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जम्मू कश्मीर: आतंकियों की घुसपैठ के लिए आईएसआई ने बनाई नई रणनीति, ये हैं नापाक इरादे
Mon, 09 Jan 2023 01:24 PM IST
kumar गुलशन कुमार
अमर उजाला नेटवर्क, जम्मू
अमर उजाला नेटवर्क, जम्मू
Published by: kumar गुलशन कुमार
Updated Mon, 09 Jan 2023 01:24 PM IST
सार
नई रणनीति के तहत घुसपैठ के लिए मात्र 2 या 3 आतंकियों को ही भेजा जाता है, जबकि उनके साथ तीन से चार सहयोगियों को नियंत्रण रेखा पर घुसपैठ कराने तक के लिए उन्हें साथ भेजा जाता है।
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एलओसी पर तैनात जवान
- फोटो : फाइल
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विस्तार
भारत-पाकिस्तान के बीच नियंत्रण रेखा पर करीब दो वर्षों से जारी संघर्ष विराम के बाद नियंत्रण रेखा के उस पार पाकिस्तान अधिकृत कश्मीर में बैठे आतंकी संगठनों के आकाओं और आईएसआई की तरफ से आतंकियों को नियंत्रण रेखा के इस पार घुसपैठ कराने के लिए नई रणनीति बनाई गई है। इसके चलते आतंकी आकाओं और आईएसआई की तरफ से घुसपैठ करने वाले दलों में शामिल आतंकियों की संख्या में भी कमी की गई है।
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उसके साथ ही घुसपैठ करते समय सेना की गोलाबारी में फंस जाने अथवा घायल हो जाने वाले आतंकियों की जान बचाने के लिए उनके साथ सहयोगी भेजे जाते हैं। जो घुसपैठ करने वाले आतंकियों की घुसपैठ असफल हो जाने अथवा उनके घायल होने पर उन्हें किसी न किसी प्रकार बचा कर दोबारा पाकिस्तान अधिकृत क्षेत्र में लांचिंग पैड पर पहुंचाने का काम कर रहे हैं। सूत्रों के अनुसार नियंत्रण रेखा के उस पार से जहां पूर्व में छह आतंकियों के दल को घुसपैठ के लिए भेजा जाता था।
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वहीं अब नई रणनीति के तहत घुसपैठ के लिए मात्र 2 या 3 आतंकियों को ही भेजा जाता है, जबकि उनके साथ तीन से चार सहयोगियों को नियंत्रण रेखा पर घुसपैठ कराने तक के लिए उन्हें साथ भेजा जाता है। इनका काम घुसपैठ करने वाले आतंकियों को सुरक्षित घुसपैठ करने तक उनके साथ रहना होता है। अगर घुसपैठ करते हुए आतंकी सेना की गोलाबारी फंस जाते हैं, अथवा घायल हो जाते हैं, तो इन सहयोगियों की जिम्मेदारी यह रहती है कि वह उन्हें वहां से सुरक्षित निकालकर दोबारा पाकिस्तान अधिकृत क्षेत्र स्थित लांचिंग पैड तक पहुंचाएं।
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सूत्रों की माने तो इस नई रणनीति के पीछे आईएसआई और आतंकी आकाओं का आतंकियों को घुसपैठ के प्रयासों में कम से कम नुकसान कराना है, क्योंकि एक तरफ जहां भारतीय क्षेत्र में सुरक्षा बलों की कार्रवाई से उन्हें नई भर्ती करने में काफी कठिनाई आ रही है, वहीं पाकिस्तान अधिकृत क्षेत्र में भी आतंकियों की संख्या में कमी के चलते अब वह कम से कम आतंकियों को जानी नुकसान पहुंचाने की फिराक में रहते हैं।
एक बार अगर घुसपैठ का प्रयास नाकाम हो जाता है तो घुसपैठ करने वाले आतंकी अगर सुरक्षित बच कर पीछे लौट जाते हैं तो उसे आईएसआई और आतंकी आकाओं द्वारा अपनी एक जीत के रूप में आंका जाता है।। क्योंकि आतंकियों की नई रणनीति है कि कम से कम नुकसान के उपरांत आतंकियों को भारतीय क्षेत्र में घुसपैठ कराई जाए।
अगर पूर्व के वर्षों की बात करें तो एक समय आईएसआई द्वारा घुसपैठ के लिए भेजे गए 8 से 10 सदस्यों में से एक दो आतंकियों को मरवाने के उपरांत अन्य आतंकियों को भारतीय क्षेत्र में घुसपैठ करने के आदेश दिए थे। अब ऐसा नहीं है अब घुसपैठ करने वाले किसी भी आतंकी को जानी नुकसान ना हो इस पर ही अधिक विचार किया जाता है। इसका प्रमाण कई बार नियंत्रण रेखा पर घुसपैठ करते समय भारतीय सेना की गोलीबारी में घायल हो जाने वाले आतंकियों के द्वारा पाकिस्तान अधिकृत में पहुंच जाना।