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मेधावी छात्र: 'मेरे जैसे नेता भी चुनाव हार कर उठे, कभी हिम्मत न हारो, सभी चुनौतियां दूर होंगी', बोले उमर

Sat, 14 Dec 2024 12:01 PM IST
निकिता गुप्ता अमर उजाला नेटवर्क, जम्मू
अमर उजाला नेटवर्क, जम्मू Published by: निकिता गुप्ता Updated Sat, 14 Dec 2024 12:01 PM IST
सार

मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला ने मेधावी छात्रों को प्रेरित करते हुए सफलता, शिक्षा सुधार, नशे के खिलाफ जागरूकता और जलवायु परिवर्तन पर जिम्मेदारी निभाने की अपील की।

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jammu Amar Ujala Meritorious Student Award Ceremony
अमर उजाला मेधावी छात्र सम्मान समारोह - फोटो : अभिषेक बडू

विस्तार

ख़ुदी को कर बुलंद इतना कि हर तक़दीर से पहले, ख़ुदा बंदे से ख़ुद पूछे बता तेरी रज़ा क्या है

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मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला ने कहा कि हमें कभी हिम्मत नहीं हारनी चाहिए। इस सबक को याद रखते हुए हमेशा आगे बढ़ते रहना चाहिए। इससे कभी कोई चुनौती आपके आड़े नहीं आएगी। इसी साल मैं लोकसभा चुनाव लड़ा, लेकिन अति आत्मविश्वास में फंस गया। नतीजों से पहले ही सोचने लगा कि संसद में क्या सवाल करूंगा। चुनाव में मिली हार ने मुझे तोड़ दिया। कुछ दिन तो इन परिस्थितियों को समझ ही नहीं पाया।

मैंने हिम्मत नहीं छोड़ी। आगे बढ़कर विधानसभा चुनाव जीता और आज मैं सीएम हूं।मुख्यमंत्री ने शुक्रवार को कन्वेंशन सेंटर जम्मू में अमर उजाला के मेधावी छात्र सम्मान समारोह में विद्यार्थियों काे अपनी जिंदगी के सबक बताते हुए प्रेरित किया और उनका हौसला बढ़ाया। सफलता की कई टिप्स देते हुए अपने और अपने साथियों की मिसाल साझा की। ख़ुदी को कर बुलंद इतना कि हर तक़दीर से पहले, ख़ुदा बंदे से ख़ुद पूछे बता तेरी रज़ा क्या है। शेयर के साथ संबोधन की शुरुआत करते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि कारगिल से हमारे एक वरिष्ठ साथी हैं।
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वह हिल काउंसिल का चुनाव हार गए। उनके जीतने की उम्मीद की जा रही थी और उन्हें चेयरमैन बनाने तक की तैयारी थी। वह इस हार के बाद कह सकते थे कि अब मेरे पास करने को कुछ नहीं रहा, लेकिन उन्होंने हिम्मत नहीं छोड़ी और आज वह सांसद हैं। अगर हम हौसला नहीं छोड़ेंगे तो आखिर में कोई भी भगवान आपकी तकदीर लिखने से पहले आपको पूछेंगे। मुख्यमंत्री ने बच्चों से सीखने की कला पर जोर देते हुए कहा कि जिंदगी के हर मोड़ पर कुछ न कुछ सीखने को मिलता है। पहले हम स्कूल, कॉलेज, विश्वविद्यालय में सीखते हैं, फिर जिंदगी से सबक मिलता है और एक सबक ऐसा भी होता है जिसे हम दूसरों के अनुभव से सीखते हैं।
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मैं आपकी उम्र का था तो मुझे लगता था कि मैं संपूर्ण हूं, लेकिन ऐसा नहीं होता, हम किसी भी उम्र में सीखते हैं। वक्त हमेशा कुछ न कुछ सिखाता है। उन्होंने कहा कि जहां कहीं भी आपको कोई बुजुर्ग मिले और कुछ बताए तो उसे गौर से सुनो। बुजुर्गों से मिलने वाली सीख को नजरअंदाज न करें, वे भविष्य में हमेशा फायदा ही देगी।

