का, यहां के युवाओं का व गरीबों का भविष्य कौन देखेगा। 
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अफजल गुरु से अपनी विचारधारा अलग बताते हैं लेकिन कहते हैं चुनाव के बाद तिहाड़ जाऊंगा और भाई की कब्र पर फातिया पढ़ूंगा। इसके लिए गृह मंत्रालय से भी गुजारिश करुंगा और कोर्ट के रास्ते से भी इजाजत लूंगा। कई अन्य मुद्दों पर राहुल दुबे से हुई उनकी बातचीत के अंश....
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सवाल : अब तक आप, आपके साथी चुनाव का विरोध करते थे, अब मैदान में हैं?
जवाब : देखो, अपने पास बड़े लोगों की तरह झंडे-डंडे तो हैं नहीं। न कोई तामझाम है। 8-10 बंदों के साथ गली-गली जा रहे हैं। लोगों से मिल रहे हैं। 1987 के चुनाव में क्या हुआ सब जानते हैं। उसके बाद उग्रवाद शुरू हुआ और तभी से कश्मीर पर काला साया छाया। ज्यादा कुछ नहीं कहूंगा, उसके बाद ही विरोध शुरू हुआ।
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सवाल : कभी हुर्रियत के बड़े नेता आपके साथ थे, अब आपके खिलाफ चुनाव लड़ रहे हैं?
जवाब : मैं अलगाववादी विचारधारा व हुर्रियत से अलग हूं। दूसरी बात, कोई भी हो मुझे सोपोर की जनता पर यकीन है। गरीब आवाम के साथ यहां बहुत गलत हुआ है। 35 साल तक हड़ताल ही रही। पत्थरबाजी होती थी। इसे सबसे अधिक झेला है यहां के गरीबों ने, युवाओं ने। गरीब और गरीब होते चले गए, इसके जिम्मेदार हैं यहां के बड़े सियासतदान। मैं गरीबों के लिए लड़ रहा हूं, अमीरों के लिए नहीं।

सवाल : लोग आपको ही क्यों चुनें, बाकी को क्यों नहीं?
जवाब : क्योंकि मैं ही सिर्फ काम करना चाहता हूं। मैंने सोपोर में रहकर 35 साल हड़ताल देखी है। मैंने यहां लोगों के घर उजड़ते देखे हैं। मुझे वोट की कीमत पता है। मैं लोगों को भी इसकी कीमत समझा रहा हूं। मैं लोगों के विकास, उनकी बुनियादी समस्याओं के हल के लिए लड़ रहा हूं।
 

सवाल : लोग कह रहे हैं कि आप बेटे को जेल से बाहर लाने के लिए चुनाव लड़ रहे हैं?
जवाब : बेटे को पुलिस ने गलत केस में जेल में डाला है। जमीन का मसला था और उसे कुछ और ही बना दिया। उसे कानूनी प्रक्रिया के तहत बाहर ले आऊंगा। कोर्ट में साबित कर दूंगा कि वह बेगुनाह है। मैं तो सरकार से भी कहता हूं कि जो बेगुनाह युवा जेलों में गए हैं उन्हें रिहा करो। अब तक पॉलिसी ही अच्छी नहीं रही, अभी ठीक है, तो मैं भी चुनाव लड़ रहा हूं।
 

सवाल : हड़ताल करने वाले भी तो सोपोर के ही लोग थे न?
जवाब: बिल्कुल नहीं। सोपोर के लोग, आम लोग, आम कश्मीरी सीधे व सरल लोग हैं। इन्हें अपने काम-धंधे से मतलब है। सियासत में यहां का आम आदमी पिसता रहा है। किसी नेता ने इनकी चिंता नहीं की। इन्हें बरगलाया, रोज नए-नए नारे दिए और इनसे पत्थरबाजी करवाई। जैसे आज फिर उमर साहब, फारूक साहब, महबूबा मुफ्ती और इंजीनियर साहब बरगला रहे हैं कि हम 370 वापस ले आएंगे। इंजीनियर साहब को अपना नहीं पता कि चुनाव के बाद क्या होगा। कश्मीर के लोगों को उनके तरीके से जीने दो। यह ऋषियों, फकीरों की धरती है। इसको सबने लूटा है, लेकिन अब छोड़ दो।

सवाल : आप भी तो अनुच्छेद 370 के हिमायती हैं, आप क्या कहते हैं इस पर?
जवाब : हां पक्षकार हूं, यह भी कहता हूं कि यह गलत हुआ। इसे नहीं हटाया जाना चाहिए था। अब यह हट गया। सब जानते हैं, वापस नहीं आ सकता। लोगों को बस बहलाया-फुसलाया जा रहा है। मैं ऐसा नहीं कर सकता। मैं इतना बड़ा नेता नहीं हूं। हां प्रधानमंत्री ने कहा है कि वह पूर्ण राज्य का दर्जा देंगे, उस वादे को वह पूरा करें।

सवाल : अफजल गुरु के नाम का फायदा मिल रहा है क्या राजनीति में?
जवाब : अफजल का नाम राजनीति में क्यों लाना। उसका नजरिया, विचारधारा अलग थी, मेरी अलग है। मैं चुनाव एक संदेश देने के लिए लड़ रहा हूं। खोखले वादे देकर नहीं लड़ रहा। हां अफजल मेरा भाई था। मेरे जज्बाती रिश्ते तो हैं और हमेशा रहेंगे।


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