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जम्मू-कश्मीर: टीआरएफ से थे जुड़े श्रीनगर मुठभेड़ में मारे गए तीनों आतंकियों के मददगार, सबूतों से बड़ा खुलासा
Sat, 02 Jan 2021 09:39 AM IST
शाहरुख खान
अमर उजाला नेटवर्क, श्रीनगर
अमर उजाला नेटवर्क, श्रीनगर
Published by: शाहरुख खान
Updated Sat, 02 Jan 2021 09:39 AM IST
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आतंकियों के समर्थन में लाल चौक पर बंद दुकानें
- फोटो : अमर उजाला
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जम्मू-कश्मीर पुलिस ने शुक्रवार को दावा किया कि तकनीकी जांच में यह बात सामने आई है कि लावेपोरा मुठभेड़ में मारे गए तीन में से दो आतंकी संगठन लश्कर-ए-ताइबा के द रजिस्टेंस फ्रंट (टीआरएफ) के लिए ओजीडब्ल्यू के तौर पर काम कर रहे थे।
पुलिस ने बताया कि श्रीनगर में हुई मुठभेड़ सेना को मिले इनपुट के आधार पर शुरू हुई और बाद में यह सेना, सीआरपीएफ और पुलिस के संयुक्त ऑपरेशन में बदल गई। घेराबंदी के बाद आतंकियों ने अंदर से सर्च पार्टी पर ग्रेनेड दागे और फायरिंग की। हालांकि, एसओपी के तहत आतंकियों से बार-बार आत्मसमर्पण करने की अपील की गई।
पुलिस ने कहा कि माता-पिता ने जो दावा किया था कि एजाज मकबूल गनई यूनिवर्सिटी में फॉर्म भरने के लिए गया था उसे भी चेक किया गया। दूरसंचार विभाग के रिकॉर्ड सहित आधुनिक तकनीकों के माध्यम से इसे वेरिफाई और क्रॉस चेक किया गया। इससे पता चला कि एजाज और अथर हैदरपोरा गए थे और वहां से फिर मुठभेड़ स्थल पर पहुंचे।
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पुलिस ने यह भी कहा कि जुबैर पहले पुलवामा, फिर अनंतनाग और फिर शोपियां से पुलवामा गया था। एजाज और अथर के बैकग्राउंड चेक करने पर यह बात भी सामने आई है कि दोनों आतंकियों को मदद मुहैया करवाते रहे हैं। दोनों टीआरएफ के साथ जुड़े हुए थे।
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पुलिस ने बताया कि श्रीनगर में हुई मुठभेड़ सेना को मिले इनपुट के आधार पर शुरू हुई और बाद में यह सेना, सीआरपीएफ और पुलिस के संयुक्त ऑपरेशन में बदल गई। घेराबंदी के बाद आतंकियों ने अंदर से सर्च पार्टी पर ग्रेनेड दागे और फायरिंग की। हालांकि, एसओपी के तहत आतंकियों से बार-बार आत्मसमर्पण करने की अपील की गई।
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पुलिस ने कहा कि माता-पिता ने जो दावा किया था कि एजाज मकबूल गनई यूनिवर्सिटी में फॉर्म भरने के लिए गया था उसे भी चेक किया गया। दूरसंचार विभाग के रिकॉर्ड सहित आधुनिक तकनीकों के माध्यम से इसे वेरिफाई और क्रॉस चेक किया गया। इससे पता चला कि एजाज और अथर हैदरपोरा गए थे और वहां से फिर मुठभेड़ स्थल पर पहुंचे।
