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Jammu News: 17 सालों से वेतन कटौती की सजा झेल रहे टीटी को कैट से मिली राहत
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- 2009 में कथित तौर पर दो सवारियों से पैसा लेकर ट्रेन में सीट देने पर हुई थी कार्रवाई
- कैट ने मामले की फिर से निष्पक्ष जांच करने का दिया आदेश
अमर उजाला ब्यूरो
जम्मू। केंद्रीय प्रशासनिक न्यायाधिकरण (कैट) ने 17 सालों से वेतन कटौती की सजा झेल रहे भारतीय रेलवे के टीटी को राहत दी है। भ्रष्टाचार का दोषी पाए जाने पर साल 2008 में टीटी के खिलाफ विभागीय कार्रवाई की गई थी। जिसके खिलाफ टीटी ने न्यायालय की शरण ली थी। कैट ने मामले में दो महीने के भीतर फिर से निष्पक्ष जांच करने का आदेश दिया है।
जम्मू की रेलवे कॉलोनी निवासी वेद कुमार भारतीय रेलवे में मुख्य यात्रा टिकट परीक्षक (एचटीटीई) के पद पर तैनात थे। 30 मई 2005 को उनकी ड्यूटी ट्रेन संख्या 2404 में थी। इसी दिन रेलवे के सतर्कता विभाग ने जालंधर से लुधियाना के बीच ट्रेन की जांच की।
इसके बाद जांच अधिकारियों ने वेद कुमार को दो यात्रियों से बिना किराया लिए सीट देने का आरोपी बनाया। बाद में जांच अधिकारियों की ओर से वेद कुमार पर दोनों सवारियों से सीट के बदले अवैध रूप से 3,838 रुपये वसूलने का भी आरोप लगाया गया।
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इसके बाद मामले की जांच की गई और वेद कुमार दोषी मानते हुए वेतन में कटौती का दंड दिया गया। विभाग के इस आदेश को 2008 में वेद ने उच्च न्यायालय में चुनौती दी। जिसे बाद में कैट को स्थानांतरित कर दिया गया।
वेद कुमार ने अदालत में दावा किया कि मामले की जांच के दौरान उन्हें अपना पक्ष रखने का मौका नहीं दिया। वेतन कटौती की वजह से उसे विभागीय पदोन्नति का लाभ भी नहीं मिला। कैट ने वेद कुमार की दलीलों को सही मानते हुए कहा कि मामले की जांच के दौरान प्राकृतिक न्याय के सिद्धांतों का पालन नहीं किया गया। इसी के साथ कैट ने वेतन कटौती के आदेश को रद्द कर दिया।
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- कैट ने मामले की फिर से निष्पक्ष जांच करने का दिया आदेश
अमर उजाला ब्यूरो
जम्मू। केंद्रीय प्रशासनिक न्यायाधिकरण (कैट) ने 17 सालों से वेतन कटौती की सजा झेल रहे भारतीय रेलवे के टीटी को राहत दी है। भ्रष्टाचार का दोषी पाए जाने पर साल 2008 में टीटी के खिलाफ विभागीय कार्रवाई की गई थी। जिसके खिलाफ टीटी ने न्यायालय की शरण ली थी। कैट ने मामले में दो महीने के भीतर फिर से निष्पक्ष जांच करने का आदेश दिया है।
जम्मू की रेलवे कॉलोनी निवासी वेद कुमार भारतीय रेलवे में मुख्य यात्रा टिकट परीक्षक (एचटीटीई) के पद पर तैनात थे। 30 मई 2005 को उनकी ड्यूटी ट्रेन संख्या 2404 में थी। इसी दिन रेलवे के सतर्कता विभाग ने जालंधर से लुधियाना के बीच ट्रेन की जांच की।
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इसके बाद जांच अधिकारियों ने वेद कुमार को दो यात्रियों से बिना किराया लिए सीट देने का आरोपी बनाया। बाद में जांच अधिकारियों की ओर से वेद कुमार पर दोनों सवारियों से सीट के बदले अवैध रूप से 3,838 रुपये वसूलने का भी आरोप लगाया गया।
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इसके बाद मामले की जांच की गई और वेद कुमार दोषी मानते हुए वेतन में कटौती का दंड दिया गया। विभाग के इस आदेश को 2008 में वेद ने उच्च न्यायालय में चुनौती दी। जिसे बाद में कैट को स्थानांतरित कर दिया गया।
वेद कुमार ने अदालत में दावा किया कि मामले की जांच के दौरान उन्हें अपना पक्ष रखने का मौका नहीं दिया। वेतन कटौती की वजह से उसे विभागीय पदोन्नति का लाभ भी नहीं मिला। कैट ने वेद कुमार की दलीलों को सही मानते हुए कहा कि मामले की जांच के दौरान प्राकृतिक न्याय के सिद्धांतों का पालन नहीं किया गया। इसी के साथ कैट ने वेतन कटौती के आदेश को रद्द कर दिया।