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Jammu Election: तवी की ठंडक में गर्म हुई सियासत... न काम पूरे हुए, न रिवर फ्रंट योजना बन पाई विरासत
Mon, 16 Sep 2024 02:49 PM IST
शाहरुख खान
शशांक मिश्र, अमर उजाला, जम्मू
शशांक मिश्र, अमर उजाला, जम्मू
Published by: शाहरुख खान
Updated Mon, 16 Sep 2024 02:49 PM IST
सार
तवी की ठंडक में सियासत गर्म हो गई है। न काम पूरे हुए और न ही रिवर फ्रंट योजना विरासत बन पाई। नदी किनारे की जमीनों पर कब्जा जारी है। लोगों का कहना है कि रिवर फ्रंट योजना को लेकर अफसर संजीदा नहीं है।
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Jammu Election
- फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
तमाम आंदोलनों की गवाह रही तवी नदी का पानी जम्मू की सियासत से गर्म है। शहर के बीचों बीच बह रही नदी की जलधारा पर रविवार की दोपहर पड़ती सूरज की रोशनी भी बदहाली की गवाही देती रही। दशक भर पहले बनी तवी रिवर फ्रंट परियोजना विरासत की जगह सफेद हाथी बन चुकी है।
आस-पास रहने वाले अब रिवर फ्रंट को लेकर गुस्से में हैं मगर सरकार और सरकारी अमले को नरम लहजे में कोसते हैं। कृत्रिम झील परियोजना से लेकर बेलीचराना तक पानी में तैरते नेताओं के वादे और किनारे पर कूड़े के ढेर नदी पर चल रही सियासत की तस्वीर भी साफ कर रहे हैं।
दोपहर करीब 12 बजे बेलीचराना से नदी के किनारे पर पहुंचने के लिए कूड़े के ढेर और कंधे तक ऊंचाई वाले झाड़ से होकर गुजरना पड़ा। फिलहाल, रिवर फ्रंट का काम रुका हुआ है और पशुओं का झुंड नदी में जलक्रीड़ा में मशगूल है। यहां चहलकदमी कर रहे कुछ लोगों का कहना है कि नदियां तो हमेशा ही देश की सियासत का हिस्सा रही हैं।
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अफसरशाही ने योजना बना दी और फिर अपने हित तलाशने में जुट गई। सत्ता और विपक्ष होता तो शायद इस मुद्दे पर आवाज बुलंद होती, मगर अब कोई पूछने वाला ही नहीं है। चलते-चलते बोले, हमें राजनीति में नहीं पड़ना, इसलिए हमारा नाम मत लिखना। कहीं कोई बुरा मान जाए तो हम भी सियासत के जाल में फंस जाएंगे।
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आस-पास रहने वाले अब रिवर फ्रंट को लेकर गुस्से में हैं मगर सरकार और सरकारी अमले को नरम लहजे में कोसते हैं। कृत्रिम झील परियोजना से लेकर बेलीचराना तक पानी में तैरते नेताओं के वादे और किनारे पर कूड़े के ढेर नदी पर चल रही सियासत की तस्वीर भी साफ कर रहे हैं।
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दोपहर करीब 12 बजे बेलीचराना से नदी के किनारे पर पहुंचने के लिए कूड़े के ढेर और कंधे तक ऊंचाई वाले झाड़ से होकर गुजरना पड़ा। फिलहाल, रिवर फ्रंट का काम रुका हुआ है और पशुओं का झुंड नदी में जलक्रीड़ा में मशगूल है। यहां चहलकदमी कर रहे कुछ लोगों का कहना है कि नदियां तो हमेशा ही देश की सियासत का हिस्सा रही हैं।