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पुलिस ने यह भी कहा कि जुबैर पहले पुलवामा, फिर अनंतनाग और फिर शोपियां से पुलवामा गया था। एजाज और अथर के बैकग्राउंड चेक करने पर यह बात भी सामने आई है कि दोनों आतंकियों को मदद मुहैया करवाते रहे हैं। दोनों टीआरएफ के साथ जुड़े हुए थे।
पुलिस के अनुसार वर्तमान में पुलिस हिरासत में रहने वाले एक मददगार ने बताया कि एजाज लश्कर आतंकी फैसल मुश्ताक के संपर्क में था, जो पिछले साल जून में मीज (पांपोर) मुठभेड़ में मारा गया था। अथर हिजबुल मुजाहिदीन के शीर्ष कमांडर रईस काचरू का रिश्तेदार और ओजीडब्ल्यू था जो वर्ष 2017 में मारा गया था।
श्रीनगर में बंद रहीं दुकानें
परिवार वालों द्वारा अपने बच्चों को बेगुनाह बताने के बाद शुक्रवार को उनके समर्थन में श्रीनगर शहर में दुकानें बंद रहीं। लाल चौक, रेजिडेंसी रोड, माइसूमा, कुकर बाजार के साथ-साथ डाउनटाउन इलाके में भी दुकानें बंद रहीं। बंद का आह्वान किसी संगठन ने नहीं किया था। इसके अलावा पुलवामा और शोपियां में लगातार दूसरे दिन बंद का आह्वान किया गया।
महबूबा ने एलजी को लिखा पत्र, कहा-श्रीनगर मुठभेड़ की हो निष्पक्ष जांच
जम्मू-कश्मीर की पूर्व मुख्यमंत्री और पीडीपी अध्यक्ष महबूबा मुफ्ती ने शुक्रवार को जम्मू-कश्मीर के एलजी मनोज सिन्हा को पत्र लिखकर आग्रह किया कि 30 दिसंबर को श्रीनगर में हुई मुठभेड़ की निष्पक्ष जांच की जाए। उन्होंने पत्र में कहा कि परिवारों को इच्छानुसार अंतिम संस्कार करने का भी मौका मिलना चाहिए।
पत्र में यह भी लिखा कि परिवारों ने इस मुठभेड़ को फर्जी बताया है। वहीं नेकां के सांसद हसनैन मसूदी ने भी उपराज्यपाल से मामले की जांच कराने की मांग की है। नेकां प्रवक्ता ने कहा कि मसूदी ने एचएमटी इलाके में हुई मुठभेड़ के बारे में उनसे बातचीत की और अपना पक्ष रखा।
श्रीनगर में बंद रहीं दुकानें
परिवार वालों द्वारा अपने बच्चों को बेगुनाह बताने के बाद शुक्रवार को उनके समर्थन में श्रीनगर शहर में दुकानें बंद रहीं। लाल चौक, रेजिडेंसी रोड, माइसूमा, कुकर बाजार के साथ-साथ डाउनटाउन इलाके में भी दुकानें बंद रहीं। बंद का आह्वान किसी संगठन ने नहीं किया था। इसके अलावा पुलवामा और शोपियां में लगातार दूसरे दिन बंद का आह्वान किया गया।
महबूबा ने एलजी को लिखा पत्र, कहा-श्रीनगर मुठभेड़ की हो निष्पक्ष जांच
जम्मू-कश्मीर की पूर्व मुख्यमंत्री और पीडीपी अध्यक्ष महबूबा मुफ्ती ने शुक्रवार को जम्मू-कश्मीर के एलजी मनोज सिन्हा को पत्र लिखकर आग्रह किया कि 30 दिसंबर को श्रीनगर में हुई मुठभेड़ की निष्पक्ष जांच की जाए। उन्होंने पत्र में कहा कि परिवारों को इच्छानुसार अंतिम संस्कार करने का भी मौका मिलना चाहिए।
पत्र में यह भी लिखा कि परिवारों ने इस मुठभेड़ को फर्जी बताया है। वहीं नेकां के सांसद हसनैन मसूदी ने भी उपराज्यपाल से मामले की जांच कराने की मांग की है। नेकां प्रवक्ता ने कहा कि मसूदी ने एचएमटी इलाके में हुई मुठभेड़ के बारे में उनसे बातचीत की और अपना पक्ष रखा।