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Jammu News: बागवानी विभाग के प्रधान सहायक के पद पर पदोन्नति पर रोक
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कैट ने याचिका की सुनवाई के दौरान जारी किया नोटिस
आठ सप्ताह में जवाब दाखिल करने के निर्देश
जम्मू। केंद्रीय प्रशासनिक न्यायाधिकरण (कैट) श्रीनगर की एक खंडपीठ ने बागवानी विभाग को प्रधान सहायक के पद पर पदोन्नति देने पर रोक लगा दी है। यह कदम याचिका की सुनवाई के दौरान दोनों पक्षों की दलीलें सुनने के बाद उठाया है। साथ ही नोटिस कर जवाब आठ सप्ताह में दाखिल करने के निर्देश दिए हैं।
याचिकाकर्ता ने राहत के लिए गैर-आवेदकों को निर्देश जारी करने की मांग की है। इसमें कहा कि एसआरओ-124 को 1982 में 19 अप्रैल को जारी किया गया। इसमें प्रधान सहायक का पद उस श्रेणी में कम से कम 4 वर्ष की सेवा और सचिवालय परीक्षा उत्तीर्ण करने वाले व्यक्तियों में से से पदोन्नति द्वारा भरा जाए।
गैर-आवेदकों को निर्देश दिया जाए कि वे गैर-आवेदक संख्या 4 को प्रधान सहायक के पद पर पदोन्नत न करें। ये 1982 के एसआरओ-124 के तहत निर्धारित पूर्व-आवश्यकता को पूरा नहीं करता है। कैट ने पाया कि याचिकाकर्ता को 2004 में आदेश संख्या के तहत बागवानी विभाग (पीएंडएम) में कनिष्ठ सहायक के रूप में नियुक्त किया गया था। आगे कहा गया है कि कनिष्ठ सहायक के रूप में 16 वर्ष से अधिक की सेवा पूरी करने के बाद, याचिकाकर्ता को आदेश संख्या के तहत वरिष्ठ सहायक के पद पर पदोन्नत किया गया था। मौजूदा मानदंडों और 1982 के एसआरओ-124 के तहत जारी बागवानी (पीएंडएम) विभाग के गैर राजपत्रित सेवा भर्ती नियमों के अनुसार प्रधान सहायक के पद पर पदोन्नति के लिए पात्रता वरिष्ठ सहायकों में से की। वरिष्ठ सहायक के रूप में कम से कम 4 वर्ष की सेवा होनी चाहिए। इस पर वकीलों ने दलील दी कि उसके पास वरिष्ठ सहायक के रूप में कम से कम चार साल की सेवा नहीं है, इसलिए नियमों का उल्लंघन करते हुए उसे प्रधान सहायक के पद पर पदोन्नत नहीं किया जा सकता है। कैट ने दोनों पक्षों को सुनने के बाद नोटिस जारी किया। जवाब दाखिल करने के लिए आठ सप्ताह का समय दिया गया। -जेएनएफ
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आठ सप्ताह में जवाब दाखिल करने के निर्देश
जम्मू। केंद्रीय प्रशासनिक न्यायाधिकरण (कैट) श्रीनगर की एक खंडपीठ ने बागवानी विभाग को प्रधान सहायक के पद पर पदोन्नति देने पर रोक लगा दी है। यह कदम याचिका की सुनवाई के दौरान दोनों पक्षों की दलीलें सुनने के बाद उठाया है। साथ ही नोटिस कर जवाब आठ सप्ताह में दाखिल करने के निर्देश दिए हैं।
याचिकाकर्ता ने राहत के लिए गैर-आवेदकों को निर्देश जारी करने की मांग की है। इसमें कहा कि एसआरओ-124 को 1982 में 19 अप्रैल को जारी किया गया। इसमें प्रधान सहायक का पद उस श्रेणी में कम से कम 4 वर्ष की सेवा और सचिवालय परीक्षा उत्तीर्ण करने वाले व्यक्तियों में से से पदोन्नति द्वारा भरा जाए।
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गैर-आवेदकों को निर्देश दिया जाए कि वे गैर-आवेदक संख्या 4 को प्रधान सहायक के पद पर पदोन्नत न करें। ये 1982 के एसआरओ-124 के तहत निर्धारित पूर्व-आवश्यकता को पूरा नहीं करता है। कैट ने पाया कि याचिकाकर्ता को 2004 में आदेश संख्या के तहत बागवानी विभाग (पीएंडएम) में कनिष्ठ सहायक के रूप में नियुक्त किया गया था। आगे कहा गया है कि कनिष्ठ सहायक के रूप में 16 वर्ष से अधिक की सेवा पूरी करने के बाद, याचिकाकर्ता को आदेश संख्या के तहत वरिष्ठ सहायक के पद पर पदोन्नत किया गया था। मौजूदा मानदंडों और 1982 के एसआरओ-124 के तहत जारी बागवानी (पीएंडएम) विभाग के गैर राजपत्रित सेवा भर्ती नियमों के अनुसार प्रधान सहायक के पद पर पदोन्नति के लिए पात्रता वरिष्ठ सहायकों में से की। वरिष्ठ सहायक के रूप में कम से कम 4 वर्ष की सेवा होनी चाहिए। इस पर वकीलों ने दलील दी कि उसके पास वरिष्ठ सहायक के रूप में कम से कम चार साल की सेवा नहीं है, इसलिए नियमों का उल्लंघन करते हुए उसे प्रधान सहायक के पद पर पदोन्नत नहीं किया जा सकता है। कैट ने दोनों पक्षों को सुनने के बाद नोटिस जारी किया। जवाब दाखिल करने के लिए आठ सप्ताह का समय दिया गया। -जेएनएफ
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