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Jammu News: एआई की मदद से छात्रों का होगा व्यक्तिगत आकलन, उसी हिसाब मिलेगी पाठन सामग्री
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स्कूल शिक्षा विभाग के कामकाज की समीक्षा करते मुख्स सचिव व अन्य फोटाो सूचना विभाग
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शिक्षा में उत्कृष्टता प्राप्त करने के लिए स्कूलों के आधुनिक बदलाव की तैयारी
अमर उजाला ब्यूरो
जम्मू। स्कूल शिक्षा विभाग बच्चों के शिक्षा स्तर में सुधार के लिए आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (एआई) की मदद लेगा। एआई-आधारित शिक्षण मॉड्यूल की मदद से छात्रों का व्यक्तिगत आकलन होगा, जिससे उनकी विषय में कमजोरी का पता लगाकर उसमें सुधार पर काम किया जाएगा। इसका उद्देश्य सरकारी स्कूल में पढ़ने वाले बच्चों के शिक्षा स्तर में सकारात्मक बदलाव लाना है।
इस संबंध मुख्य सचिव अटल डुल्लू की अध्यक्षता में एक बैठक हुई, जिसमें स्कूल शिक्षा विभाग के कामकाज की समीक्षा की गई। उन्होंने स्कूल शिक्षा विभाग एआई-आधारित शिक्षण मॉड्यूल विकसित करने को कहा। इसके लिए तकनीकी मदद भास्कराचार्य राष्ट्रीय अंतरिक्ष अनुप्रयोग और भू-सूचना विज्ञान संस्थान (बीआईएसएजी-एन) से लेने का सुझाव दिया।
सरकारी व निजी प्राइमरी और मिडिल स्कूल में नामांकन की जानकारी ली। सरकारी स्कूलों में छात्रों के नामांकन में ठहराव पर चिंता जताई। उन्होंने कहा कि निजी के मुकाबले तीन गुना ज्यादा सरकारी प्राइमरी स्कूल है, लेकिन नामांकन लगभग समान हैं। विभाग को हर स्कूल में डैशबोर्ड बनाने का निर्देश दिया। इससे कक्षा-वार छात्र नामांकन, शिक्षकों की उपलब्धता, मूल्यांकन के परिणाम व बुनियादी ढांचे का डेटा शामिल हो।
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मुख्य सचिव ने स्कूलों में विषयवार लेक्चररों को तैनात को यकीनी बनाने को कहा। स्कूल शिक्षा विभाग के अतिरिक्त मुख्य सचिव शांतमनु ने बताया कि प्रदेश में 396 पीएम श्री स्कूल हैं। 45 अटल टिंकरिंग लैब, 159 स्टेम लैब और 188 रोबोटिक्स लैब की स्थापना की जा रही हैं।
विद्या समीक्षा केंद्र टीचर्स भवन में तैयार किया जा रहा है। जेके अटेंडेंस एप, पैरेंट पल्स बॉट और स्मार्ट अटेंडेंस सिस्टम जैसे निगरानी और फीडबैक तंत्र बढ़ा है। जिलों में 74 फीसदी स्कूलों ने स्मार्ट अटेंडेंस सिस्टम है। 1.14 लाख से अधिक कर्मचारी इस एप से हाजरी दर्ज कराते हैं। 2024-25 में 94.8 करोड़ रुपये की लागत से 980 कार्य पूरे किए गए। 2025-26 तक सभी हायर सेकेंडरी स्कूलों में आईसीटी लैब और स्मार्ट क्लासरूम की सुविधा होगी।
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1,350 स्कूलों में दी जा रही कौशल शिक्षा
89 कस्तूरबा गांधी बालिका विद्यालय हैं, जिनमें 5,012 छात्राएं नामांकित हैं। 85 स्वीकृत गर्ल्स हॉस्टल में 41 का काम पूरा हो चुके हैं। 22 का अगस्त 2025 तक पूरा करने का लक्ष्य है। 25 अतिरिक्त छात्रावासों की स्थापना की जानी है। 1,350 स्कूलों में कौशल शिक्षा दी जा रही हैं। 15 व्यावसायिक ट्रेडों में 1.41 लाख से अधिक छात्र नामांकित हैं। 17,901 विशेष आवश्यकता वाले बच्चों को स्कूलों में दाखिला दिया गया हैं। वहीं विशेष आवश्यकता वाले 4,990 छात्रों को सहायक उपकरण दिए हैं। 1335 व्यावसायिक प्रयोगशालाएं स्थापित की गईं और जून 2025 तक 1915 और स्थापित की जाएंगी।
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15500 स्कूलों में प्री-प्राइमरी कक्षाएं
नई शिक्षा नीति (एनईपी) 2020 के क्रियान्वयन के तहत 15,550 स्कूलों में प्री-प्राइमरी कक्षाएं शुरू की गईं हैं। इन छात्रों के लिए फुलवारी गतिविधि पुस्तकें विकसित की गईं। विद्या प्रवेश मॉड्यूल के तहत 16,000 शिक्षकों को फाउंडेशनल लिटरेसी एंड न्यूमेरेसी में प्रशिक्षित किया गया है। एससीईआरटी जम्मू-कश्मीर ने राष्ट्रीय डिजिटल लाइब्रेरी के लिए उर्दू और डोगरी भाषा सामग्री, खिलौना-आधारित शिक्षण मार्गदर्शिका और गैर-शैक्षणिक पुस्तकें विकसित की है।