हम शिक्षा प्रणाली में सुधार लाएंगे ताकि बच्चों का बचपन खराब न हो
मुख्यमंत्री ने कहा कि हम बच्चों पर उनकी क्षमता से अधिक दबाव डाल रहे हैं। जब मैं कालेज के दाखिले को देखता हूं तो कभी-कभी डर लगता है। इसमें कुछ प्रतिष्ठित संस्थानों में कट आफ 98 से 100 प्रतिशत तक जा रहा है। मैं पूछना चाहता हूं कि 100 प्रतिशत से अधिक क्या हो सकता है। बदकिस्मती से ऐसे दबाव में हम विद्यार्थियों का बचपन छीन रहे हैं।

कॉलेज, विश्वविद्यालय, सिविल सर्विस की तैयारी में हमारा बचपन निकल जाता है। हमें यह बचपन दोबाना नहीं मिलेगा। हमें निर्धारित वक्त से पहले बच्चों का बचपन नहीं छीनना चाहिए। हमें उन्हें खुलकर जीने देना चाहिए। हम कोशिश करेंगे कि हमारी सरकार शिक्षा प्रणाली में ऐसे सुधार लाए, जिसमें इस दबाव को कम किया जा सके। शिक्षा के साथ हमारे बच्चे तंदुरुस्त रहने के लिए कम से कम दिन में आधा घंटा खेलकूद में दें।

किताबें पढ़ें और दिमाग को संतुलित रखेंउमर ने बच्चों को पढ़ने के लिए प्रेरित किया। कहा कि टेक्सट बुक के अलावा कोई भी एक किताब पढ़ने की आदत डालें। चाहे वो कोई भी किताब हो। भले ही फिक्शन हो। मुझमें मेरी मां ने यह आदत डाली है। मैं रात को किसी न किसी किताब के जितने भी पन्ने पढ़ने का वक्त मिले पढ़ता हूं। किताब पढ़े बिना मुझे नींद ही नहीं आती। दूसरा किताब पढ़कर सुबह आप तरोताजा उठते हो और आपका पूरा दिन अच्छा निकलता है। इससे मेरे दिमाग में संतुलन बना रहता है।

नशे के खिलाफ काम कर रही सरकार, मगर समाज का सहयोग जरूरी
मुख्यमंत्री ने जम्मू-कश्मीर में युवाओं में बढ़ते नशे के चलन पर चिंता जताई। उन्होंने कहा कि सरकार नशे के खिलाफ काम कर रही है। इस पर अंकुश लगाने के लिए समाज के सहयोग के साथ बच्चों के भी आगे आने की जरूरत है। जब भी युवाओं की बात होती है तो उसके साथ नशा जुड़ जाता है। आप मेधावी हैं और खुशकिस्मत हैं कि इस दलदल में नहीं फंसे। आपको दूसरों को भी नशे से निकालना है। मैं लोगों से अपील करना चाहता हूं कि अगर आपका कोई साथी या जान पहचान वाला नशे में फंस गया है तो उसके पुनर्वास के लिए काम करें।

जलवायु परिवर्तन की चुनौतियां, हम बुजुर्गों की विरासत को नहीं संभाल पाए, इसे संभालने की आपकी बारीमुख्यमंत्री ने कहा कि जम्मूृ-कश्मीर में जलवायु परिवर्तन साफ महसूस किया जा सकता है। दिसंबर में गुलमर्ग में बर्फ होती थी। वहां जाने की नहीं सोच सकते थे। जम्मू में इतनी ठंड हुआ करती थी कि बिना हीटर बैठ पाना संभव ही नहीं होता था।

आज दिन में स्वैटर भी न पहनें तो कोई ज्यादा तकलीफ नहीं होगी। हम सही मायने में लोगों को जलवायु परिवर्तन के गंभीर परिणामों के बारे में समझा नहीं पा रहे हैं। हमें अपने बुजुर्गों से बहुत अच्छी कुदरत विरासत में मिली थी, लेकिन हमारी पीढ़ी इसे संभाल नहीं पाई। अब इसे ठीक करने की जिम्मेदारी आपकी है। हमारी उम्र तेजी से निकल रही है। कल आप हमारी जगह होंगे तो कुदरत को न संभाल पाने का ये अफसोस नहीं होना चाहिए। हम आज भी कोशिश करें तो धीरे-धीरे इन परिस्थितियों को ठीक कर सकते हैं। हालांकि सरकार की जिम्मेदारी इसमें अधिक है, मगर जनभागीदारी भी जरूरी है।

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