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जम्मू-कश्मीर: परिसीमन आयोग की सिफारिशों पर नेशनल कांफ्रेंस ने उठाए सवाल, 14 पन्नों के जवाब में कही ये बात
Mon, 14 Feb 2022 10:11 PM IST
प्रशांत कुमार
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
Published by: प्रशांत कुमार
Updated Mon, 14 Feb 2022 10:11 PM IST
सार
डॉ. फारूक अब्दुल्ला जोकि नेशनल कांफ्रेंस के अध्यक्ष भी हैं, उनका कहना है कि मसौदा रिपोर्ट जन आकांक्षाओं से खिलवाड़ करती है। इसमें न तो राजनीतिक, न सामाजिक और न ही प्रशासनिक कारणों को ध्यान में रखा गया है।
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फारूक अब्दुल्ला
- फोटो : बासित जरगर
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विस्तार
नेशनल कांफ्रेंस (नेकां) ने सोमवार को परिसीमन आयोग की सिफारिशों पर सवाल उठाए हैं। जिसमें कहा है कि आयोग निर्धारित मानदंडों का उल्लंघन कर रहा है। आयोग को 14 पन्नों के जवाब में नेकां ने अपनी बात कही है। नेकां के तीन लोकसभा सदस्य फारूक अब्दुल्ला, न्यायमूर्ति (सेवानिवृत्त) हसनैन मसूदी और अकबर लोन ने पिछले साल दिसंबर में आयोजित न्यायमूर्ति (सेवानिवृत्त) रंजना देसाई की अध्यक्षता में परिसीमन आयोग की दूसरी बैठक में भाग लिया था।
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मसूदी ने सोमवार को एक होटल में स्थित आयोग के सचिवालय में पार्टी का जवाब सौंपा। पार्टी ने कहा कि आयोग का गठन जम्मू-कश्मीर के पुनर्गठन अधिनियम 2019 से जुड़ा है, जो न्यायिक जांच के दायरे में था और सुप्रीम कोर्ट ने अभी तक अपना आदेश नहीं दिया है।
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नेशनल कांफ्रेंस ने कहा कि संविधान के औचित्य के सिद्धांत की मांग है कि इस तरह के कानून को लागू नहीं किया जाना चाहिए और राज्य के सभी अंगों और उनकी संस्थाओं को शीर्ष संवैधानिक अदालत के सम्मान में इस तरह के कानून को तब तक लागू करने से बचना चाहिए जब तक कि इसकी संवैधानिकता निर्धारित नहीं हो जाती। पार्टी ने परिसीमन आयोग पर अपने निर्धारित मानदंडों और प्रथाओं से हटने का भी आरोप लगाया है।
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नेकां मसौदा प्रस्तावों का जोरदार विरोध कर रही है। जिसके हिसाब से जम्मू संभाग में विधानसभा सीटों की संख्या 37 से 43 और कश्मीर में 46 से बढ़कर 47 होगी। 2011 की जनगणना के अनुसार जम्मू संभाग की जनसंख्या 53.72 लाख, जबकि कश्मीर संभाग की जनसंख्या 68.83 लाख थी।