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अमर उजाला ब्यूरो
जम्मू। स्कूल शिक्षा विभाग बच्चों के शिक्षा स्तर में सुधार के लिए आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (एआई) की मदद लेगा। एआई-आधारित शिक्षण मॉड्यूल की मदद से छात्रों का व्यक्तिगत आकलन होगा, जिससे उनकी विषय में कमजोरी का पता लगाकर उसमें सुधार पर काम किया जाएगा। इसका उद्देश्य सरकारी स्कूल में पढ़ने वाले बच्चों के शिक्षा स्तर में सकारात्मक बदलाव लाना है।
इस संबंध मुख्य सचिव अटल डुल्लू की अध्यक्षता में एक बैठक हुई, जिसमें स्कूल शिक्षा विभाग के कामकाज की समीक्षा की गई। उन्होंने स्कूल शिक्षा विभाग एआई-आधारित शिक्षण मॉड्यूल विकसित करने को कहा। इसके लिए तकनीकी मदद भास्कराचार्य राष्ट्रीय अंतरिक्ष अनुप्रयोग और भू-सूचना विज्ञान संस्थान (बीआईएसएजी-एन) से लेने का सुझाव दिया।
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सरकारी व निजी प्राइमरी और मिडिल स्कूल में नामांकन की जानकारी ली। सरकारी स्कूलों में छात्रों के नामांकन में ठहराव पर चिंता जताई। उन्होंने कहा कि निजी के मुकाबले तीन गुना ज्यादा सरकारी प्राइमरी स्कूल है, लेकिन नामांकन लगभग समान हैं। विभाग को हर स्कूल में डैशबोर्ड बनाने का निर्देश दिया। इससे कक्षा-वार छात्र नामांकन, शिक्षकों की उपलब्धता, मूल्यांकन के परिणाम व बुनियादी ढांचे का डेटा शामिल हो।
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मुख्य सचिव ने स्कूलों में विषयवार लेक्चररों को तैनात को यकीनी बनाने को कहा। स्कूल शिक्षा विभाग के अतिरिक्त मुख्य सचिव शांतमनु ने बताया कि प्रदेश में 396 पीएम श्री स्कूल हैं। 45 अटल टिंकरिंग लैब, 159 स्टेम लैब और 188 रोबोटिक्स लैब की स्थापना की जा रही हैं।
विद्या समीक्षा केंद्र टीचर्स भवन में तैयार किया जा रहा है। जेके अटेंडेंस एप, पैरेंट पल्स बॉट और स्मार्ट अटेंडेंस सिस्टम जैसे निगरानी और फीडबैक तंत्र बढ़ा है। जिलों में 74 फीसदी स्कूलों ने स्मार्ट अटेंडेंस सिस्टम है। 1.14 लाख से अधिक कर्मचारी इस एप से हाजरी दर्ज कराते हैं। 2024-25 में 94.8 करोड़ रुपये की लागत से 980 कार्य पूरे किए गए। 2025-26 तक सभी हायर सेकेंडरी स्कूलों में आईसीटी लैब और स्मार्ट क्लासरूम की सुविधा होगी।
1,350 स्कूलों में दी जा रही कौशल शिक्षा
89 कस्तूरबा गांधी बालिका विद्यालय हैं, जिनमें 5,012 छात्राएं नामांकित हैं। 85 स्वीकृत गर्ल्स हॉस्टल में 41 का काम पूरा हो चुके हैं। 22 का अगस्त 2025 तक पूरा करने का लक्ष्य है। 25 अतिरिक्त छात्रावासों की स्थापना की जानी है। 1,350 स्कूलों में कौशल शिक्षा दी जा रही हैं। 15 व्यावसायिक ट्रेडों में 1.41 लाख से अधिक छात्र नामांकित हैं। 17,901 विशेष आवश्यकता वाले बच्चों को स्कूलों में दाखिला दिया गया हैं। वहीं विशेष आवश्यकता वाले 4,990 छात्रों को सहायक उपकरण दिए हैं। 1335 व्यावसायिक प्रयोगशालाएं स्थापित की गईं और जून 2025 तक 1915 और स्थापित की जाएंगी।
15500 स्कूलों में प्री-प्राइमरी कक्षाएं
नई शिक्षा नीति (एनईपी) 2020 के क्रियान्वयन के तहत 15,550 स्कूलों में प्री-प्राइमरी कक्षाएं शुरू की गईं हैं। इन छात्रों के लिए फुलवारी गतिविधि पुस्तकें विकसित की गईं। विद्या प्रवेश मॉड्यूल के तहत 16,000 शिक्षकों को फाउंडेशनल लिटरेसी एंड न्यूमेरेसी में प्रशिक्षित किया गया है। एससीईआरटी जम्मू-कश्मीर ने राष्ट्रीय डिजिटल लाइब्रेरी के लिए उर्दू और डोगरी भाषा सामग्री, खिलौना-आधारित शिक्षण मार्गदर्शिका और गैर-शैक्षणिक पुस्तकें विकसित की है।