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जम्मूः व्यापारियों ने कहा- आंदोलन करने को मजबूर कर रही सरकार, 16 सितंबर को बंद का ऐलान

Fri, 13 Sep 2019 02:56 PM IST
प्रशांत कुमार न्यूज डेस्क, अमर उजाला, जम्मू
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, जम्मू Published by: प्रशांत कुमार Updated Fri, 13 Sep 2019 02:56 PM IST
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Jammu Businessmen said government forcing agitation, announced to shutdown on 16 September
अखरोट

जम्मू के व्यापारियों ने राज्य शासन व्यवस्था पर आंदोलन को मजबूर करने का आरोप लगाया है। चैंबर ऑफ ट्रेडर्स फेडरेशन के प्रधान नीरज आनंद ने कहा कि राज्य प्रशासन व्यापारियों को आंदोलन की ओर धकेल रहा है। व्यापारियों का घाटी में करोड़ों रुपये का एडवांस फंसा हुआ है। घाटी से सीजनल सेब और अखरोट को निकालने की पर्याप्त व्यवस्था नदारद है। बाजार में मंदी का आलम है। पर्यटक नहीं आ रहे हैं।

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कहा कि बैंकों से ऋण लेने वाले व्यापारियों पर दबाव बढ़ा है। व्यापारियों को राहत देने के लिए काम किया जाना चाहिए। वहीं जम्मू चैंबर ऑफ कामर्स एंड इंडस्ट्री (जेसीसीआई) के संयुक्त मंच के सदस्यों ने कहा कि सरकार का टैक्स वसूली पर जोर है, लेकिन सुविधाओं और सेवाओं को लेकर उदासीनता बरती जा रही है। उन्होंने कहा कि अगर उनकी बात न सुनी गई तो 16 सितंबर को जम्मू प्रांत बंद रहेगा।
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उन्होंने कहा कि निगम ने एनओसी टैक्स पर अमल स्थगित किया है, लेकिन उस रद्द करने की अधिसूचना नहीं लाई गई है। वन टाइम मोटर व्हीकल टैक्स को वापस लिया जाना चाहिए। मंच पर इस पर कोई समझौता नहीं करेगा। जम्मूवासी राष्ट्र हित के साथ खड़े हैं। उन्होंने सुरक्षा कारणों से इंटरनेट के लिए मांग नहीं की है। लेकिन टैक्स लगाने के मामले में सरकार को गलत फीडबैक दिया जा रहा है।
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492 की नोटिफिकेशन को तत्काल रद्द किया जाए। सरकार नो पार्किंग पर चालान कर रही है, लेकिन पहले पार्किंग स्थल की व्यवस्था करें। जब पार्किंग नहीं है तो जुर्माना कैसा। देश के पूर्व केंद्रीय वित्त मंत्री और पूर्व मुख्य मंत्रियों को भ्रष्टाचार के मामले में जेलों में भेजा जा रहा है, लेकिन जम्मू-कश्मीर में राष्ट्रपति शासन में ऐसे कदम नहीं उठाए जा रहे। पेट्रोल कीमतें बढ़ाई गई हैं। ऑयल कंपनियों में म्यूनिसिपल फीस जोड़ी गई है।


राज्य में टैक्स बढ़ाए बिना राजस्व को बढ़ाया जा सकता है। लेकिन इसके लिए भ्रष्टाचार पर नकेल कसी जाए। घाटी में बाढ़ के बाद 2000 करोड़ की मदद वर्ल्ड बैंक ने दी थी लेकिन आज तक जमीनी हालात नहीं सुधरे हैं। जेएंडके किसान काउंसिल के चेयरमैन राजेश शर्मा ने चैंबर के फैसले का समर्थन किया।

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