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अफसरशाही ने योजना बना दी और फिर अपने हित तलाशने में जुट गई। सत्ता और विपक्ष होता तो शायद इस मुद्दे पर आवाज बुलंद होती, मगर अब कोई पूछने वाला ही नहीं है। चलते-चलते बोले, हमें राजनीति में नहीं पड़ना, इसलिए हमारा नाम मत लिखना। कहीं कोई बुरा मान जाए तो हम भी सियासत के जाल में फंस जाएंगे।
नदी किनारे बेलीचराना की रहने वाले अफसाना कहती हैं कि हम रहने वाले तो रामबन के हैं, मगर कुछ साल पहले जमीन लेकर मकान बनाया था। लंबे समय से सुन रहे हैं कि नदी के किनारे दीवार बनेगी, मगर इससे हमें बहुत मतलब नहीं है। तकलीफ केवल बारिश में होती है, जब सड़कों तक नदी का पानी पहुंच जाता है। बाकी सरकार की मर्जी, दीवार बनाए या ना बनाए।
इसी मोहल्ले के अब्दुल गफ्फार कहते हैं कि हमारे मोहल्ले के तीन चौथाई मकानों पर ताले हैं। ज्यादातर कश्मीर वालों ने मकान बनाए हैं और सर्दियों में ही तीन चार महीने के लिए आते हैं। नदी किनारे पड़ी गंदगी हमारे मोहल्ले से निकली हुई नहीं है, बल्कि बाहरी लोग गाड़ियों में लाकर यहां डंप करते हैं। सात आठ साल से रिवर फ्रंट की बात हो रही है, मगर अब तक कोई ठोस काम नहीं दिख रहा है।
नदी खूबसूरत होगी तो हमारा सिर ऊंचा होगा
गुज्जर नगर के निवासी दीपक मेहरा कहते हैं कि गुजरात के साबरमती जैसा रिवर फ्रंट बनाने की घोषणा की गई थी। छह-सात साल पहले से यह बातें शुरू हुई थीं, मगर ना तो कब्जा रुका, ना खनन। इसके पीछे कौन लोग हैं, यह भी सब जानते हैं। नदी को खूबसूरत बनाकर यह योजना पूरी होनी ही चाहिए ताकि हमें भी अपनी तवी नदी पर गर्व हो। इसी इलाके जय सिंह कहते हैं कि तवी नदी का संरक्षण दशकों पुराना मुद्दा है, अब इसकी सियासत खत्म होनी चाहिए।
गुज्जर नगर के निवासी दीपक मेहरा कहते हैं कि गुजरात के साबरमती जैसा रिवर फ्रंट बनाने की घोषणा की गई थी। छह-सात साल पहले से यह बातें शुरू हुई थीं, मगर ना तो कब्जा रुका, ना खनन। इसके पीछे कौन लोग हैं, यह भी सब जानते हैं। नदी को खूबसूरत बनाकर यह योजना पूरी होनी ही चाहिए ताकि हमें भी अपनी तवी नदी पर गर्व हो। इसी इलाके जय सिंह कहते हैं कि तवी नदी का संरक्षण दशकों पुराना मुद्दा है, अब इसकी सियासत खत्म होनी चाहिए।
एक नजर में तवी नदी का इतिहास
ग्रंथों में तवी नदी को सूर्य पुत्री बताया गया है। यह डोडा जिले के भद्रवाह में सियोधार के कल्पास कुंड से निकलती है, फिर सुध महादेव तक उतरती है और अंत में पाकिस्तान में चिनाब नदी में मिल जाती है। जम्मू शहर से बहते हुए तवी ने शहर को दो भागों में विभाजित किया है।
ग्रंथों में तवी नदी को सूर्य पुत्री बताया गया है। यह डोडा जिले के भद्रवाह में सियोधार के कल्पास कुंड से निकलती है, फिर सुध महादेव तक उतरती है और अंत में पाकिस्तान में चिनाब नदी में मिल जाती है। जम्मू शहर से बहते हुए तवी ने शहर को दो भागों में विभाजित किया है।
पुराना शहर और नया शहर। तवी नदी रिवर फ्रंट योजना के पहले चरण में करीब 156.38 करोड़ रुपये से दोनों किनारों पर स्लैब सहित अन्य काम किए जाने हैं। इसमें भगवती नगर पुल से बिक्रम चौक पुल तक तवी नदी के दोनों तरफ 3.5 किमी कार्य होगा। मगर इसकी सुस्त रफ्तार अब चुनावी मुद्दा बन रही है।