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जम्मू कश्मीर: पुलिस विभाग में महिला पुलिस अफसरों का टोटा, प्रदेश में महज 4 जिलों में है महिला थाना

Wed, 19 Apr 2023 04:00 PM IST
kumar गुलशन कुमार अजय मीनिया, जम्मू
अजय मीनिया, जम्मू Published by: kumar गुलशन कुमार Updated Wed, 19 Apr 2023 04:00 PM IST
सार

जिला जम्मू में सिर्फ एक थाने में महिला थानेदार हैं, जबकि पूरे जिले की पुलिस चौकियों में कहीं पर भी कोई महिला चौकी अधिकारी तक नहीं है।

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Jammu and Kashmir: Shortage of women police officers in police department only four women police station
jammu kashmir police women constable (File) - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

केंद्र शासित प्रदेश जम्मू कश्मीर की पुलिस में महिला अफसरों की भारी कमी है। थानों से लेकर जिला अधिकारी की कमान तक लेने वालों में इक्का दुक्का ही महिला अफसर हैं। इस वजह से थानों से लेकर एसएसपी कार्यालय तक जाने के लिए विभिन्न अपराधों का शिकार होने वाली महिलाएं हिचकिचाती हैं।

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महिला अधिकारियों का टोटा किस कदर है, इसका अंदाजा इसी से लगाया जा सकता है कि प्रदेश के सबसे महत्वपूर्ण जिला जम्मू में सिर्फ एक थाने में महिला थानेदार हैं, जबकि पूरे जिले की पुलिस चौकियों में कहीं पर भी कोई महिला चौकी अधिकारी तक नहीं है।
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जानकारी के अनुसार जम्मू जिले के 26 थानों में सिर्फ दो में ही महिला थानेदार हैं। इनमें भी एक थाना महिला थाना है। यहां पर महिला पुलिस अफसर ही तैनात होनी है, जबकि बाग-ए-बाहु पुलिस स्टेशन में एक महिला थानेदार हैं। जिला स्तर पर भी महिला पुलिस अफसरों की संख्या बहुत कम है। इस समय जम्मू-कश्मीर के 20 जिलों में राबमन, हंदवाड़ा और शोपियां जिले में ही महिला पुलिस अफसर तैनात हैं। थानों में महिला कर्मियों की भी कमी है। हर थाने में तीन से चार पुलिस कर्मी ही तैनात हैं, जबकि थानों में बाकी का स्टाफ 60 से 70 कर्मियों का रहता है।
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इन जिलों में महिला थाना तक नहीं

बता दें कि जम्मू कश्मीर के अवंतीपुरा, बांदीपोरा, बडगाम, गांदरबल, हंदवाड़ा, कुलगाम, कुपवाड़ा, पुलवामा, शोपियां, सोपोर, डोडा, किश्तवाड़, पुंछ, रियासी, रामबन और सांबा जिलों में कोई महिला थाना नहीं है, जबकि कश्मीर में महिलाओं के प्रति अपराध के मामले लगातार बढ़ रहे हैं। कश्मीर में महिलाओं के प्रति पिछले वर्ष अपराध के मामलों में 15 फीसदी की बढ़ोतरी हुई है, जबकि जम्मू संभाग में भी यह ग्राफ इतना ही है।

हर जिले में महिला थाना होना चाहिए

पूर्व विधायक एवं महिला कल्याण मंत्री सकीना इट्टू का कहना है कि हर जिले में एक महिला थाना होना चाहिए, जहां पर महिलाएं बेहिचक आकर अपनी बात रख सकें। कश्मीर में महिलाओं के प्रति अपराध काफी बढ़ गया है। जम्मू के हाल भी ऐसे ही हैं। लिहाजा हर जिले में महिला थाना होना चाहिए।

महिला आयोग निरस्त होने से हुआ नुकसान

बता दें कि वर्ष 2019 में यूटी बनने के बाद महिला आयोग समेत कई आयोग निरस्त हो गए। महिला आयोग के पास हर साल महिलाओं से संबंधित 1200 शिकायतें आती थीं, लेकिन अब आयोग न होने की वजह से ऐसा नहीं हो पा रहा। अब राष्ट्रीय महिला आयोग से संपर्क करना पड़ रहा है। वर्ष 2022 में जम्मू-कश्मीर से आयोग के पास 400 शिकायतें गई हैं।


अधिकारियों को कोई जवाब नहीं

इस मामले में हमने डीजीपी दिलबाग सिंह और जम्मू संभाग के एडीजीपी मुकेश सिंह से बात करनी चाही। हम उनसे महिला अधिकारियों की कमी पर उनका पक्ष रखना चाहते हैं। वह जब भी अपना पक्ष रखना चाहेंगे। हम उसे प्रमुखता से प्रकाशित करेंगे।

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