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जम्मू-कश्मीर: पहाड़ी जिलों से पलायन की वजह तलाश रहा है केंद्रीय विश्वविद्यालय
Wed, 13 Oct 2021 04:32 PM IST
करिश्मा चिब
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, जम्मू
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, जम्मू
Published by: करिश्मा चिब
Updated Wed, 13 Oct 2021 04:32 PM IST
सार
नीति आयोग की परियोजना पर केंद्रीय विश्वविद्यालय के शोधकर्ता जुटा रहे आंकड़े। कठुआ, राजोरी, पुंछ, डोडा और किश्तवाड़ पर केंद्रित है शोध।
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central university of jammu
- फोटो : फाइल, अमर उजाला
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विस्तार
जम्मू संभाग के पांच पहाड़ी जिलों से ग्रामीणों के शहर की ओर पलायन पर केंद्रीय विश्वविद्यालय का सामाजिक कार्य विभाग शोध कर रहा है। राजोरी, कठुआ, पुंछ, डोडा और किश्तवाड़ से केस स्टडी के लिए अभी तक 1500 सैंपल लिए जा चुके हैं। जनवरी, 2022 तक शोध टीम पलायन की मुख्य वजहों को लेकर निष्कर्ष पर पहुंचेगी।
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सामाजिक कार्य विभाग के डॉ. विनय कुमार ने बताया कि नीति आयोग की परियोजना के तहत पहाड़ी क्षेत्रों से पलायन के कारण जानने के लिए शोध चल रहा है। पलायन के कई कारण हो सकते हैं। प्रारंभिक तौर पर बेरोजगारी, कम निजी अवसर, प्राकृतिक असंतुलन, राजनीतिक प्रभाव और भय, भेदभाव, प्रदूषण और शिक्षा के कम अवसर माने जा सकते हैं।
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हालांकि इसकी अंतिम रिपोर्ट जनवरी, 2022 तक तैयार की जाएगी। डॉ. विनय कुमार ने बताया कि पलायन का अधिकांश प्रभाव आर्थिक, जनशक्ति नियोजन, नागरिकीकरण और सामाजिक परिवर्तन पर पड़ता है। उन्होंने बताया कि ग्रामीण क्षेत्रों में आर्थिक उन्नति और तकनीकी विकास की कमी होती है।
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इस कमी को पूरा करने के लिए लोग शहरों की ओर रुख कर रहे हैं। दूरदराज के इलाकों और ग्रामीण क्षेत्रों में कई सुविधाओं की कमी है। सुविधाओं के अभाव में लोग रोजी-रोटी कमाने के लिए शहरों की ओर जा रहे हैं।